जीरो धुआं, फुल स्पीड! भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन शुरू; जानिए रूट, स्पीट, भविष्य और क्यों है यह बेहद खास
India’s First Hydrogen Train. भारतीय रेलवे ने ‘हरित भारत’ (Green India) के संकल्प की ओर एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी कदम बढ़ाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरियाणा के जींद रेलवे स्टेशन से देश की पहली हाइड्रोजन-पावर्ड ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
इस ट्रेन की शुरुआत के साथ ही भारत अब जर्मनी, जापान, चीन और अमेरिका जैसे दुनिया के उन चुनिंदा देशों के क्लब में शामिल हो गया है, जिनके पास अपनी हाइड्रोजन ट्रेन तकनीक है। प्रधानमंत्री ने इस मौके पर जींद के एकलव्य स्टेडियम से ₹14,700 करोड़ की अन्य विकास परियोजनाओं का शिलान्यास भी किया।
कैसी है देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन?
यह ट्रेन न सिर्फ पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि यात्रियों के लिए भी बेहद आधुनिक और आरामदायक है:
- रूट और फेरे: यह ट्रेन जींद से सोनीपत के बीच 89 किलोमीटर के रूट पर दौड़ रही है। यह रोजाना दिन में 2 राउंड ट्रिप (आना-जाना) करेगी, यानी हर दिन कुल 356 किलोमीटर का सफर तय करेगी।
- समय और ठहराव: 89 किलोमीटर की इस दूरी को यह ट्रेन मात्र 2 घंटे में तय करेगी। अपने सफर के दौरान यह कुल 12 स्टेशनों पर रुकेगी।
- कैपेसिटी (क्षमता): इस ट्रेन में 2 ड्राइविंग पावर कार और 8 पैसेंजर कोच सहित कुल 10 कोच हैं। एक बार में इसमें 2,600 यात्री सफर कर सकते हैं।
- सफल ट्रायल: नियमित सेवा शुरू होने से पहले पिछले ढाई महीनों में इस ट्रेन का सोनीपत, जींद और नई दिल्ली के बीच 75 किमी से लेकर 120 किमी प्रति घंटे की रफ्तार पर सफल ट्रायल किया जा चुका है।
आम जनता के लिए यह क्यों है खास?
1. प्रदूषण से 100% मुक्ति
इस ट्रेन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह पूरी तरह पर्यावरण के अनुकूल है। इसे चेन्नई की Integral Coach Factory (ICF) में स्वदेशी रूप से डिजाइन किया गया है। यह ट्रेन हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक पर चलती है, जो ऑक्सीजन और हाइड्रोजन के मिश्रण से बिजली बनाती है। इस ट्रेन को चलने के लिए न तो डीजल की जरूरत है और न ही सिर के ऊपर लगे बिजली के तारों (OHE) की। यह ट्रेन धुएं की जगह सिर्फ पानी की भाप (Water Vapor) छोड़ती है। यानी हवा में शून्य प्रदूषण!
2. आवाज रहित और आरामदायक सफर
पारंपरिक डीजल इंजनों की तुलना में हाइड्रोजन ट्रेनें बहुत कम आवाज करती हैं। इसके इंजन में वाइब्रेशन (कंपन) न के बराबर होता है, जिससे यात्रियों को एक बेहद शांत, वीआईपी और आरामदायक सफर का अनुभव मिलता है।
3. भविष्य की लाइफलाइन: ‘हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज’
रेलवे विशेषज्ञों के अनुसार, यह ट्रेन भारत के ‘नेट जीरो कार्बन एमिशन 2030’ के लक्ष्य को हासिल करने में मील का पत्थर साबित होगी। आने वाले समय में रेलवे देश के संकरे और पहाड़ी रूट्स (जैसे कालका-शिमला, दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे) पर भी ऐसी ट्रेनें चलाने की योजना बना रहा है, जिससे हमारे खूबसूरत पर्यटन स्थल प्रदूषण से बचे रहें।
जींद-सोनीपत रूट पर सफर करने वाले दैनिक यात्री (Daily Commuters) अब इस आधुनिक, तेज और पर्यावरण-हितैषी ट्रेन सेवा का लाभ उठा सकते हैं। लोकल स्टेशनों पर इसकी समय सारणी (Time Table) उपलब्ध करा दी गई है।

