छत्तीसगढ़ का नकटी जमीन विवाद : चरागाह भूमि का कानूनी सच और पुरखों के दान से जुड़े 4 बड़े सवालों के जवाब

Chhattisgarh Nakti Village Land Dispute. जून 2026 के आखिरी हफ्ते में रायपुर के माना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले नकटी (साम्मनपुर) गांव में भारी पुलिस बल की मौजूदगी में प्रशासन ने एक बड़ा अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाया। इस कार्रवाई के तहत करीब 9 हेक्टेयर सरकारी जमीन पर बने 77 से अधिक मकानों को जमींदोज (बुलडोजर एक्शन) कर दिया गया। इस कार्रवाई के बाद से ही गांव में भारी तनाव है, राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है और बेघर हुए लोग तिरपाल (टेंट) तानकर अपनी जमीनों के हक की लड़ाई लड़ रहे हैं।

आइए सिलसिलेवार तरीके से समझते हैं कि यह पूरा मामला क्या है और इससे जुड़े जमीनी नियम क्या कहते हैं। मामले को आसानी से समझने के लिए इसे चार भागों में बांटा गया है :

भाग 1: क्या है नकटी गांव का पूरा मामला?

नकटी गांव रायपुर एयरपोर्ट से महज 5 किलोमीटर की दूरी पर और नवा रायपुर (प्रशासनिक हब) के बेहद करीब स्थित है। भौगोलिक रूप से बेहद कीमती होने के कारण इस जमीन की रीइस्टेट वैल्यू बहुत ज्यादा है।

  • प्रशासन का पक्ष: प्रशासन का कहना है कि यह जमीन राजस्व विभाग के रिकॉर्ड में शासकीय (चरागाह/घास) दर्ज है। पिछले कुछ वर्षों में यहाँ अवैध कब्जा 3 हेक्टेयर से बढ़कर 15 हेक्टेयर से अधिक हो गया था। हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद यह कार्रवाई की गई है। सरकार प्रभावित परिवारों को नया रायपुर के सेक्टर-30 स्थित EWS (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) आवासों में पुनर्वासित करने का दावा कर रही है।
  • ग्रामीणों और विपक्ष का आरोप: ग्रामीणों का कहना है कि वे यहाँ पीढ़ियों से रह रहे हैं। उनके पास राशन कार्ड और बिजली कनेक्शन भी थे। विपक्ष (कांग्रेस) का आरोप है कि सरकार इस कीमती जमीन को खाली कराकर यहाँ ‘विधायक कॉलोनी’ (MLA Colony) या छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड का कोई बड़ा प्रोजेक्ट लाना चाहती है, हालांकि हाउसिंग बोर्ड और मंत्रियों ने विधायक कॉलोनी के दावे को फिलहाल खारिज किया है।

भाग 2: चरागाह (घासभूमि) की जमीन को लेकर नियम क्या हैं?

छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता (Chhattisgarh Land Revenue Code) के तहत गांवों की जमीनों को अलग-अलग श्रेणियों में बांटा जाता है, जिसमें ‘निस्तार’ (सामुदायिक उपयोग) के लिए चरागाह या ‘घास’ भूमि आरक्षित की जाती है।

  • नियम: चरागाह की जमीन का प्राथमिक उद्देश्य गांव के मवेशियों (गायों-भैंसों) के चरने के लिए सुरक्षित रखना होता है। इस जमीन पर कोई भी व्यक्ति निजी मालिकाना हक नहीं जता सकता।
  • पट्टा या बेदखली: यदि कोई व्यक्ति चरागाह की जमीन पर पक्का निर्माण या खेती करता है, तो उसे अतिक्रमण माना जाता है। धारा 248 के तहत तहसीलदार को ऐसे व्यक्ति को बिना किसी मुआवजे के बेदखल करने और जुर्माना लगाने का अधिकार होता है।

क्या चरागाह की जमीन का उपयोग किसी अन्य काम के लिए हो सकता है?

हाँ, बिल्कुल हो सकता है, लेकिन इसके लिए एक सख्त कानूनी प्रक्रिया है:

  1. व्यपवर्तन (Diversion/Category Change): यदि सरकार को किसी जनहित (Public Purpose) के कार्य जैसे- स्कूल, अस्पताल, सरकारी सड़क या पुनर्वास योजना के लिए उस जमीन की आवश्यकता है, तो कलेक्टर के पास उस जमीन का मद (Category) बदलने का अधिकार होता है।
  2. शर्त: मद बदलने से पहले यह सुनिश्चित करना होता है कि गांव में मवेशियों के लिए पर्याप्त वैकल्पिक चरागाह भूमि उपलब्ध हो। एक बार जब कलेक्टर रिकॉर्ड में ‘चरागाह’ को ‘शासकीय सामान्य भूमि’ में बदल देते हैं, तो उसका उपयोग अन्य सरकारी या आवासीय कार्यों के लिए किया जा सकता है।

भाग 3: क्या पुरखों की दान की गई जमीन वापस मिल सकती है?

नकटी मामले में कई ग्रामीणों का कहना था कि यह जमीन उनके पुरखों ने कभी गांव के सार्वजनिक हित (जैसे मवेशियों के चरने) के लिए सरकार या समाज को दी थी।

कानूनी स्थिति (भारतीय संपत्ति हस्तांतरण अधिनियम – Transfer of Property Act):

  • एक बार दान, हमेशा के लिए दान: कानूनन, यदि आपके पुरखों ने स्वेच्छा से, बिना किसी दबाव के, रजिस्टर्ड गिफ्ट डीड (दानपत्र) के जरिए जमीन सरकार या ग्राम पंचायत को सौंप दी थी, तो उसे कानूनी रूप से वापस नहीं लिया जा सकता। * अपवाद (कैसे मिल सकती है वापस?): जमीन सिर्फ एक ही शर्त पर वापस पाने का दावा किया जा सकता है— यदि दानपत्र (Gift Dext) बनाते समय उसमें कोई ‘सशर्त क्लॉज’ (Conditional Clause) जोड़ा गया हो। उदाहरण के लिए, यदि दानपत्र में लिखा हो कि “यह जमीन सिर्फ स्कूल बनाने के लिए दी जा रही है, और यदि 20 साल तक स्कूल नहीं बना, तो जमीन मूल मालिक या उसके वारिसों को वापस मिल जाएगी।” अगर ऐसा कोई क्लॉज है और उसका उल्लंघन हुआ है, तो कोर्ट के माध्यम से वारिस जमीन वापस मांग सकते हैं। बिना शर्त किए गए दान को वापस पाना असंभव है।

भाग 4: क्या दान करने वाले के वंशज उस जमीन का उपयोग कर सकते हैं?

  • निजी या व्यावसायिक उपयोग: नहीं। एक बार जमीन दान हो जाने के बाद, दानकर्ता के वंशजों का उस जमीन पर कोई विशेष या व्यक्तिगत एकाधिकार (Monopoly) नहीं रहता। वे उस जमीन को न बेच सकते हैं और न ही उस पर अपना घर बना सकते हैं।
  • सामुदायिक उपयोग: यदि वह जमीन पूरे गांव के सामुदायिक उपयोग (जैसे चरागाह, तालाब, या मेला मैदान) के लिए दान की गई थी, तो वंशज भी गांव के एक आम नागरिक के नाते उसका वैसे ही उपयोग कर सकते हैं जैसे गांव का कोई भी अन्य व्यक्ति करता है। वे वहां अपने मवेशी चरा सकते हैं, लेकिन उस पर कब्जा या निर्माण नहीं कर सकते।

नकटी गांव का विवाद कानूनी तकनीकी और मानवीय संवेदनाओं के बीच फंसा हुआ है। कानूनन सरकारी और चरागाह भूमि पर कब्जा अवैध है, लेकिन दशकों से रह रहे परिवारों को बारिश के मौसम में बेघर किए जाने से उपजा मानवीय संकट इस समय छत्तीसगढ़ की राजनीति का सबसे संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है।

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