अदालतों में AI का खतरनाक खेल: सुप्रीम कोर्ट ने ‘फर्जी फैसलों’ (AI-Hallucinated Precedents) पर जताई नाराजगी
AI Hallucination in Court. देश की न्यायिक प्रणाली में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते दुरुपयोग को लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने एक बेहद सख्त और ऐतिहासिक रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) के सामने वकीलों द्वारा एआई-जनरेटेड ‘फर्जी अदालती फैसलों’ और नजीरों (Precedents) को पेश करने की घटना पर गहरी चिंता और नाराजगी व्यक्त की है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस कृत्य को न्यायिक प्रक्रिया के लिए बेहद घातक और “विनाशकारी” बताते हुए न केवल NCLT के उस आदेश को रद्द कर दिया, बल्कि बार काउंसिल को इस संबंध में सख्त नियम बनाने के निर्देश भी जारी किए हैं। यह मामला सीधे तौर पर सोशल मीडिया की कोई आम अफवाह नहीं, बल्कि देश के कानूनी इतिहास की एक गंभीर ‘फर्जी’ घटना बन गया है।
क्या है पूरा मामला? (AI Hallucination इन कोर्ट)
दरअसल, NCLT के समक्ष चल रहे एक मामले के दौरान वकीलों द्वारा अपनी दलीलों को मजबूत करने के लिए कुछ पुराने अदालती फैसलों और कानूनी नजीरों (Precedents) का संदर्भ दिया गया था। जब इन संदर्भों की बारीकी से जांच की गई, तो पता चला कि वकीलों ने इसके लिए एआई (AI Tools) की मदद ली थी और एआई ने अपनी ‘हैलुसिनेशन’ (AI Hallucination) प्रवृत्ति के कारण ऐसे काल्पनिक फैसलों को गढ़ दिया, जो असल दुनिया में कभी हुए ही नहीं थे।
हैरानी की बात यह रही कि ट्रिब्यूनल (NCLT) ने भी इन संदर्भों को सही मानकर अपना फैसला सुना दिया था। मामला जब सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, तो इस बड़ी लापरवाही का खुलासा हुआ।
सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी: “यह न्यायिक व्यवस्था के लिए विनाशकारी”
इस मामले की सुनवाई करते हुए देश की शीर्ष अदालत ने वकीलों और ट्रिब्यूनल दोनों को आड़े हाथों लिया। कोर्ट ने कहा कि बिना किसी प्रामाणिक जांच के एआई-जनरेटेड सामग्री को अदालत के सामने पेश करना और उस पर भरोसा करना न्याय व्यवस्था की नींव को हिलाने जैसा है।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने महत्वपूर्ण रुख में कहा:
- आदेश खारिज: कोर्ट ने साफ किया कि फर्जी या काल्पनिक नजीरों पर आधारित कोई भी फैसला कानूनन वैध नहीं हो सकता। इसी आधार पर NCLT के उस विवादित आदेश को तुरंत प्रभाव से रद्द (Quash) कर दिया गया।
- बार काउंसिल को निर्देश: सुप्रीम कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) को इस मामले में हस्तक्षेप करने को कहा है। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि अदालतों में एआई टूल्स के इस्तेमाल को लेकर तुरंत गाइडलाइंस और सख्त नियम तैयार किए जाएं, ताकि भविष्य में कोई वकील इस तरह की फर्जी नजीरें पेश न कर सके।
क्या होता है AI Hallucination?
तकनीकी भाषा में जब कोई आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल (जैसे चैटबॉट या एआई राइटिंग टूल) डेटा की कमी या गलत कोडिंग के कारण पूरी तरह से मनगढ़ंत, भ्रामक और असत्य तथ्यों को बिल्कुल सच और प्रामाणिक दिखाकर पेश करने लगता है, तो उसे ‘एआई हैलुसिनेशन’ कहा जाता है। कानूनी मामलों में यह बेहद खतरनाक साबित हो रहा है क्योंकि एआई हूबहू असली दिखने वाले केस नंबर, जजों के नाम और तारीखें खुद से ही बना लेता है।
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला देश के सभी वकीलों और न्यायिक अधिकारियों के लिए एक कड़ा संदेश है कि तकनीक का उपयोग केवल सहायता के लिए होना चाहिए, न कि बिना सोचे-समझे उस पर निर्भरता के लिए।

