छत्तीसगढ़: साड़ी खरीदी में भ्रष्टाचार पर मंत्री राजवाड़े का बड़ा एक्शन, केंद्रीकृत सिस्टम बंद, अब सीधे खाते में जाएंगे पैसे!

Anganwadi Worker Saree Purchase New Rule. छत्तीसगढ़ की विष्णु देव साय सरकार ने सुशासन और पारदर्शिता की दिशा में एक और बड़ा और कड़ा कदम उठाया है। महिला एवं बाल विकास विभाग में वर्षों से चली आ रही साड़ियों की सेंट्रलाइज्ड (केंद्रीकृत) खरीदी व्यवस्था को पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया है। महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने यह ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए घोषणा की है कि अब आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को साड़ी खरीदने के लिए निर्धारित राशि सीधे उनके बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से भेजी जाएगी।

साड़ी खरीदी में भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद लिया गया कड़ा फैसला

गौरतलब है कि पिछले कुछ समय से विभागीय स्तर पर होने वाली साड़ी खरीदी की प्रक्रिया को लेकर लगातार सवाल उठ रहे थे और इसमें गंभीर अनियमितताओं व भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे थे। विभिन्न समाचार माध्यमों में आई खबरों और मैदानी स्तर से मिले सुझावों का गंभीरता से परीक्षण करने के बाद साय सरकार ने इस पूरी व्यवस्था को ही बदलने का निर्णय लिया। इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद अब बिचौलियों और कमीशनखोरी के खेल पर पूरी तरह से लगाम लग जाएगी, जिससे भ्रष्टाचार के लिए कोई जगह ही नहीं बचेगी।

मनपसंद कपड़ा चुनने की मिलेगी आजादी, डिजाइन रहेगा एकसमान

मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डीबीटी (DBT) व्यवस्था और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत यह कदम उठाया गया है। नई व्यवस्था की मुख्य बातें इस प्रकार हैं:

  • गुणवत्ता और कपड़े का चयन
    अब आंगनबाड़ी बहनें अपनी पसंद और सुविधा के अनुसार स्थानीय स्तर पर कॉटन, सिंथेटिक या अन्य किसी भी बेहतर क्वालिटी के कपड़े का चयन खुद कर सकेंगी।
  • एकरूपता के लिए तय गाइडलाइन
    पूरे प्रदेश में एकरूपता बनाए रखने के लिए साड़ी का रंग और डिज़ाइन विभागीय स्तर पर ही तय रहेगा। इसके अंतिम स्वरूप का निर्धारण कार्यकर्ताओं से परामर्श के बाद किया जाएगा, जिसे विभाग की वेबसाइट पर अपलोड किया जाएगा।
  • बजट का प्रावधान
    भारत सरकार की बाल विकास सेवा योजना के नियमों के तहत आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को प्रतिवर्ष दो यूनिफॉर्म दी जाती हैं, जिसके लिए प्रति यूनिफॉर्म अधिकतम 500 रुपये की राशि निर्धारित है। अब यह पूरी राशि सीधे उनके खातों में जाएगी।

सुशासन का नया मॉडल: हितग्राहियों को मिला अधिकार

इस फैसले को छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक सुधारों की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है। विभागीय मंत्री ने कहा कि हमारी सरकार आंगनबाड़ी बहनों के सम्मान और अधिकारों के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है। इस कदम से न केवल सरकारी धन का शत-प्रतिशत सही उपयोग होगा, बल्कि जमीनी स्तर पर काम करने वाली महिलाओं को निर्णय लेने का अधिकार और आत्मसम्मान भी मिलेगा।

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