देश के ‘जासूस और शिकारी’: भारत में कितनी जांच एजेंसियां हैं और कौन किस जुर्म का करती है पर्दाफाश?

Indias Investigative Agencies. भारत में कानून-व्यवस्था बनाए रखने, राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने और आर्थिक-आपराधिक मामलों की तह तक जाने के लिए केंद्र और राज्य स्तर पर कई विशेष जांच एवं खुफिया एजेंसियां कार्यरत हैं। संविधान के तहत पुलिस और कानून-व्यवस्था राज्य सूची का विषय है, इसलिए हर राज्य में अपनी पुलिस और CID (अपराध जांच विभाग) होती है। वहीं, राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर के जटिल अपराधों के लिए केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों के अधीन एक दर्जन से अधिक प्रमुख राष्ट्रीय जांच और खुफिया एजेंसियां सक्रिय हैं।

प्रत्येक जांच एजेंसी का कार्यक्षेत्र, अधिकार और कानून अलग-अलग तय किए गए हैं। 

भारत की प्रमुख जांच एजेंसियां और उनके कार्यक्षेत्र

  • CBI (केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो – Central Bureau of Investigation):  

    • मंत्रालय: कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय। 

    • कार्य: यह देश की प्रमुख आपराधिक जांच एजेंसी है। यह केंद्र सरकार के कर्मचारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप, हाई-प्रोफाइल मर्डर, अंतरराज्यीय संगठित अपराध और सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट द्वारा सौंपे गए गंभीर मामलों की जांच करती है। यह इंटरपोल के लिए भारत की नोडल एजेंसी भी है।   

  • ED (प्रवर्तन निदेशालय – Directorate of Enforcement):  

    • मंत्रालय: वित्त मंत्रालय (राजस्व विभाग)। 

    • कार्य: इसका मुख्य काम देश में मनी लॉन्ड्रिंग (काले धन को सफेद करना) और विदेशी मुद्रा कानून के उल्लंघन की जांच करना है। यह मुख्य रूप से PMLA (धन शोधन निवारण अधिनियम), FEMA (विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम) और भगोड़े आर्थिक अपराधी अधिनियम के तहत संपत्ति जब्त करने व कार्रवाई करने का काम करती है। 

  • NIA (राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण – National Investigation Agency): 

    • मंत्रालय: गृह मंत्रालय। 

    • कार्य: 2008 के मुंबई आतंकी हमले के बाद गठित यह एजेंसी देश में आतंकवाद, टेरर फंडिंग (आतंकी फंडिंग), हथियार तस्करी, जाली नोटों के बड़े रैकेट और भारत की संप्रभुता को चुनौती देने वाले मामलों की जांच करती है। NIA को पूरे देश में बिना राज्य सरकार की विशेष अनुमति के जांच करने का अधिकार है। 

  • NCB (स्वापक नियंत्रण ब्यूरो – Narcotics Control Bureau): 

    • मंत्रालय: गृह मंत्रालय। 

    • कार्य: यह नशीली दवाओं (ड्रग्स) की तस्करी, अवैध खेती, गैरकानूनी व्यापार और NDPS एक्ट के उल्लंघन की राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जांच करती है। 

  • SFIO (गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय – Serious Fraud Investigation Office): 

    • मंत्रालय: कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय (Ministry of Corporate Affairs)। 

    • कार्य: यह कॉर्पोरेट जगत में होने वाले बड़े वित्तीय घोटालों, फर्जी कंपनियों (शेल कंपनियों), और कंपनियों द्वारा निवेशकों व बैंकों के साथ की गई धोखाधड़ी की बहु-विषयक (मल्टी-डिसिप्लिनरी) जांच करती है। 

  • DRI (राजस्व आसूचना निदेशालय – Directorate of Revenue Intelligence): 

    • मंत्रालय: वित्त मंत्रालय। 

    • कार्य: यह देश की प्रमुख एंटी-स्मगलिंग एजेंसी है, जो सोना, हीरे, विदेशी मुद्रा, वन्यजीव, इलेक्ट्रॉनिक सामान और अन्य प्रतिबंधित वस्तुओं की सीमा पार से होने वाली तस्करी और कस्टम ड्यूटी चोरी को रोकती है व जांच करती है।

  • DGGI (वस्तु एवं सेवा कर आसूचना महानिदेशालय – DG of GST Intelligence):

    • मंत्रालय: वित्त मंत्रालय।

    • कार्य: यह पूरे देश में फर्जी बिलिंग, इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के दुरुपयोग और बड़े पैमाने पर GST की टैक्स चोरी से जुड़े मामलों की जांच करती है।

  • WCCB (वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो – Wildlife Crime Control Bureau):

    • मंत्रालय: पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय।

    • कार्य: यह दुर्लभ और संरक्षित वन्यजीवों, बाघ की खाल, हाथी दांत, दुर्लभ पौधों आदि के अवैध शिकार और अंतरराष्ट्रीय तस्करी सिंडिकेट की जांच करती है।  

प्रमुख खुफिया एजेंसियां (Intelligence Agencies)

जांच एजेंसियों के अलावा देश में दो प्रमुख खुफिया एजेंसियां हैं, जो इनपुट जुटाने का काम करती हैं:

  • IB (इंटेलिजेंस ब्यूरो): देश के भीतर आंतरिक सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी इनपुट और काउंटर-इंटेलिजेंस पर काम करती है। 

  • R&AW (रिसर्च एंड एनालिसिस विंग): देश के बाहर विदेशी खुफिया जानकारी जुटाने और भारत के रणनीतिक हितों की रक्षा के लिए काम करती है। 

राज्य स्तर की जांच एजेंसिया

  • State Police & CID (क्राइम इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट): राज्य के भीतर होने वाले गंभीर अपराधों जैसे दंगे, हत्या, जालसाजी और स्थानीय मामलों की जांच राज्य सरकार के निर्देश पर करती है। 

  • ACB / Vigilance Bureau (भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो): राज्य सरकार के अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ रिश्वतखोरी व भ्रष्टाचार के मामलों की जांच करता है। 

  • State ATS (एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड): राज्यों के भीतर स्थानीय आतंकी गतिविधियों और सिंडिकेट्स पर नज़र रखती है।

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