Satluj Controversy: रिलीज के 48 घंटे में भारत में क्यों बैन हुई फिल्म ‘सतलुज’? जानिए पूरी इनसाइड स्टोरी

Satluj Movie Controversy. अभिनेता और सिंगर दिलजीत दोसांझ की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘सतलुज’ (Satluj) को लेकर देश में एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। करीब 4 साल तक सेंसर बोर्ड की बंदिशों से जूझने के बाद, फिल्म को बिना किसी शोर-शराबे और प्रमोशन के 3 जुलाई 2026 को ओटीटी प्लेटफॉर्म ZEE5 पर रिलीज किया गया था। लेकिन रिलीज के महज 48 घंटों के भीतर ही केंद्र सरकार के आदेश के बाद इसे भारत में पूरी तरह से हटा (बैन कर) दिया गया। इस फैसले के बाद पंजाब की राजनीति और फिल्म जगत में भूचाल आ गया है।

आइए विस्तार से समझते हैं कि आखिर क्या है ‘सतलुज’ फिल्म का विवाद, किस पर आधारित है इसकी कहानी और सरकार ने इस पर प्रतिबंध क्यों लगाया।

किस पर केंद्रित है फिल्म ‘सतलुज’?

यह फिल्म पंजाब के प्रसिद्ध मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा (Jaswant Singh Khalra) के जीवन और उनके संघर्ष पर आधारित है।

  • पृष्ठभूमि: फिल्म की कहानी 1980 और 1990 के दशक के उस दौर को दिखाती है जब पंजाब उग्रवाद और आतंकवाद के दौर से गुजर रहा था।
  • मुख्य मुद्दा: जसवंत सिंह खालड़ा ने इस दौरान पंजाब में कथित तौर पर लापता हुए हजारों अज्ञात लोगों और पुलिस द्वारा किए गए उनके गुप्त अंतिम संस्कार (फेक एनकाउंटर) के मामलों की जांच की थी। उनकी इस पड़ताल ने इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ला खड़ा किया था।
  • अंतिम परिणति: सितंबर 1995 में खुद जसवंत सिंह खालड़ा को उनके घर से किडनैप कर लिया गया और बाद में उनकी हत्या कर दी गई थी। इस मामले की सीबीआई जांच हुई, जिसमें कई पुलिस अफसरों को सजा भी हुई थी। फिल्म में दिलजीत दोसांझ ने जसवंत सिंह खालड़ा का ही मुख्य किरदार निभाया है।

तीन बार बदला गया फिल्म का नाम?

यह फिल्म पिछले 4 सालों से विवादों में रही है और इसका नाम तीन बार बदला जा चुका है:

  1. घल्लूघारा: शुरुआत में इस फिल्म का नाम ‘घल्लूघारा’ रखा गया था, जिसका पंजाबी में अर्थ ‘नरसंहार’ होता है। सेंसर बोर्ड (CBFC) ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई थी।
  2. पंजाब 95: इसके बाद फिल्म का नाम बदलकर ‘पंजाब 95’ किया गया।
  3. सतलुज: अंततः मेकर्स ने इसे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ‘सतलुज’ नाम से रिलीज किया।

भारत में क्यों बैन की गई फिल्म?

सरकारी सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिल्म को भारत में “सुरक्षा कारणों” और IT रूल्स 2021 के उल्लंघन के चलते हटाया गया है। इसके पीछे मुख्य वजहें निम्नलिखित हैं:

  • सेंसर बोर्ड के कट्स को बाइपास करना: मेकर्स ने साल 2022 में सेंसर बोर्ड (CBFC) के पास थियेट्रिकल रिलीज के लिए आवेदन किया था। बोर्ड ने फिल्म में 127 कट्स लगाने और कई दृश्य बदलने का सुझाव दिया था। मेकर्स इन कट्स के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट भी गए थे। कट्स पर सहमति न बनने के कारण फिल्म थिएटर्स में रिलीज नहीं हो पाई।
  • ओटीटी का फायदा उठाना: चूंकि ओटीटी प्लेटफॉर्म सीधे तौर पर सीबीएफसी (CBFC) के अधिकार क्षेत्र में नहीं आते, इसलिए मेकर्स ने बिना उन 127 कट्स को लागू किए, चुपचाप नए नाम ‘सतलुज’ के साथ इसे ZEE5 पर स्ट्रीम कर दिया।
  • सरकार का कड़ा एक्शन: जब यह मामला सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) के संज्ञान में आया, तो उन्होंने IT एक्ट की धारा 69A और IT रूल्स 2021 (पार्ट-3) के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए ZEE5 को इसे तुरंत हटाने का निर्देश दिया। सरकार का मानना है कि इस संवेदनशील विषय से राज्य की कानून-व्यवस्था और सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। फिलहाल सरकार ने इसकी जांच के लिए एक अंतर-विभागीय समिति (IDC) भी बना दी है।

विवाद पर राजनीति और दिलजीत दोसांझ का रिएक्शन

फिल्म के हटने के बाद ओटीटी प्लेटफॉर्म ZEE5 ने बयान जारी कर कहा कि वे फिल्म की क्रिएटिव सोच के साथ खड़े हैं, लेकिन “वर्तमान घटनाक्रमों” के कारण इसे भारत में अगले आदेश तक अनुपलब्ध किया जा रहा है (हालांकि यह ZEE5 ग्लोबल पर विदेशों में उपलब्ध है)।

दिलजीत दोसांझ ने कहा: “मुझे पूरा अंदेशा था कि फिल्म को सोमवार तक हटा दिया जाएगा, इसीलिए हमने इसका कोई प्रमोशन नहीं किया था ताकि यह चुपचाप दर्शकों तक पहुंच सके। मुझे खुशी है कि लोगों ने इसे डाउनलोड कर लिया है और अब घरों में जसवंत सिंह खालड़ा के काम पर चर्चा हो रही है। आप मुझे कितना भी परेशान कर लें, मैं मरते दम तक पंजाब के साथ खड़ा हूँ।”

राजनीतिक प्रतिक्रिया: शिरोमणि अकाली दल (SAD), कांग्रेस और पंजाब की सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (AAP) समेत कई दलों ने इस कदम की निंदा की है। उनका कहना है कि यह अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला है और पंजाब को अपने अतीत की सच्चाई का सामना करने से रोका जा रहा है। वहीं पूर्व भारतीय क्रिकेटर हरभजन सिंह ने भी फिल्म की सराहना करते हुए कहा था कि “सच्चाई को हमेशा के लिए दफनाया नहीं जा सकता।”

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