Fact Check: क्या छात्रों को फ्री में मिल रहा है लैपटॉप? ‘नेशनल स्टूडेंट लैपटॉप स्कीम 2026’ के दावे और लिंक का सच

National Student Laptop Scheme 2026. सोशल मीडिया और व्हाट्सएप (WhatsApp) ग्रुप्स पर इन दिनों विद्यार्थियों को निशाना बनाकर एक बेहद आकर्षक लेकिन खतरनाक मैसेज तेजी से फॉरवर्ड किया जा रहा है। इस मैसेज में दावा किया जा रहा है कि भारत सरकार ‘नेशनल स्टूडेंट लैपटॉप स्कीम 2026’ (National Student Laptop Scheme 2026) के तहत देश के सभी छात्र-छात्राओं को पढ़ाई के लिए मुफ्त लैपटॉप वितरित कर रही है।

इस संदेश के साथ एक रजिस्ट्रेशन लिंक भी दी गई है, जिस पर क्लिक करके छात्रों से तुरंत आवेदन करने को कहा जा रहा है। मुफ्त लैपटॉप मिलने की लालच में आकर मासूम छात्र इस लिंक को अपने दोस्तों और अन्य ग्रुप्स में धड़ल्ले से शेयर कर रहे हैं। लेकिन अगर आपके पास भी ऐसा कोई मैसेज आया है, तो सावधान हो जाएं! यह पूरी तरह से एक बड़ा साइबर फ्रॉड (Cyber Fraud) है।

क्या है ‘फ्री लैपटॉप स्कीम’ का सच? (PIB Fact Check)

इस वायरल संदेश की हकीकत जानने के लिए जब सरकार की आधिकारिक फैक्ट-चेक यूनिट प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (PIB Fact Check) और शिक्षा मंत्रालय (Ministry of Education) के विंग्स से संपर्क किया गया, तो उन्होंने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया।

सरकारी जांच में सामने आया है कि:

“भारत सरकार या शिक्षा मंत्रालय द्वारा ‘नेशनल स्टूडेंट लैपटॉप स्कीम 2026’ नाम की ऐसी कोई भी योजना नहीं चलाई जा रही है। सोशल मीडिया पर किया जा रहा दावा पूरी तरह फर्जी (Fake) और भ्रामक है।”

मुफ्त लैपटॉप के बहाने ‘फिशिंग स्कैम’ का बड़ा जाल

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों और सरकारी एजेंसियों के मुताबिक, मैसेज के नीचे दी गई लिंक कोई आधिकारिक सरकारी वेबसाइट (जैसे .gov.in या .nic.in) नहीं है, बल्कि एक फिशिंग स्कैम (Phishing Scam) है।

इस फर्जी लिंक पर क्लिक करने से छात्रों को निम्नलिखित बड़े नुकसान हो सकते हैं:

  1. पर्सनल डेटा की चोरी: लिंक पर क्लिक करते ही एक फॉर्म खुलता है जिसमें छात्र का नाम, मोबाइल नंबर, स्कूल/कॉलेज और रोल नंबर जैसी निजी जानकारियां मांगी जाती हैं।
  2. बैंक डिटेल्स और वित्तीय धोखाधड़ी: कुछ मामलों में रजिस्ट्रेशन फीस या डिलीवरी चार्ज के नाम पर छोटी रकम (जैसे 50 या 100 रुपये) ऑनलाइन ट्रांसफर करने को कहा जाता है, जिसके जरिए साइबर ठग यूजर्स के बैंक अकाउंट और यूपीआई (UPI) पिन की गोपनीय जानकारी चुरा लेते हैं।
  3. मैलवेयर का खतरा: इस तरह की संदिग्ध वेबसाइट्स पर जाने से आपके मोबाइल या कंप्यूटर में वायरस या मैलवेयर डाउनलोड हो सकते हैं, जो आपके फोन के पर्सनल डेटा (गैलरी, पासवर्ड) को हैक कर सकते हैं।

फेक मैसेज की पहचान कैसे करें?

  • यूआरएल (URL) चेक करें: सरकारी योजनाओं की आधिकारिक वेबसाइट के अंत में हमेशा .gov.in या .nic.in होता है। यदि लिंक में .blogspot, .xyz, .online या कोई अन्य अजीब डोमेन नेम है, तो वह शत-प्रतिशत फर्जी है।
  • भाषा और स्पेलिंग की गलतियां: ऐसे फर्जी मैसेजेस में अक्सर व्याकरण (Grammar) और स्पेलिंग की कई गलतियां होती हैं।
  • आधिकारिक पुष्टि: किसी भी योजना का लाभ लेने से पहले संबंधित मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर उसकी पुष्टि जरूर करें।

farzikhabar.com की अपील: छात्रों और अभिभावकों से अनुरोध है कि वे इस तरह के किसी भी झांसे में न आएं। किसी भी अनजान लिंक पर अपनी व्यक्तिगत या बैंकिंग जानकारी साझा न करें और न ही इस फर्जी मैसेज को आगे फॉरवर्ड करके इस स्कैम का हिस्सा बनें।

इन्हें भी पढ़े