भिलाई का गुरमीत वाधवा केस : ‘फोर्ब्स’ का फर्जी एडिटर बनकर अस्पताल को धमकाने वाला गुरमीत वाधवा फिर शिकंजे में, 20 लाख की फिरौती का आरोप
Bhilai Blackmailing Case | 25 April 2026. छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में फर्जी पत्रकारिता और आरटीआई की आड़ में ब्लैकमेलिंग मामला अब और बड़ा होता दिखाई दे रहा है। खुद को ‘फोर्ब्स इंटरनेशनल’ का मैनेजिंग एडिटर बताने वाले गुरमीत सिंह वाधवा के खिलाफ सुपेला थाने में एक और गंभीर प्राथमिकी दर्ज की गई है। इस बार आरोपी पर स्पर्श अस्पताल प्रबंधन से 20 लाख रुपये की अवैध उगाही और जान से मारने की धमकी देने का आरोप है।
फर्जी पहचान और रसूख का खौफ
अस्पताल के प्रबंधक अखिल मडामे की शिकायत के मुताबिक, नवंबर 2025 में गुरमीत वाधवा ने स्पर्श अस्पताल पहुंचकर खुद को रसूखदार बताया। उसने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री के साथ अपनी तस्वीरें दिखाईं और अपनी बेटी को बीबीसी का पत्रकार बताया। गुरमीत ने दावा किया कि उसे केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री की ओर से अस्पतालों की जांच के लिए अधिकृत किया गया है। उसने अस्पताल की बिल्डिंग और ऑक्सीजन प्लांट में कमियां निकालकर प्रबंधन को डराया कि वह अस्पताल में ताला लगवा देगा।
गाली-गलौज और 20 लाख की मांग
आरोपी ने अस्पताल की पार्किंग बंद करवाने और प्रशासन पर अपनी पकड़ का हवाला देकर 20 लाख रुपये की मांग की। 5 जनवरी 2026 को उसने अस्पताल प्रबंधक के केबिन में घुसकर स्टाफ के सामने अभद्र व्यवहार किया और चिल्लाते हुए कहा, “सारे आईएएस अधिकारी मुझसे डरते हैं।” अगले दिन उसने फोन कर पुनः जान से मारने की धमकी दी।
ब्लैकमेलिंग का पुराना इतिहास: दूसरी FIR दर्ज
गुरमीत वाधवा के खिलाफ यह कोई पहला मामला नहीं है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, इसके पहले एसबीएस (SBS) हॉस्पिटल द्वारा भी उसके खिलाफ 5 लाख रुपये की फिरौती मांगने का मामला दर्ज कराया जा चुका है। स्पर्श अस्पताल की यह शिकायत आरोपी के खिलाफ दूसरी बड़ी एफआईआर है, जिससे यह साफ होता है कि आरोपी संगठित तरीके से स्वास्थ्य संस्थानों को निशाना बना रहा था।
पुलिस की कार्रवाई
पुलिस ने आरोपी के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) और छत्तीसगढ़ चिकित्सा सेवक अधिनियम 2010 के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अब उन फर्जी दस्तावेजों और मोबाइल रिकॉर्ड्स की जांच कर रही है, जिनका उपयोग वह डराने-धमकाने के लिए करता था।
