CKS प्रमुख अमित बघेल की रिहाई: बलौदाबाजार कांड के आरोप और गिरफ्तारी से जमानत तक की पूरी इनसाइड स्टोरी
Amit Baghel News. छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना (CKS) और जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी (JCP) के संस्थापक-प्रमुख अमित बघेल की गिरफ्तारी और उनकी रिहाई को लेकर छत्तीसगढ़ के स्थानीय समाजों में भारी हलचल है। छत्तीसगढ़ी अस्मिता की आवाज उठाने वाले अमित बघेल की लंबे समय तक न्यायिक हिरासत में रहने की घटना को स्थानीय समर्थक जहां छत्तीसगढ़िया हितों पर प्रहार मान रहे हैं, वहीं प्रशासन इसे कानून-व्यवस्था बनाए रखने की अनिवार्य कार्रवाई बता रहा है।
बलौदाबाजार हिंसा कांड: क्या थे आरोप?
10 जून 2024 को बलौदाबाजार में सतनामी समाज के पूजनीय धार्मिक प्रतीक ‘जैतखाम’ की कथित तोड़फोड़ के विरोध में एक विशाल प्रदर्शन का आयोजन किया गया था। यह प्रदर्शन देखते ही देखते हिंसक हो गया और उग्र भीड़ ने बलौदाबाजार कलेक्ट्रेट, पुलिस अधीक्षक (SP) कार्यालय और तहसील दफ्तरों में तोड़फोड़ कर कलेक्ट्रेट परिसर को आग के हवाले कर दिया। इस भीषण आगजनी में करीब 12 से 14 करोड़ रुपये की सरकारी और निजी संपत्ति खाक हो गई थी।
अमित बघेल पर आरोप:
- भीड़ को भड़काना: पुलिस का आरोप था कि अमित बघेल और उनकी संस्था छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के प्रमुख पदाधिकारियों ने मंच से भड़काऊ भाषण देकर भीड़ को उकसाया।
- आपराधिक साजिश: उन पर भीड़ को सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और पुलिसकर्मियों पर पथराव (लाठी, डंडे और लोहे की रॉड से हमला) करने की साजिश रचने का आरोप लगा।
- सरकारी काम में बाधा: कलेक्ट्रेट दफ्तरों में घुसकर सरकारी कामकाज रोकने और आगजनी कराने के तहत बलौदाबाजार पुलिस ने अमित बघेल को पूर्व में दर्ज अन्य मामलों से प्रोडक्शन वारंट पर लेकर बलौदाबाजार केस में गिरफ्तार किया था।
अमित बघेल पर कहां और कितने केस दर्ज हैं?
अमित बघेल का कानूनी रिकॉर्ड काफी लंबा रहा है। उनके वकीलों के अनुसार, छत्तीसगढ़ व देश के अन्य हिस्सों को मिलाकर उन पर करीब 33 आपराधिक मामले दर्ज रहे हैं, जिनमें से 14 मामले बेहद सक्रिय रहे हैं:
- धार्मिक एवं सामाजिक टिप्पणी मामले: छत्तीसगढ़ महतारी के कथित अपमान के खिलाफ तीखी प्रतिक्रिया देने और सिंधी व अग्रवाल समाज के खिलाफ विवादित टिप्पणी करने को लेकर उनके खिलाफ रायपुर के तेलीबांधा, देवेंद्र नगर, कोतवाली सहित छत्तीसगढ़ के विभिन्न थानों में करीब 14 एफआईआर दर्ज की गई थीं।
- जैन मुनि विवाद: इससे पहले मई 2022 में बालोद में जैन संतों के खिलाफ कथित अमर्यादित टिप्पणी के आरोप में भी उन्हें अंबिकापुर (सरगुजा) से गिरफ्तार किया गया था।
- बलौदाबाजार आगजनी मामला: इस मामले में पुलिस ने उनके खिलाफ हत्या के प्रयास (307), दंगा भड़काने (147, 148, 149), सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने तथा षड्यंत्र रचने (120B) जैसी गंभीर धाराओं के तहत कई एफआईआर (जैसे अपराध क्रमांक 379/2024, 380/2024 आदि) दर्ज की थीं।
गिरफ्तारी से लेकर रिहाई और जमानत तक का सफर
- समानांतर गिरफ्तारियां (दिसंबर 2025 – जनवरी 2026): अमित बघेल को सबसे पहले दिसंबर 2025 में सामाजिक टिप्पणी विवाद मामले में गिरफ्तार किया गया था। वे रायपुर सेंट्रल जेल में बंद थे, इसी बीच 14 जनवरी 2026 को बलौदाबाजार पुलिस ने उन्हें कलेक्ट्रेट हिंसा मामले में प्रोडक्शन वारंट पर गिरफ्तार कर लिया।
- रायपुर कोर्ट से झटका: निचली अदालतों ने बार-बार उनकी पुलिस रिमांड और न्यायिक हिरासत बढ़ाई। बलौदाबाजार कोर्ट ने भी उनकी जमानत याचिकाओं को सिरे से खारिज कर दिया।
- हाईकोर्ट से आंशिक राहत और पुन: झटका:
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अप्रैल 2026 में बिलासपुर हाईकोर्ट ने सामाजिक व धार्मिक टिप्पणी से जुड़े 14 मामलों में अमित बघेल को 3 महीने की सशर्त अंतरिम जमानत दी थी। शर्त यह थी कि वे रायपुर जिले की सीमा में प्रवेश नहीं करेंगे।
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लेकिन बलौदाबाजार आगजनी और कलेक्ट्रेट हिंसा मामले में उन्हें राहत नहीं मिली। मई 2026 में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के जस्टिस एन.के. व्यास की एकल पीठ ने अमित बघेल, अजय यादव और दिनेश कुमार वर्मा की जमानत याचिकाएं यह कहते हुए खारिज कर दी थीं कि “करोड़ों की सरकारी संपत्ति को फूंकने और भीड़ को भड़काने जैसे गंभीर अपराधों में जमानत नहीं दी जा सकती।”
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लंबी कानूनी लड़ाई के बाद रिहाई: लगभग 8 महीने तक अलग-अलग मामलों में जेल के भीतर रहने और सभी एफआईआर में एक-एक कर जमानत मिलने (अथवा कोर्ट से राहत मिलने) के बाद ही उनकी जेल से बाहर आने का मार्ग प्रशस्त हो पाया, जिसे उनके समर्थकों ने छत्तीसगढ़िया स्वाभिमान की जीत के रूप में मनाया।
उनके साथ और कौन-कौन गिरफ्तार हुआ था?
बलौदाबाजार हिंसा मामले में पुलिस ने बेहद आक्रामक कार्रवाई करते हुए अब तक 200 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है। अमित बघेल के साथ मुख्य रूप से निम्नलिखित पदाधिकारियों की गिरफ्तारियां हुईं:
- अजय यादव: छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के प्रदेश अध्यक्ष (जिन्हें अमित बघेल का बेहद करीबी माना जाता है)।
- दिनेश कुमार वर्मा (दिनेश वर्मा): जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के प्रदेश संगठन मंत्री।
- नोविल कुमार नवरंग: सह-आरोपी, जिनकी जमानत याचिकाएं भी अमित बघेल के साथ ही खारिज हुई थीं।
- देवेंद्र नेताम: जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के प्रदेश सचिव (इन्हें भी जनवरी 2026 में भिलाई से हिरासत में लेकर पूछताछ की गई थी)। इसके अलावा भीम आर्मी, सतनामी समाज के कुछ स्थानीय नेताओं और कांग्रेस से जुड़े कुछ कार्यकर्ताओं को भी पुलिस ने इस उपद्रव में शामिल होने के आरोप में जेल भेजा था।

