कोरोना के बाद भारत में तेजी से बढ़े इस तरह के अपराध, जानें कौन सा राज्य है निशाने पर और कैसे बचें
Crime After Covid. कोरोना महामारी ने जहां पूरी दुनिया के साथ-साथ भारत में डिजिटल लेनदेन, वर्क-फ्रॉम-होम और ई-कॉमर्स को रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बना दिया, वहीं इसके समानांतर एक बड़ा खतरा बनकर उभरा—डिजिटल अपराध। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 2020 के बाद से देश में साइबर अपराधों में सालाना 25 से 30 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है।
पारंपरिक चोरी और डकैती की जगह अब सुदूर ठिकानों पर बैठे जालसाजों ने ले ली है, जो बिना किसी हथियार के लोगों की जिंदगी भर की कमाई पर डाका डाल रहे हैं।
कोरोना के बाद उभरे नए तरह के अपराध
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डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest): जालसाज खुद को सीबीआई, नारकोटिक्स ब्यूरो (NCB), प्रवर्तन निदेशालय (ED) या पुलिस अधिकारी बताकर वीडियो कॉल करते हैं। वे पीड़ित को फर्जी मनी लॉन्ड्रिंग या पार्सल केस में फंसाने का डर दिखाकर कई घंटों या दिनों तक वीडियो कॉल पर बंधक जैसी स्थिति में रखते हैं और जमानत के नाम पर लाखों रुपये ऐंठ लेते हैं।
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पार्ट-टाइम जॉब और टास्क फ्रॉड: टेलीग्राम या व्हाट्सएप पर ‘घर बैठे यूट्यूब लाइक करें या रिव्यू लिखें’ जैसे मैसेज भेजकर पहले छोटा मुनाफा दिया जाता है, फिर भारी निवेश कराकर पैसे ब्लॉक कर दिए जाते हैं।
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इन्वेस्टमेंट और ट्रेडिंग स्कैम: फर्जी ट्रेडिंग ऐप्स और फेक व्हाट्सएप ग्रुप्स के जरिए शेयर मार्केट और क्रिप्टोकरेंसी में 200 से 300 प्रतिशत रिटर्न का लालच देकर करोड़ों की ठगी।
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एआई डीपफेक और वॉयस क्लोनिंग: परिवार के सदस्य की आवाज या चेहरा बनाकर संकट में होने का बहाना बनाना और तुरंत बैंक खाते में पैसे ट्रांसफर करवाना।
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इंस्टेंट लोन ऐप ब्लैकमेलिंग: बिना दस्तावेज कुछ मिनटों में लोन देने के नाम पर मोबाइल के कॉन्टैक्ट्स और गैलरी का एक्सेस लेना, फिर मॉर्फ्ड तस्वीरों के जरिए पीड़ितों को ब्लैकमेल करना।
इन अपराधों में कौन सा राज्य है अव्वल?
एनसीआरबी (NCRB) की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, कुल साइबर अपराधों की संख्या और प्रति लाख आबादी पर दर्ज साइबर अपराध दर (Crime Rate) दोनों ही पैमानों पर तेलंगाना देश में शीर्ष पर दर्ज किया गया है। तेलंगाना में मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और ‘जीरो एफआईआर’ के तहत साइबर शिकायतों के त्वरित पंजीकरण की प्रणाली होने के कारण मामलों की संख्या सर्वाधिक दर्ज होती है।
इसके अलावा, कुल दर्ज मामलों (Absolute Numbers) के मामले में कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और हरियाणा भी शीर्ष राज्यों में शामिल हैं। वहीं गिरोहों के संचालन (Fraud Hotspots) के लिहाज से झारखंड (जामताड़ा), राजस्थान (मेवात/अलवर) और हरियाणा (नूंह) नए हॉटस्पॉट के रूप में उभरे हैं।
साइबर ठगी से बचने के अचूक उपाय
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कानून में ‘डिजिटल अरेस्ट’ नाम की कोई चीज नहीं: भारत का कोई भी कानून पुलिस, सीबीआई या ईडी को वीडियो कॉल (स्काइप, व्हाट्सएप) के जरिए किसी को गिरफ्तार करने या पैसे मांगने की अनुमति नहीं देता। ऐसा कॉल आते ही तुरंत कॉल काटें।
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अनजान लिंक और एपीके (.apk) फाइल्स से दूरी: व्हाट्सएप या एसएमएस पर आए बिजली बिल अपडेट, लॉटरी, पार्सल ट्रैकिंग या बैंक केवाईसी जैसे लिंक पर कभी क्लिक न करें।
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स्क्रीन शेयरिंग ऐप कभी डाउनलोड न करें: एनीडेस्क (AnyDesk), टीमव्यूअर (TeamViewer) जैसी ऐप्स बैंक अधिकारी बनकर फ्रॉडस्टर डाउनलोड करवाते हैं, जिससे आपके फोन का पूरा कंट्रोल उनके पास चला जाता है।
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ओटीपी और यूपीआई पिन का नियम: याद रखें कि बैंक या यूपीआई के माध्यम से पैसे ‘प्राप्त’ करने के लिए कभी भी पिन (PIN) दर्ज करने की आवश्यकता नहीं होती। पिन केवल पैसे भेजने के लिए होता है।
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तत्काल हेल्पलाइन का उपयोग करें: यदि आपके साथ कोई वित्तीय धोखाधड़ी होती है, तो ‘गोल्डन आवर’ (शुरुआती 2 घंटे) के भीतर राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं, जिससे बैंक खाते से रकम फ्रीज कराई जा सके।

