आगरा कैंट रेलवे स्टेशन पर ‘जंग’: ट्रेन रुकवाने पर RPF ने डिप्टी स्टेशन मास्टर को पीटा, घसीटकर ले गए थाना; 5 सस्पेंड

Agra Cantt Railway Station RPF Clash. उत्तर प्रदेश के आगरा कैंट रेलवे स्टेशन पर रविवार (12 जुलाई) को कानून के रखवालों और रेलवे के ही एक जिम्मेदार अधिकारी के बीच सरेआम ‘गैंगवार’ जैसी स्थिति देखने को मिली। हीराकुंड एक्सप्रेस को रुकवाने को लेकर रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के जवानों और ऑपरेशन्स विभाग के डिप्टी स्टेशन अधीक्षक (Dy SS) नरेंद्र चाहर के बीच जमकर लात-घूंसे चले। हद तो तब हो गई जब आरपीएफ जवान डिप्टी स्टेशन अधीक्षक को जमीन पर पटककर, हाथ-पैर पकड़कर करीब 300 मीटर तक घसीटते हुए आरपीएफ थाने ले गए। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद रेलवे महकमे में हड़कंप मच गया है।

क्या है पूरा मामला?

घटना रविवार सुबह करीब 10:51 बजे की है, जब अमृतसर-विशाखापत्तनम हीराकुंड एक्सप्रेस (ट्रेन नंबर 20808) आगरा कैंट रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 1 पर आकर रुकी। अपने निर्धारित समय के बाद ट्रेन जैसे ही आगे बढ़ने लगी, तभी लुधियाना की एक महिला यात्री, जो प्लेटफॉर्म पर कुछ सामान लेने उतरी थी, उसकी ट्रेन छूटने लगी।

महिला ने चलती ट्रेन में चढ़ने का प्रयास किया, लेकिन वह लड़खड़ा गई। यात्री की सुरक्षा को खतरे में देख वहां मौजूद ऑपरेशन्स विभाग के डिप्टी स्टेशन अधीक्षक (Dy SS) नरेंद्र चाहर ने तुरंत तत्परता दिखाई। उन्होंने वॉक-टॉक पर ट्रेन के गार्ड/मैनेजर को संदेश देकर ट्रेन को तुरंत रुकवा दिया।

विवाद और मामले की सच्चाई क्या है?

ट्रेन के अचानक रुकते ही प्लेटफॉर्म पर तैनात आरपीएफ के जवान वहां पहुंचे। इस बीच मामले में दो अलग-अलग दावे सामने आए हैं:

  • डिप्टी स्टेशन अधीक्षक (रेलवे स्टाफ) का पक्ष: डिप्टी एसएस का आरोप है कि आरपीएफ जवानों ने महिला यात्री को चेन पुलिंग (ACP) के झूठे आरोप में पकड़ लिया और उससे कथित तौर पर पैसों की मांग करने लगे। जब डिप्टी एसएस ने हस्तक्षेप किया और कहा कि ट्रेन उन्होंने यात्री सुरक्षा के लिए आधिकारिक तौर पर रुकवाई है, न कि चेन पुलिंग हुई है, तो आरपीएफ जवान भड़क गए। विवाद इतना बढ़ा कि आरपीएफ जवानों ने उनके साथ गाली-गलौज की, उन्हें जमीन पर गिराकर पीटा और घसीटते हुए थाने ले गए।
  • आरपीएफ (RPF) का पक्ष: दूसरी ओर, आरपीएफ जवानों का आरोप है कि डिप्टी स्टेशन अधीक्षक ने ड्यूटी पर तैनात सुरक्षाकर्मियों के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया और उन्हें गालियां दीं, जिसके बाद स्थिति बिगड़ी। आरपीएफ कांस्टेबल जितेंद्र ने भी डिप्टी एसएस पर मारपीट का आरोप लगाया है।

सच्चाई का विश्लेषण: उत्तर मध्य रेलवे (NCR) के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (CPRO) शिवम शर्मा के मुताबिक, यह पूरी घटना ट्रेन रोकने के कारण को लेकर दोनों विभागों के बीच उपजी एक बड़ी गलतफहमी (Misunderstanding) का नतीजा थी। हालांकि, एक जिम्मेदार अधिकारी को सरेआम घसीटने के आरपीएफ के कृत्य को रेलवे प्रशासन ने बेहद गंभीर माना है।

इस मामले में अब तक क्या कार्रवाई हुई?

घटना के बाद रेलवे कर्मचारियों में भारी आक्रोश फैल गया। कर्मचारियों ने आरपीएफ थाने का घेराव कर नारेबाजी की और काम ठप करने की चेतावनी दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए रेलवे प्रशासन ने तुरंत कड़े कदम उठाए हैं:

  1. पांच आरपीएफ कर्मी सस्पेंड: प्राथमिक जांच और वीडियो साक्ष्यों के आधार पर आरपीएफ इंस्पेक्टर सुरेंद्र चौधरी, एएसआई मेघराज मीणा, एएसआई बालकिशन, कांस्टेबल जितेंद्र और कांस्टेबल बदन सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित (Suspend) कर दिया गया है।
  2. हाई-लेवल जांच कमेटी गठित: मामले की निष्पक्ष जांच के लिए 3 सदस्यीय जूनियर एडमिनिस्ट्रेटिव ग्रेड (JAG) कमेटी का गठन किया गया है। इस कमेटी में सीनियर डिविजनल ऑपरेशन्स मैनेजर (DOM), सीनियर डिविजनल इलेक्ट्रिकल इंजीनियर (DEE), और सीनियर डिविजनल सिक्योरिटी कमिश्नर (RPF) शामिल हैं। कमेटी स्टेशन के सीसीटीवी फुटेज और गवाहों के आधार पर विस्तृत रिपोर्ट सौंपेगी, जिसके बाद रेलवे अधिनियम के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई होगी।

किन परिस्थितियों में ट्रेन को रुकवाया जा सकता है?

इस विवाद के केंद्र में ट्रेन को रोकना (Train Halting) था। भारतीय रेलवे के नियमों के मुताबिक, किसी भी स्टेशन या बीच रास्ते में ट्रेन को केवल विशेष और आपातकालीन परिस्थितियों में ही रोका जा सकता है:

  • यात्री सुरक्षा (Passenger Safety): यदि कोई यात्री ट्रेन से गिर जाता है, या चलती ट्रेन में चढ़ते समय उसकी जान को खतरा होता है (जैसा आगरा मामले में हुआ), तो स्टेशन मास्टर या ड्यूटी पर तैनात ऑपरेशन्स स्टाफ आपातकालीन शक्तियों का उपयोग कर ट्रेन रुकवा सकता है।
  • चिकित्सकीय आपातकाल (Medical Emergency): यदि ट्रेन के भीतर किसी यात्री की तबीयत अचानक बेहद गंभीर हो जाती है और उसे तुरंत इलाज की आवश्यकता होती है।
  • तकनीकी खराबी या दुर्घटना की आशंका (Technical Snag / Safety Threat): यदि पटरी में कोई खराबी हो, ट्रेन में आग या धुआं दिखे, या कोई अन्य तकनीकी समस्या हो जिससे दुर्घटना का खतरा हो।
  • अलार्म चेन पुलिंग (ACP): यात्री स्वयं आपात स्थिति में (जैसे- परिवार का छूट जाना, चोरी होना या कोई दुर्घटना) चेन खींचकर ट्रेन रोक सकते हैं, लेकिन बिना वैध कारण के ऐसा करने पर रेलवे अधिनियम की धारा 141 के तहत जुर्माना या जेल का प्रावधान है।

आगरा कैंट की घटना में डिप्टी स्टेशन अधीक्षक ने यात्री सुरक्षा के तहत अपने अधिकारों का सही इस्तेमाल किया था, लेकिन आरपीएफ और ऑपरेशन्स विभाग के बीच समन्वय (Coordination) की कमी और आरपीएफ के उग्र व्यवहार ने इस सराहनीय कदम को एक बड़े विवाद में बदल दिया।

इन्हें भी पढ़े