छत्तीसगढ़ का ‘गंगाराम’: जब मगरमच्छ बना परिवार का हिस्सा, अब स्कूली बच्चे पढ़ेंगे सह-अस्तित्व की अनोखी कहानी
Story of Crocodile Gangaram. छत्तीसगढ़ के एक छोटे से गाँव से निकलकर एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसने न केवल देश का ध्यान खींचा, बल्कि अब यह आने वाली पीढ़ियों के लिए शिक्षा का जरिया भी बनेगी। यह कहानी है इंसान और एक विशालकाय मगरमच्छ के बीच अनूठे प्रेम, विश्वास और सह-अस्तित्व की, जिसे अब स्कूल की किताबों में शामिल किया गया है।
मगरमच्छ जो था गाँव का ‘सदस्य’
यह पूरा मामला छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले के बावा मोहतरा (Bawa Mohtara) गाँव का है। यहाँ के एक तालाब में ‘गंगाराम’ (Gangaram) नाम का एक मगरमच्छ लगभग तीन दशकों तक रहा। आमतौर पर मगरमच्छों को खतरनाक शिकारी माना जाता है, लेकिन गंगाराम अलग था।
गाँव वालों के अनुसार, गंगाराम ने कभी किसी इंसान या मवेशी को नुकसान नहीं पहुँचाया। गाँव के लोग बेखौफ होकर उसी तालाब में नहाते थे, कपड़े धोते थे, जहाँ गंगाराम तैरता रहता था। बच्चे उसके आसपास खेलते थे। ग्रामीण उसे अपने परिवार के सदस्य की तरह मानते थे और उसे प्यार से खाना भी खिलाते थे। उनका मानना था कि गंगाराम उनके गाँव का रक्षक है।
अंतिम विदाई में रोया पूरा गाँव
गंगाराम के प्रति गाँव वालों का प्रेम तब और भी स्पष्ट हो गया जब 2019 में उसकी प्राकृतिक कारणों से मृत्यु हो गई। इस विशाल जीव की मौत पर पूरे बावा मोहतरा गाँव में शोक छा गया। ग्रामीणों ने एक इंसान की तरह गंगाराम की शव यात्रा निकाली, उसे फूलों से सजाया और नम आँखों से अंतिम विदाई दी। बाद में, गाँव वालों ने चंदा इकट्ठा करके तालाब के किनारे गंगाराम की समाधि भी बनवाई, जो आज भी उनके अटूट रिश्ते की गवाह है।
अब कहानी से बच्चे सीखेंगे प्रकृति से प्रेम
इस दुर्लभ और भावुक कहानी की गहराई को समझते हुए, NCERT (राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद) ने इसे अपने नए शैक्षणिक पाठ्यक्रम में शामिल करने का फैसला किया है।
- किस कक्षा के बच्चों को: यह पाठ मुख्य रूप से प्राथमिक और उच्च प्राथमिक कक्षा के बच्चों के लिए तैयार किया जा रहा है।
- उद्देश्य: इसे पाठ्यक्रम में शामिल करने का मुख्य उद्देश्य बच्चों में वन्यजीवों के प्रति संवेदनशीलता, पर्यावरण संरक्षण और सबसे महत्वपूर्ण, इंसान और प्रकृति के बीच सह-अस्तित्व (Co-existence) की भावना को जगाना है। गंगाराम की कहानी यह सिखाएगी कि यदि हम वन्यजीवों को सम्मान और स्थान देते हैं, तो वे भी हमारे साथ शांति से रह सकते हैं। यह पाठ न केवल किताबी ज्ञान देगा, बल्कि बच्चों के चरित्र निर्माण में भी मदद करेगा।
जांजगीर चांपा में भी कुछ ऐसा ही मामला
छत्तीसगढ़ में ही, जांजगीर-चांपा जिले के कोटमी सोनार (Kotmi Sonar) में भी एक मगरमच्छ पार्क है, जहाँ बड़ी संख्या में मगरमच्छ रहते हैं और वहाँ भी ग्रामीण उनके साथ सह-अस्तित्व में रहते हैं। यह दिखाता है कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति में प्रकृति और जीव-जंतुओं के लिए एक विशेष स्थान है।
बावा मोहतरा के गंगाराम की यह कहानी अब बंद कमरों से निकलकर देश भर के स्कूलों में गूंजेगी, और आने वाली पीढ़ियों को प्रकृति के साथ मिलकर रहने का एक नया और सुंदर नजरिया देगी।

