अयोध्या राम मंदिर चंदा चोरी मामला : चंदा आने से लेकर उसकी चोरी तक की पूरी कहानी और अब तक क्या हुआ
Ayodhya Ram Mandir Donation Theft. अयोध्या में प्रभु श्री राम के भव्य मंदिर के गर्भगृह में विराजमान होने के बाद से देश-विदेश के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था उमड़ रही है। लेकिन इसी आस्था के बीच एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने हर रामभक्त को झकझोर कर रख दिया है। राम मंदिर के दानपात्रों (चढ़ावे) से बड़ी मात्रा में नकदी और वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।
आरोपों की गंभीरता को देखते हुए श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की खुद की सिफारिश पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले की जांच के लिए एक हाई-प्रोफाइल विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है, जो इस पूरे घोटाले की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।
कितना चंदा आया और क्या-क्या आया था?
जनवरी 2024 में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद से मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है। मीडिया रिपोर्ट्स और ट्रस्ट के विभिन्न बयानों के अनुसार:
- कुल दान: राम मंदिर के लिए अब तक देश-विदेश से ₹3,000 करोड़ से लेकर ₹5,000 करोड़ से अधिक का समर्पण कोष और प्रत्यक्ष दान आ चुका है।
- दैनिक व मासिक चढ़ावा: मंदिर के गर्भगृह के सामने रखे दानपात्रों में हर महीने करोड़ों रुपये की नकदी, सोने-चांदी के आभूषण और अन्य कीमती वस्तुएं श्रद्धालु अर्पित करते हैं।
- क्या-क्या आया: नकदी के अलावा भारी मात्रा में सोने के सिक्के, चांदी की ईंटें, मुकुट, छतर और बहुमूल्य रत्न शामिल हैं, जिन्हें मंदिर के ग्राउंड फ्लोर पर बने सुरक्षित कमरों (स्ट्रॉन्ग रूम) में रखा जाता है।
इस वर्तमान मामले में शुरुआती स्तर पर करीब ₹7 करोड़ से लेकर ₹200 करोड़ तक के कथित गबन और चोरी के कयास लगाए जा रहे हैं, जिसकी सटीक संख्या एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट के बाद ही साफ हो पाएगी।
किसकी देखरेख में था चंदे का प्रबंधन?
राम मंदिर परिसर और उसकी सभी संपत्तियों, दान और वित्तीय गतिविधियों के प्रबंधन की पूरी जिम्मेदारी ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ के पास है।
- मुख्य संरक्षक/प्रबंधक: ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और एडमिनिस्ट्रेटर (प्रशासक) गोपाल राव मुख्य रूप से इस व्यवस्था की देखरेख करते हैं।
- गिनती की प्रक्रिया: ट्रस्ट के अधिकारियों के अनुसार, दानपात्रों से रकम निकालने और उसकी गिनती के लिए एक विस्तृत व्यवस्था है। इसमें स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), निजी कलेक्शन एजेंसी और ट्रस्ट के लगभग 40 कर्मचारी दो शिफ्टों में काम करते हैं। इसके अलावा, कीमती आभूषणों और धातुओं के रखरखाव की जिम्मेदारी कृष्णदेव तिवारी नामक कर्मचारी के पास थी।
कैसे हुआ मामले का खुलासा?
यह मामला जून 2026 के पहले सप्ताह में तब गर्माया जब मंदिर के भीतर से चढ़ावे की रकम के गायब होने की अंदरूनी शिकायतें सामने आईं। अयोध्या के थाने में चोरी को लेकर 3 अलग-अलग शिकायतें दर्ज कराई गईं।
- ट्रस्ट द्वारा SIT की मांग: रोज नए आरोपों और राजनीतिक विवाद को बढ़ता देख, राम मंदिर ट्रस्ट ने भ्रम की स्थिति दूर करने के लिए खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से निष्पक्ष जांच कराने का लिखित अनुरोध किया।
- SIT का गठन: शासन ने तुरंत एक्शन लेते हुए लखनऊ के कमिश्नर (IAS) विजय विश्वास पंत के नेतृत्व में 3 सदस्यीय एसआईटी बनाई। इस टीम में आईजी रेंज (IPS) किरन एस और विशेष सचिव (वित्त) नील रतन शामिल हैं।
- छापेमारी और नकदी बरामदगी: स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) और पुलिस की टीम ने जब शक के आधार पर मंदिर के गिनती विभाग में तैनात कर्मचारी लवकुश मिश्रा के घर (रुदौली क्षेत्र) पर छापेमारी की, तो वहां ₹10 लाख कैश बरामद हुआ, जिसे कथित तौर पर गोबर के ढेर और अलमारी में छिपाकर रखा गया था।
- असामान्य संपत्ति का खेल: जांच में सामने आया कि 18 से 20 हजार रुपये प्रति माह वेतन पाने वाले इन संदिग्ध कर्मचारियों ने हाल के महीनों में करोड़ों रुपये के प्लॉट और जमीनें खरीदी थीं, जिससे पूरा खेल उजागर हुआ।
जिम्मेदार लोग और जांच के घेरे में कौन?
एसआईटी वर्तमान में करीब 200 से अधिक लोगों की सूची बनाकर पूछताछ कर रही है, जिसमें अब तक 125 से अधिक लोगों से कड़ाई से पूछताछ की जा चुकी है।
- चंपत राय और गोपाल राव (ट्रस्ट पदाधिकारी): एसआईटी ने पिछले दिनों ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और प्रशासक गोपाल राव से कई घंटों तक पूछताछ की। उनसे पूछा गया कि इतनी बड़ी सुरक्षा और सीसीटीवी निगरानी के बावजूद यह चूक कैसे हुई?
- टिन्नू यादव (रमाशंकर यादव): मंदिर के आंतरिक स्टाफ में शामिल रमाशंकर उर्फ टिन्नू यादव पर भी जांच का शिकंजा बेहद कस गया है। एसआईटी उनसे लंबी पूछताछ कर कड़ियां जोड़ रही है।
- लवकुश मिश्रा और अन्य कर्मचारी: हिरासत में लिए गए लवकुश मिश्रा समेत दानपात्रों की गिनती करने वाले 6 मुख्य संदिग्ध कर्मचारियों पर सीधे तौर पर चोरी को अंजाम देने का आरोप है।
- सीसीटीवी और तकनीकी टीम: एसआईटी मंदिर परिसर की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग व्यवस्था, बैकअप और तकनीकी दस्तावेजों को खंगाल रही है, ताकि यह पता चल सके कि निगरानी व्यवस्था में कोई जानबूझकर किया गया छेद (लूपहोल) तो नहीं था।
राम मंदिर कंस्ट्रक्शन कमेटी के चेयरपर्सन नृपेंद्र मिश्रा ने साफ किया है कि उनका काम सिर्फ निर्माण की निगरानी है, जबकि वित्तीय मामलों की जवाबदेही ट्रस्ट की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त निर्देशों के बाद एसआईटी को 15 दिनों के भीतर अंतिम रिपोर्ट सौंपनी है। सरकार ने साफ संदेश दिया है कि आस्था के इस केंद्र में भ्रष्टाचार करने वाले किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा।
