जस्टिस यशवंत वर्मा केस में बड़ा खुलासा: संसद की जांच समिति ने माना दोषी, अधजले नोटों और सबूतों से छेड़छाड़ सिद्ध

Justice Yashwant Varma Case Update. दिल्ली हाईकोर्ट के तत्कालीन जज जस्टिस यशवंत वर्मा के दिल्ली स्थित तुगलक क्रीसेंट रोड सरकारी आवास में लगी आग के दौरान मिले करोड़ों रुपये मूल्य के अधजले ₹500 के नोटों के मामले में संसदीय जांच समिति (Judges Inquiry Committee) की रिपोर्ट 12 अगस्त को लोकसभा और राज्यसभा में पेश कर दी गई।

सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस अरविंद कुमार की अध्यक्षता में गठित 3-सदस्यीय जांच समिति ने अपनी दो खंडों (Two Volumes) वाली रिपोर्ट में कहा है कि जस्टिस वर्मा के खिलाफ लगाए गए तीनों मुख्य आरोप पूरी तरह से साबित (Proved) हो चुके हैं।

घटनाक्रम क्या था? (The Background)

  • 14-15 मार्च 2025 की रात: नई दिल्ली के 30, तुगलक क्रीसेंट स्थित जस्टिस यशवंत वर्मा के आधिकारिक आवास के एक स्टोररूम में देर रात अचानक आग लग गई।
  • फायर ब्रिगेड और कैश का खुलासा: आग बुझाने पहुँचे दमकलकर्मियों और पुलिस अधिकारियों ने देखा कि स्टोररूम के अंदर ₹500 के करेंसी नोटों (भारतीय मुद्रा) की भारी खेप (बंडल) जल रही थी।
  • सुप्रीम कोर्ट का इन-हाउस एक्शन: तत्कालीन चीफ जस्टिस (CJI) संजीव खन्ना ने एक आंतरिक (In-house) जांच समिति बनाई। सुप्रीम कोर्ट की इस जांच में भी पाया गया कि उस स्टोररूम पर जस्टिस वर्मा का ‘प्रत्यक्ष या परोक्ष’ नियंत्रण था। इसके बाद उनका ट्रांसफर दिल्ली हाईकोर्ट से मूल इलाहाबाद हाईकोर्ट कर दिया गया।
  • संसदीय महाभियोग (Impeachment): जुलाई 2025 में 200 से अधिक सांसदों ने जज को पद से हटाने (महाभियोग) के प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए। अगस्त 2025 में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने ‘जज (जांच) अधिनियम, 1968’ के तहत 3-सदस्यीय जांच समिति का गठन किया।

घर में आग और नोटों की बरामदगी के बाद क्या-क्या हुआ?

अग्निकांड के बाद इस मामले में कई नाटकीय मोड़ आए, जिन्हें जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में सिलसिलेवार ढंग से दर्ज किया है:

  • सबूतों के साथ छेड़छाड़: दमकलकर्मियों के जाने के बाद स्टोररूम को तुरंत सील नहीं किया गया। सफाई करा दी गई और बाद में वे जली हुई करेंसी नोट रहस्यमयी तरीके से गायब हो गईं।
  • जज का टालमटोल वाला जवाब: जब जज से कैश के स्रोत (Source) और मालिकाना हक के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने पहले इनकार किया। बाद में उन्होंने कहा कि उन्हें फंसाने के लिए किसी ने कैश प्लांट (साजिश) किया होगा, लेकिन इसके समर्थन में वे कोई सबूत पेश नहीं कर सके।
  • जांच से हटना: जांच प्रक्रिया के दौरान गवाहियों के बाद जस्टिस वर्मा अचानक संसदीय जांच समिति की कार्यवाही से अलग हो गए और गवाही देने (Cross-examination) से मना कर दिया।
  • इस्तीफा लेकिन महाभियोग की तैयारी: विवाद बढ़ता देख अप्रैल 2026 में उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। हालाँकि, सरकार ने उनके इस्तीफे को स्वीकार/अधिसूचित नहीं किया है क्योंकि महाभियोग की प्रक्रिया पहले से शुरू हो चुकी थी।

जांच समिति ने रिपोर्ट में क्या-क्या पाया? (Key Findings)

संसदीय जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से लिखा:

  1. पहला आरोप (अवैध नकदी की बरामदगी): जज के सरकारी आवास के स्टोररूम से बड़ी मात्रा में ₹500 के नोट पाए गए, जिनका स्रोत या मालिकाना हक बताने में जज पूरी तरह विफल रहे। (साबित)
  2. दूसरा आरोप (सबूतों को नष्ट करना): घटना के बाद क्राइम सीन/स्टोररूम को सुरक्षित नहीं रखा गया, वहां सफाई की गई और साक्ष्यों (कैश) को गायब होने दिया गया। (साबित)
  3. तीसरा आरोप (भ्रामक और असंतोषजनक जवाब): जज ने मामले पर पारदर्शिता नहीं दिखाई। उनका बयान एक संवैधानिक पद पर बैठे जज की गरिमा और जिम्मेदारी के विपरीत था। (साबित)

ताजा अपडेट और आगे क्या होगा?

  • संसद में महाभियोग की तैयारी: चूंकि जांच समिति ने तीनों आरोपों को सिद्ध माना है, इसलिए केंद्र सरकार संसद के आगामी शीतकालीन सत्र (Winter Session) में जस्टिस वर्मा के खिलाफ औपचारिक महाभियोग (Removal Motion) चलाने पर विचार कर रही है।
  • नया नजीर स्थापित करने की कोशिश: सरकार का मानना है कि इस्तीफा देकर कोई जज निष्कासन/महाभियोग की कार्रवाई से नहीं बच सकता। इसलिए इस्तीफा स्वीकार किए बिना महाभियोग प्रक्रिया पूरी कर एक कड़ा संदेश देने की योजना है।

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