सुप्रीम कोर्ट ने विशेषाधिकार का इस्तेमाल कर बढ़ाया किसानों का मुआवजा, जानें सुप्रीम कोर्ट के इस विशेषाधिकार को

Supreme Court Article 142 Farmers Compensation. देश की सर्वोच्च अदालत ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि जब बात न्याय की हो, तो कोई भी तकनीकी या कानूनी अड़चन आड़े नहीं आ सकती। सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक विशेषाधिकार का इस्तेमाल करते हुए किसानों के भूमि अधिग्रहण मुआवजे में भारी बढ़ोतरी की है। यह फैसला न केवल उन किसानों के लिए राहत लाया है, बल्कि भारतीय संविधान में न्याय की ताकत को भी दर्शाता है।

किस मामले में हुआ विशेषाधिकार का इस्तेमाल?

यह मामला कर्नाटक में हुए भूमि अधिग्रहण से जुड़ा है। सरकार द्वारा अधिग्रहित की गई जमीन के बदले में किसानों को मुआवजा दिया जा रहा था, लेकिन यह राशि कम थी। इस मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने ‘समानता के सिद्धांत’ (एक ही अधिसूचना के तहत अधिग्रहित भूमि के लिए एक समान दर) को दोहराते हुए किसानों का मुआवजा 5 लाख रुपये से बढ़ाकर 6.5 लाख रुपये प्रति एकड़ कर दिया। हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि किसानों को मुआवजे के भुगतान में हुई देरी के लिए कोई अतिरिक्त ब्याज नहीं दिया जाएगा।

किस नियम के तहत सुप्रीम कोर्ट को मिला है यह विशेष अधिकार?

सुप्रीम कोर्ट ने जिस विशेष शक्ति का इस्तेमाल करके यह मुआवजा बढ़ाया है, वह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 142 (Article 142) के तहत आती है।

क्या है आर्टिकल 142 और इसे कब इस्तेमाल किया जा सकता है?

संविधान का अनुच्छेद 142 सुप्रीम कोर्ट को यह विशेष और असाधारण अधिकार देता है कि वह किसी भी लंबित मामले में “पूर्ण न्याय” (Complete Justice) सुनिश्चित करने के लिए कोई भी आवश्यक आदेश या डिक्री पारित कर सकता है।

  • कब होता है इस्तेमाल: अदालत इस शक्ति का उपयोग तब करती है जब उसे लगता है कि मौजूदा कानून या तय कानूनी प्रक्रियाएं किसी पीड़ित को न्याय दिलाने में अपर्याप्त हैं। अगर कानून खामोश है या सख्त नियमों के कारण अन्याय हो रहा है, तो कोर्ट अपने विवेक से ऐसा आदेश दे सकता है जो न्यायसंगत हो।
  • अनुच्छेद 142 के तहत पारित आदेश पूरे भारत में लागू होते हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने पहले कब-कब किया है इस अधिकार का इस्तेमाल?

यह कोई पहला मौका नहीं है जब सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल किया हो। देश के कई बड़े और ऐतिहासिक फैसलों में इस विशेषाधिकार ने अहम भूमिका निभाई है:

  1. अयोध्या राम जन्मभूमि विवाद (2019): सुप्रीम कोर्ट ने विवादित 2.77 एकड़ जमीन रामलला विराजमान को सौंपने का फैसला सुनाया था। उसी दौरान, “पूर्ण न्याय” सुनिश्चित करने के लिए अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल करते हुए अदालत ने सुन्नी वक्फ बोर्ड को मस्जिद निर्माण के लिए अयोध्या में ही अलग से 5 एकड़ जमीन देने का आदेश भी दिया था।
  2. भोपाल गैस त्रासदी (1989): गैस रिसाव के पीड़ितों को त्वरित न्याय और मुआवजा दिलाने के लिए कोर्ट ने अनुच्छेद 142 का उपयोग करते हुए ‘यूनियन कार्बाइड कॉर्पोरेशन’ (UCC) पर हर्जाना लगाया था।
  3. बुलडोजर एक्शन मामले में (2024): संपत्तियों पर होने वाली मनमानी बुलडोजर कार्रवाई पर रोक लगाने और यह नियम बनाने के लिए कि संपत्ति के मालिक को 15 दिन का पूर्व नोटिस दिए बिना कोई कार्रवाई नहीं होगी, अदालत ने इसी अनुच्छेद का जिक्र किया था।
  4. चंडीगढ़ मेयर चुनाव: मतपत्रों में हुई छेड़छाड़ के मामले में चुनाव प्रक्रिया को दोबारा कराने के बजाय, कोर्ट ने इसी विशेषाधिकार के तहत अवैध घोषित किए गए वोटों को वैध मानकर सही उम्मीदवार को मेयर घोषित कर दिया था।

कर्नाटक के किसानों के मामले में दिया गया यह फैसला एक बार फिर साबित करता है कि भारतीय न्याय व्यवस्था में सर्वोपरि लक्ष्य केवल कानून का पालन करना नहीं, बल्कि आम नागरिक को ‘पूर्ण न्याय’ दिलाना है।

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