सरकारी दफ्तरों के चक्कर खत्म! छत्तीसगढ़ में नया बिजनेस शुरू करना हुआ बच्चों का खेल, जानिए नए कानून के फायदे

 

Ease of Doing Business Bill 2026. अगर आप अपना कोई छोटा-मोटा बिजनेस, दुकान या फैक्ट्री शुरू करने की सोच रहे हैं, लेकिन सरकारी दफ्तरों के चक्कर, लाइसेंस और बार-बार होने वाली चेकिंग के डर से कदम पीछे खींच लेते हैं, तो आपके लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी है।

छत्तीसगढ़ में अब खुद का कारोबार शुरू करना पहले से कहीं ज्यादा आसान होने वाला है। 16 जुलाई 2026 को छत्तीसगढ़ विधानसभा ने एक ऐतिहासिक ‘छत्तीसगढ़ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस विधेयक-2026’ पास किया है। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ पूरे देश में ऐसा पहला राज्य बन गया है, जिसने कारोबारियों पर ‘भरोसा’ जताते हुए जोखिम-आधारित (रिस्क-बेस्ड) सिस्टम लागू किया है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि यह कानून क्या है और आम आदमी को इससे क्या फायदा होगा।

आखिर क्या है ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस विधेयक-2026’?

सीधे शब्दों में कहें तो यह एक ऐसा कानून है जो छोटे और मध्यम कारोबारियों को ‘इंस्पेक्टर राज’ और जटिल कागजी कार्रवाई से मुक्ति दिलाएगा। पहले कोई भी काम शुरू करने के लिए सभी को एक ही जैसी लंबी सरकारी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था। लेकिन अब सरकार बिजनेस को उनके ‘जोखिम’ (रिस्क) के आधार पर बांटेगी।

अगर आपका बिजनेस कम जोखिम वाला है (जैसे कोई छोटी दुकान, बेकरी, या कुटीर उद्योग), तो आपको अधिकारियों की लंबी जांच-पड़ताल से नहीं गुजरना पड़ेगा। आपको तुरंत मंजूरी मिल जाएगी। वहीं, जो बड़े उद्योग हैं (जिनसे प्रदूषण या सुरक्षा का खतरा हो सकता है), केवल उनके लिए ही सख्त जांच की पुरानी व्यवस्था लागू रहेगी।

आम आदमी को कैसे मिलेगा फायदा?

यह नया बिल सीधे तौर पर राज्य के उन 15 लाख से ज्यादा छोटे-मझोले कारोबारियों (MSME) और नए युवाओं को फायदा पहुंचाएगा जो अपना काम शुरू करना चाहते हैं। इसके तहत आम आदमी को ये 5 बड़े फायदे होंगे:

  • ऑटो अप्रूवल (Auto Approval) का जादू: अगर आपने अनुमति के लिए आवेदन किया है और सरकारी विभाग तय समय-सीमा के भीतर कोई जवाब नहीं देता है, तो आपकी फाइल अटकेगी नहीं। तय समय बीतते ही आपको सिस्टम से अपने आप (स्वतः) मंजूरी मिल जाएगी।
  • हर साल रिन्यूअल की झंझट खत्म: एक बार लाइसेंस मिल गया, तो आपको हर साल उसे रिन्यू कराने के लिए बाबूओं के आगे-पीछे नहीं घूमना पड़ेगा। सरकार ने सालाना रिन्यूअल का नियम ही खत्म कर दिया है।
  • सेल्फ सर्टिफिकेशन (खुद का प्रमाण पत्र): भवन निर्माण या पानी के कनेक्शन जैसी अनुमतियों के लिए अब आपको विभागों की मिन्नतें नहीं करनी होंगी। आप खुद एक घोषणा पत्र (सेल्फ-डिक्लेरेशन) देकर या किसी अधिकृत इंजीनियर/आर्किटेक्ट से सर्टिफिकेट लेकर अपना काम शुरू कर सकते हैं।
  • इंस्पेक्टरों की बार-बार चेकिंग से मुक्ति: कम जोखिम वाले छोटे कारोबारों में अब सरकारी विभाग बार-बार निरीक्षण (Checking) के लिए नहीं आएंगे। सरकार आप पर भरोसा करेगी।
  • 43 जरूरी सेवाओं में होगी आसानी: राज्य सरकार के 8 अलग-अलग विभागों की करीब 43 सेवाओं को इस आसान सिस्टम के दायरे में लाया गया है, जिससे सोसायटी रजिस्ट्रेशन से लेकर फर्म बनाने तक का काम तेजी से होगा।

कौन रखेगा इस पर निगरानी?

यह सुनिश्चित करने के लिए कि यह कानून सिर्फ कागजों तक सीमित न रहे और अफसरों की मनमानी न चले, सरकार ने एक सख्त निगरानी तंत्र बनाया है। जिलों में इसकी कमान सीधे कलेक्टर के हाथों में होगी, राज्य स्तर पर मुख्य सचिव इसकी निगरानी करेंगे और इन सबके ऊपर खुद मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली परिषद काम करेगी।

निष्कर्ष: छत्तीसगढ़ सरकार का यह कदम उन युवाओं और आम लोगों के लिए एक संजीवनी साबित होगा, जो स्वरोजगार की दिशा में बढ़ना चाहते हैं। यह बिल साबित करता है कि जब सरकार जनता पर भरोसा करती है, तो राज्य के विकास के रास्ते अपने आप खुलने लगते हैं।

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