भारत का अंतरिक्ष में महाधमाका: देश का पहला प्राइवेट रॉकेट ‘Vikram-1’ अंतरिक्ष में सफल!…जानें मिशन की खास बातें

Vikram 1 Launch Success. भारत ने आज अंतरिक्ष की दुनिया में एक नया इतिहास रच दिया है। ठीक 46 साल पहले (1979 में) जिस श्रीहरिकोटा की धरती से भारत के महान वैज्ञानिक डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की देखरेख में पहला सरकारी रॉकेट SLV-3 उड़ा था, आज उसी जगह से देश के पहले प्राइवेट रॉकेट Vikram-1 ने सफलता का परचम लहराया है।

हैदराबाद की एक नई कंपनी ‘स्काईरूट एयरोस्पेस’ (Skyroot Aerospace) द्वारा बनाए गए इस रॉकेट को ‘मिशन आगमन’ के तहत अंतरिक्ष में भेजा गया। इस ऐतिहासिक कामयाबी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी बधाई दी और इसे भारत के अंतरिक्ष सफर का एक नया और ऐतिहासिक मोड़ बताया।

क्यों खास है विक्रम-1 रॉकेट?

  • 7 मंजिल ऊंचा: यह रॉकेट करीब 22 मीटर (7 मंजिल की इमारत जितना) ऊंचा है।
  • आधुनिक तकनीक: इसे पूरी तरह से मजबूत कार्बन फाइबर (कार्बन कंपोजिट) से बनाया गया है। इसमें 3D-प्रिंटेड इंजन तकनीक का इस्तेमाल हुआ है, जिसे अंतरिक्ष में जरूरत पड़ने पर दोबारा चालू (रीस्टार्ट) किया जा सकता है।
  • वजन उठाने की क्षमता: यह 350 किलोग्राम तक के छोटे सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष में पृथ्वी की निचली कक्षा (Low Earth Orbit) में पहुंचा सकता है। आज इसने 450 किलोमीटर की ऊंचाई पर अपनी तय जगह को सफलतापूर्वक छुआ।

इस बार अंतरिक्ष में क्या-क्या गया?

यह सिर्फ एक टेस्ट उड़ान नहीं थी, बल्कि यह रॉकेट अपने साथ कई जरूरी चीजें (पेलोड्स) लेकर गया है:

  1. SCOPE: स्काईरूट कंपनी का अपना खुद का सैटेलाइट।
  2. SOLARAS S3: पृथ्वी पर नजर रखने और तस्वीरें लेने वाला एक खास सैटेलाइट।
  3. EMBRACE: एक रोबोटिक हाथ, जो भविष्य में अंतरिक्ष में फैले कचरे को साफ करने का काम करेगा।
  4. DCubed: जर्मनी की एक कंपनी की नई तकनीक का ट्रायल।
  5. Cosmic Bloom: हीरों से बनी एक खूबसूरत कलाकृति, जिसे आर्ट के तौर पर अंतरिक्ष में भेजा गया है।

2022 से कितनी अलग है यह कामयाबी?

साल 2022 में इसी कंपनी ने ‘विक्रम-एस’ रॉकेट उड़ाया था, लेकिन वह सिर्फ छूकर वापस आ गया था (सब-ऑर्बिटल)। मगर आज Vikram-1 ने कमाल कर दिया। यह इतनी तेज रफ्तार (ऑर्बिटल वेलोसिटी) से गया है कि अब इसके द्वारा भेजे गए सैटेलाइट अंतरिक्ष में ही टिके रहेंगे और चक्कर काटते रहेंगे, वे वापस नीचे नहीं गिरेंगे।

इस सफलता के साथ ही भारत अब अमेरिका और चीन जैसे देशों की कतार में खड़ा हो गया है, जहाँ प्राइवेट कंपनियाँ अंतरिक्ष में अपने रॉकेट भेजती हैं।

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