बलौदाबाजार का साइको किलर: पहले कुत्ते पर किया जहर का टेस्ट, फिर 4 महीने में दे दी 8 ग्रामीणों की ‘बलि’

Balodabazar 8 Murders Case. छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के कसडोल थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले खर्वे गांव से एक ऐसा खौफनाक और दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जिसने देश को हिलाकर रख दिया है। एक सनकी हत्यारे (साइको किलर) ने महज चार महीनों (फरवरी से मई) के भीतर गांव के आठ लोगों को बड़ी ही बेरहमी और चालाकी से मौत के घाट उतार दिया। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यह हत्यारा कोई बाहरी नहीं, बल्कि गांव का ही एक किराना दुकानदार है, जो हत्याएं करने के बाद मृतकों के अंतिम संस्कार में भी शामिल होता था। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।

कैसे हुआ इस खौफनाक ‘सीरियल किलिंग’ का खुलासा?

खर्वे गांव में फरवरी से लेकर मई के बीच अचानक एक के बाद एक 8 स्वस्थ पुरुषों की संदिग्ध मौतें होने लगीं। शुरुआत में ग्रामीणों और परिजनों को लगा कि ये मौतें किसी बीमारी या सामान्य वजहों से हो रही हैं। अधिकांश शवों को बिना पोस्टमार्टम के दफना या जला दिया गया था।

टर्निंग पॉइंट
14 मई को आरोपी ने गांव के ही कार्तिक प्रजापति नाम के व्यक्ति को शराब में जहर मिलाकर दिया। कार्तिक ने शराब पी और वह बेहोश हो गया। परिजन उसे तुरंत अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने कड़ी मशक्कत के बाद उसकी जान बचा ली। होश में आने पर कार्तिक ने बताया कि उसने किराना दुकानदार रामसहाय जायसवाल की दी हुई शराब पी थी। इसके बाद ग्रामीणों का माथा ठनका, क्योंकि मरने वाले सभी 8 लोग मौत से ठीक पहले रामसहाय के संपर्क में आए थे।

ग्रामीणों ने 6 जून को कसडोल थाने में सामूहिक शिकायत दर्ज कराई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने कार्यपालिका मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में 7 मृतकों के शवों को कब्र से वापस निकलवाया और उनका पोस्टमार्टम व फॉरेंसिक टेस्ट कराया (एक मृतक का अंतिम संस्कार पहले ही हो चुका था)। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सभी की मौत का कारण जहर (सुहागा/बोरेक्स) पाया गया।

पहले कुत्ते पर किया टेस्ट, फिर शुरू किया खूनी खेल

पुलिस की गिरफ्त में आने के बाद 46 वर्षीय आरोपी रामसहाय जायसवाल ने जो कबूलनामा किया, उसे सुनकर पुलिस अधिकारियों के भी होश उड़ गए।

  • आरोपी ने पूछताछ में बताया कि उसने बाजार से ‘चूहा मारने’ के बहाने बोरेक्स (जहर) खरीदा था।
  • जहर सही तरीके से काम करता है या नहीं, यह जांचने के लिए उसने सबसे पहले गांव के एक आवारा कुत्ते को जहर देकर मारा।
  • जब कुत्ता मर गया, तो उसे तसल्ली हो गई कि जहर पूरी तरह असरदार है। इसके बाद उसने इंसानों को अपना निशाना बनाना शुरू किया।

हर कत्ल की अलग वजह: अंधविश्वास से लेकर उधारी तक

जांच में सामने आया है कि आरोपी रामसहाय हर उस शख्स को रास्ते से हटा देता था जिससे उसकी थोड़ी भी अनबन होती थी। पुलिस के मुताबिक, उसके कत्ल करने की वजहें इस प्रकार थीं:

  1. पुरानी रंजिश और गाली-गलौज: पहली हत्या 6 फरवरी को बद्री पटेल की हुई, जो आरोपी को अपशब्द कहता था और मुफ्त में शराब मांगता था।
  2. जमीन विवाद: 20 मार्च को भूमि विवाद के चलते बुधराम की हत्या की गई।
  3. अंधविश्वास (जादू-टोना): विनोद कुमार, गजानंद मांझी जैसे ग्रामीणों पर आरोपी को शक था कि वे उस पर ‘काला जादू’ या टोनही कर रहे हैं। गांव में यह भी चर्चा है कि वह ‘गड़े हुए खजाने’ को हासिल करने के लिए हंडा (बलि) की सनक में था।
  4. उधारी से छुटकारा: 29 अप्रैल को उसने चैतूराम साहू की हत्या की, जिससे उसने 50 हजार रुपये उधार लिए थे। चैतूराम के मरते ही उधारी का झंझट खत्म हो गया।

शवों की टाइमलाइन: 4 महीने में बिछाई लाशें

आरोपी ने इतनी शातिरता से वार किया कि किसी को कानों-कान भनक नहीं लगी:

  • 6 फरवरी: बद्री पटेल
  • 20 मार्च: बुधराम
  • 31 मार्च: विनोद कुमार
  • 20 अप्रैल: गजानन मांझी
  • 28 अप्रैल: एक अन्य ग्रामीण
  • 29 अप्रैल: चैतूराम साहू
  • 14 मई: मेहतरू साहू

अंतिम संस्कार में हमदर्द बनने का नाटक

पुलिस के अनुसार, रामसहाय बेहद शातिर था। वह कत्ल करने के बाद पीड़ित परिवारों की मदद करता था, बीमार को अस्पताल पहुंचाने का नाटक करता था और शव यात्रा में कंधा देने भी जाता था, ताकि किसी को उस पर रत्ती भर भी शक न हो।

पुलिस का बयान और वर्तमान स्थिति

बलौदाबाजार के पुलिस अधीक्षक (SP) ओपी शर्मा ने बताया कि आरोपी रामसहाय जायसवाल को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। उसके खिलाफ हत्या की 8 धाराओं और हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अब फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की अंतिम विसरा रिपोर्ट का इंतजार कर रही है ताकि कोर्ट में आरोपी के खिलाफ पुख्ता सबूत पेश किए जा सकें। खर्वे गांव में इस खुलासे के बाद से अभी भी सन्नाटा और दहशत का माहौल है।

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