2,000 कमीशन के लालच में जेल का सफर! क्या है ‘म्यूल अकाउंट’ और यह कैसे बर्बाद कर सकता है आपकी जिंदगी
Mule Account. क्या आप जानते हैं कि बिना कुछ किए महज़ कुछ हज़ार रुपयों के लालच में आप किसी अंतरराष्ट्रीय साइबर क्राइम सिंडिकेट का मोहरा बन सकते हैं? आजकल साइबर ठग आम लोगों को कमीशन का लालच देकर उनके बैंक खातों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इन खातों को तकनीकी भाषा में ‘म्यूल अकाउंट’ (Mule Account) कहा जाता है। आइए विस्तार से समझते हैं कि यह क्या है, कितना खतरनाक है और देश व छत्तीसगढ़ में इसके कितने मामले सामने आ रहे हैं।
म्यूल अकाउंट क्या है?
म्यूल अकाउंट (Mule Account) वह बैंक खाता होता है जिसका उपयोग अपराधी अपने काले धन या साइबर ठगी (जैसे- डिजिटल अरेस्ट, इन्वेस्टमेंट फ्रॉड, ऑनलाइन सट्टा) से प्राप्त अवैध राशि को मंगाने और आगे ट्रांसफर करने के लिए करते हैं। ठग सीधे अपने खातों में पैसा नहीं मंगाते ताकि वे पुलिस की रडार से बच सकें। इसके लिए वे आम लोगों (छात्रों, बेरोजगारों, महिलाओं) को 2,000 से 10,000 रुपये तक का कमीशन देकर उनका खाता, एटीएम कार्ड, पासबुक, चेकबुक और इंटरनेट बैंकिंग का पासवर्ड अपने पास रख लेते हैं।
क्या बैंक खाता किसी और को दिया जा सकता है?
बिल्कुल नहीं! भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के नियमों के अनुसार, आपका बैंक खाता केवल आपके निजी या व्यावसायिक उपयोग के लिए है। किसी भी परिस्थिति में आप अपना खाता, एटीएम, यूपीआई पिन या ओटीपी किसी अन्य व्यक्ति को इस्तेमाल करने के लिए नहीं दे सकते। यदि कोई अन्य व्यक्ति आपके खाते से लेन-देन करता है, तो कानून की नजर में उसके लिए सीधे तौर पर आप (खाताधारक) जिम्मेदार होते हैं।
यह कितना गैरकानूनी है?
यह एक बेहद गंभीर और गैर-जमानती अपराध की श्रेणी में आता है। म्यूल अकाउंट का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग (Money Laundering) और आतंकवाद की फंडिंग तक में हो सकता है।
- यदि आपके खाते में साइबर ठगी का पैसा आता है, तो पुलिस सबसे पहले आपको ही गिरफ्तार करेगी।
- आपको ठगी के मुख्य आरोपी के बराबर का सह-आरोपी (Co-accused) माना जाएगा।
- आप पर धोखाधड़ी (IPC/BNS की धाराएं), आईटी एक्ट और प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत केस दर्ज हो सकता है।
म्यूल अकाउंट का किसी व्यक्ति पर कितना भारी असर पड़ सकता है?
एक म्यूल खाताधारक की जिंदगी पूरी तरह बर्बाद हो सकती है:
- जेल और कानूनी खर्च: चंद हजार रुपये कमाने के चक्कर में व्यक्ति को महीनों जेल में बिताने पड़ सकते हैं और वकीलों की फीस में लाखों रुपये खर्च हो जाते हैं।
- बैंकों से ब्लैकलिस्टिंग: एक बार म्यूल खाते में नाम आने पर रिज़र्व बैंक (RBI) और अन्य बैंक आपको ब्लैकलिस्ट कर सकते हैं। भविष्य में आप कभी नया खाता नहीं खोल पाएंगे और न ही आपको कोई लोन मिलेगा।
- करियर खत्म: युवाओं के मामले में, पुलिस केस दर्ज होने के बाद उन्हें न तो सरकारी नौकरी मिल सकती है और न ही पासपोर्ट बन सकता है।
देश में म्यूल अकाउंट के मामलों की स्थिति
भारत में पिछले एक दशक में डिजिटल पेमेंट्स (UPI) बढ़ने के साथ ही म्यूल खातों का जाल भी तेजी से फैला है। भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) के अनुसार, प्रतिदिन लगभग 4,000 म्यूल खातों की रिपोर्ट की जा रही है।
हाल ही में गुजरात पुलिस ने “ऑपरेशन म्यूल हंट” चलाकर पूरे देश में 4,052 मामलों को ट्रैक किया, 913 खातों पर कार्रवाई की और 2,289 करोड़ रुपये के फ्रॉड का भंडाफोड़ किया,। इसके अलावा कर्नाटक (खासकर बेंगलुरु और बेलगावी) में भी भारी संख्या में (हाल ही में बेलगावी में 2900 खाते) म्यूल अकाउंट पकड़े गए हैं।
छत्तीसगढ़ और दुर्ग जिले की स्थिति
छत्तीसगढ़ में भी साइबर ठगों ने अपना मजबूत नेटवर्क बना लिया है। राज्य में दुर्ग जिला (Durg District) म्यूल अकाउंट और ऑनलाइन सट्टे (महादेव ऐप आदि) के मामलों में सबसे बड़ा हॉटस्पॉट बनकर उभरा है।
- दुर्ग में सबसे ज्यादा मामले: दुर्ग-भिलाई क्षेत्र में पुलिस ने हाल ही में बड़े पैमाने पर कार्रवाई की है। कई ऐसे गैंग पकड़े गए हैं जो 2 से 10 हजार रुपये में बैंक खाते खरीदकर उन्हें साइबर अपराधियों को बेच रहे थे।
- सैकड़ों खाते और करोड़ों का लेन-देन: बढ़ते मामलों को देखते हुए दुर्ग की पुलिस सख्त होती जा रही है। दुर्ग के SSP विजय अग्रवाल द्वारा छेड़े गए अभियान पर अगर नजर डालें तो यह सख्ती साफ दिखाई देती है। 01 जनवरी 2026 से 29 जुलाई 2026 तक जिले में साइबर ठगी एवं ऑनलाइन सट्टे में इस्तेमाल हो रहे 1242 म्यूल बैंक खातों की पहचान कर 18 प्रकरणों में कार्रवाई की गई। 117 म्यूल खाताधारकों एवं 05 म्यूल एजेंटों को गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया तथा लगभग ₹3 करोड़ की डिस्प्यूट राशि पर होल्ड (Freeze) लगाया गया। तकनीकी विश्लेषण में लगभग 2000 अन्य संदिग्ध म्यूल बैंक खातों की पहचान हुई है, जिनके विरुद्ध चरणबद्ध कार्रवाई की जा रही है। कुछ बैंक शाखाओं के अधिकारियों एवं बैंक प्रबंधकों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। जांच में संलिप्तता प्रमाणित होने पर उन्हें भी आरोपी बनाकर कार्रवाई होनी तय है।
आपका बैंक खाता आपकी डिजिटल पहचान है। इसे चंद पैसों के लालच में किसी के हाथों की कठपुतली न बनने दें। यदि आपसे कोई खाता किराये पर मांगता है, तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें।

