नोएडा का ‘निठारी कांड’: खौफनाक अतीत से लेकर अदालती फैसलों तक की पूरी कहानी
NITHARI KAND FULL STORY. भारत के आपराधिक इतिहास में कुछ ऐसे अध्याय हैं जो सालों बाद भी रूह कंपा देते हैं। इनमें सबसे ऊपर नाम आता है ‘निठारी कांड’ का, जिसे 2006 नोएडा सीरियल मर्डर के नाम से भी जाना जाता है। नोएडा के सेक्टर-31 में स्थित एक कोठी से शुरू हुई यह कहानी न केवल पुलिसिया तंत्र की विफलता का प्रतीक बनी, बल्कि इसने मानवता को भी शर्मसार कर दिया।
पृष्ठभूमि: कोठी नंबर D-5 का भयानक सच
इस कांड की शुरुआत दिसंबर 2006 में हुई, जब नोएडा के निठारी गांव के पास एक नाले से बच्चों के कंकाल और अवशेष मिलने शुरू हुए। जांच की आंच सेक्टर-31 स्थित कोठी नंबर D-5 तक पहुंची, जिसका मालिक व्यवसायी मोनिंदर सिंह पंधेर था और उसका मुख्य नौकर सुरेंद्र कोली वहां काम करता था।
घटनाक्रम की मुख्य बातें:
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गायब होते बच्चे: 2005 से 2006 के बीच निठारी गांव से दर्जनों बच्चे रहस्यमयी ढंग से गायब हो रहे थे, लेकिन पुलिस ने लंबे समय तक इसे गंभीरता से नहीं लिया।
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कंकालों का ढेर: कोठी के पीछे के नाले और परिसर की खुदाई में लगभग 19 से अधिक बच्चों और महिलाओं के अवशेष मिले।
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क्रूरता की पराकाष्ठा: पूछताछ के दौरान सुरेंद्र कोली ने स्वीकार किया कि वह बच्चों को बहला-फुसाकर कोठी में लाता था, उनकी हत्या करता था और उनके शवों के साथ कुकृत्य करता था। उस पर नरभक्षण (Cannibalism) और मानव अंगों के व्यापार के भी गंभीर आरोप लगे।
कानूनी प्रक्रिया और सजा
इस मामले में सीबीआई (CBI) ने कुल 16 मामले दर्ज किए थे। सुरेंद्र कोली को कई मामलों में ट्रायल कोर्ट द्वारा मौत की सजा सुनाई गई थी, जबकि मोनिंदर सिंह पंधेर को भी कुछ मामलों में दोषी करार दिया गया था।
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इलाहाबाद हाई कोर्ट का फैसला (2023): अक्टूबर 2023 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए सबूतों के अभाव में सुरेंद्र कोली और मोनिंदर सिंह पंधेर को बरी कर दिया। अदालत ने जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए और इसे ‘जांच का मजाक’ करार दिया।
वर्तमान स्थिति (वर्ष 2026)
आज 2026 में, यह मामला एक बार फिर सुर्खियों में है क्योंकि कानूनी लड़ाई अब देश की सर्वोच्च अदालत में पहुंच चुकी है:
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जेल से रिहाई: नवंबर 2025 में सुरेंद्र कोली को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जेल से रिहा कर दिया गया, क्योंकि उसे उन सभी मामलों में बरी कर दिया गया था जिनमें उसे मौत की सजा मिली थी। मोनिंदर सिंह पंधेर पहले ही जेल से बाहर आ चुका है।
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सुप्रीम कोर्ट में अपील: सीबीआई और उत्तर प्रदेश सरकार ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के बरी करने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। मार्च 2026 में इन अपीलों पर सुनवाई के लिए विशेष पीठ का गठन किया गया है।
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पीड़ित परिवारों का दर्द: निठारी के पीड़ित परिवार आज भी न्याय की आस लगाए बैठे हैं। उनका मानना है कि मुख्य आरोपियों का बाहर आना उनके जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है।
निठारी कांड केवल एक अपराध नहीं, बल्कि सामाजिक और प्रशासनिक विफलता का एक बड़ा दस्तावेज है। भले ही कानूनी पेंचों के कारण मुख्य आरोपी वर्तमान में बाहर हैं, लेकिन निठारी की उन गलियों में आज भी उन मासूमों की चीखें गूंजती हैं जिन्हें कभी इंसाफ नहीं मिल पाया।
