झारखंड में छात्रों का महाआंदोलन: JPSC और JSSC पेपर लीक पर क्यों उबल रहा है रांची? जानें पूरी सच्चाई और अब तक की स्थिति

Jharkhand Student Protest.  झारखंड में सरकारी नौकरी का सपना देखने वाले हजारों छात्र इन दिनों सड़कों और स्टेडियमों में रातें गुजार रहे हैं। राजधानी रांची का जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम इस छात्र क्रांति का मुख्य केंद्र बन गया है। यह पूरा विवाद मुख्य रूप से झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) द्वारा आयोजित परीक्षाओं में कथित पेपर लीक, धांधली और भ्रष्टाचार को लेकर है।

आंदोलन कब से और कैसे शुरू हुआ?

इस विवाद की नींव तब पड़ी जब 19 अप्रैल 2026 को आयोजित 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा (PT) के नतीजे 2 जुलाई 2026 को घोषित किए गए।

  • छात्रों ने 5 जुलाई 2026 से इसके खिलाफ चरणबद्ध तरीके से विरोध प्रदर्शन शुरू किया।
  • 29 जुलाई 2026 से छात्रों ने रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया।
  • स्थिति तब और गंभीर हो गई जब 2 अगस्त 2026 से प्रमुख छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो और रूपेश कुमार पाल ने आमरण अनशन (भूख हड़ताल) शुरू कर दिया।

छात्रों की प्रमुख मांगें क्या हैं?

छात्रों का यह आंदोलन सिर्फ एक परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे सिस्टम में सुधार की मांग कर रहा है। उनकी मुख्य मांगें इस प्रकार हैं:

  1. परीक्षाएं रद्द हों: 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा और JSSC-CGL की परीक्षा को तुरंत रद्द किया जाए।
  2. CBI जांच: पिछले सात वर्षों में JPSC और JSSC द्वारा आयोजित सभी भर्ती परीक्षाओं में हुई कथित धांधली की जांच सीबीआई (CBI) या ईडी (ED) जैसी केंद्रीय एजेंसियों से कराई जाए।
  3. दागी एजेंसी पर एक्शन: TDPL (एक परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी, जिसे छात्र ब्लैकलिस्टेड बताते हैं) द्वारा ली गई सभी परीक्षाओं को रद्द कर उसकी जांच की जाए।
  4. OMR शीट में बदलाव: परीक्षाओं की OMR शीट में पांचवां विकल्प “Not Attempted” (प्रयास नहीं किया गया) जोड़ा जाए ताकि बाद में कोई और खाली गोले न भर सके।
  5. पारदर्शिता: भर्ती एजेंसियों में संरचनात्मक सुधार किए जाएं और परीक्षा प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और समयबद्ध बनाया जाए।

कौन-कौन से संगठन और छात्र इसमें शामिल हैं?

इस आंदोलन को मुख्य रूप से ‘JPSC-JSSC रिफॉर्म्स मंच’ (JPSC-JSSC Reforms Manch) के बैनर तले चलाया जा रहा है।

  • प्रमुख चेहरे: छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो, राहुल कुमार क्रांति और रूपेश कुमार पाल इस आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं।
  • बाहरी समर्थन: इस आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान मिल रहा है। ‘कॉकक्रोच जनता पार्टी’ (CJP – एक युवा राजनीतिक मंच) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने छात्रों को अपना समर्थन दिया है। CJP के नेशनल कोऑर्डिनेटर मुकेश और अक्षय शिंदे की टीम ने रांची आकर छात्रों के साथ धरनास्थल पर मुलाकात की है।
  • आम छात्र: राज्य के कोने-कोने से किसान और मजदूर पृष्ठभूमि से आने वाले हजारों आम छात्र-छात्राएं इस आंदोलन का अहम हिस्सा हैं।

सरकार का रुख क्या है?

छात्रों के उग्र होते प्रदर्शन को देखते हुए झारखंड सरकार के मंत्रियों (संजय प्रसाद यादव और दीपिका पांडेय सिंह) ने छात्रों के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की है। मंत्रियों ने स्वीकार किया है कि छात्रों की मांगें “जायज” हैं और वे इसे मुख्यमंत्री तक पहुंचाएंगे। हालांकि, छात्रों का स्पष्ट कहना है कि जब तक उनकी सारी मांगें धरातल पर पूरी नहीं हो जातीं, उनका यह अनिश्चितकालीन सत्याग्रह और आमरण अनशन जारी रहेगा।

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