पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बड़ी गिरावट संभव! कच्चे तेल के दाम 80 डॉलर के नीचे, जानें कब-कितनी मिलेगी राहत
Petrol Diesel Prices. पिछले कुछ महीनों से महंगाई की मार झेल रहे आम उपभोक्ताओं के लिए एक राहत भरी खबर सामने आ रही है। पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी तनाव के बीच हाल ही में हुए सकारात्मक घटनाक्रमों और शांति वार्ताओं के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। एक समय 115 से 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच चुका ब्रेंट क्रूड अब गिरकर 80 डॉलर प्रति बैरल के नीचे (करीब 77-79 डॉलर) आ गया है।
वैश्विक बाजार में कच्चे तेल के इस तरह सस्ते होने के बाद अब भारत में भी पेट्रोल और डीजल के दाम कम होने की उम्मीदें तेजी से बढ़ने लगी हैं। हालांकि, क्या वाकई आम जनता को तुरंत राहत मिलेगी? सरकार और एक्सपर्ट्स के इस पर क्या संकेत हैं, आइए इसे विस्तार से समझते हैं।
सरकार ने क्या दिए हैं संकेत और क्या है आधार?
कच्चे तेल की कीमतों में 30% तक की बड़ी गिरावट के बावजूद, आम जनता को इसका फायदा मिलने में थोड़ा वक्त लग सकता है। केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने हाल ही में तेल की कीमतों को लेकर स्थिति स्पष्ट की है। सरकार के आधिकारिक बयानों के अनुसार:
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शिपिंग और लॉजिस्टिक्स में लगने वाला समय: केंद्रीय मंत्री ने साफ किया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल सस्ता होने का असर तुरंत घरेलू रिटेल पंपों पर नहीं दिखता। विदेशी बाजारों से सस्ता कच्चा तेल भारत आने, ‘स्ट्रैट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) के रास्ते ट्रांसपोर्ट होने और रिफाइनरियों तक पहुंचने में हफ्तों का समय लगता है। जैसे ही यह सप्लाई चेन सामान्य होगी, कीमतों की समीक्षा की जाएगी।
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तेल कंपनियों के घाटे की भरपाई: जब कुछ समय पहले कच्चे तेल के दाम आसमान छू रहे थे, तब सरकारी तेल कंपनियों (IOCL, BPCL, HPCL) को भारी घाटा उठाना पड़ रहा था। तब सरकार ने एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती कर और करीब 12,000 करोड़ रुपये का वित्तीय बोझ खुद उठाकर जनता को बड़ी बढ़ोतरी से बचाया था। अब जब क्रूड सस्ता हुआ है, तो पहले तेल कंपनियां अपने पुराने घाटे (Under-recoveries) को पाट रही हैं।
ब्रोकरेज फर्म्स और एक्सपर्ट्स की क्या है राय?
दिग्गज वैश्विक ब्रोकरेज फर्म जेपी मॉर्गन (J.P. Morgan) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, कच्चे तेल के दाम गिरने और उत्पाद शुल्क में एडजस्टमेंट के चलते भारत की सरकारी तेल कंपनियों का प्रॉफिट मार्जिन अब संकट से पूर्व के स्तर से भी बेहतर स्थिति में आ गया है। जेपी मॉर्गन की रिपोर्ट बताती है कि पहले जो तेल कंपनियों को डीजल और पेट्रोल पर भारी नुकसान हो रहा था, वह अब लगभग खत्म या बेहद कम (मात्र 3 रुपये प्रति लीटर के आसपास) रह गया है। यह स्थिति घरेलू बाजार में दाम घटाने के लिए बेहद अनुकूल आधार तैयार करती है।
कितने कम हो सकते हैं दाम?
ऑयल सेक्टर के जानकारों और आर्थिक विश्लेषकों के मुताबिक, यदि कच्चे तेल की कीमतें 75 से 80 डॉलर प्रति बैरल के बीच स्थिर बनी रहती हैं और होर्मुज जलमार्ग से सप्लाई बिना किसी रुकावट के जारी रहती है, तो तेल कंपनियां और केंद्र सरकार मिलकर आम उपभोक्ताओं को बड़ी राहत दे सकती हैं।
- अनुमानों के मुताबिक, आगामी महीनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3 रुपये से लेकर 5 रुपये प्रति लीटर तक की कटौती देखने को मिल सकती है।
- हालांकि, अंतिम फैसला इस बात पर निर्भर करेगा कि आगामी हफ्तों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल का व्यवहार कैसा रहता है।

