सेब-पपीता नहीं, तो पुराणों में किन फलों का है जिक्र? देवताओं का प्रिय और ब्रह्मांड का सबसे उत्तम ‘फल’ कौन सा है!
Fruits in Puranas. आजकल जब हम बाजार जाते हैं, तो फलों की दुकानों पर सेब, पपीता, कीवी, ड्रैगन फ्रूट और अमरूद जैसे फलों की भरमार देखते हैं। ये फल हमारी रोजमर्रा की डाइट का अहम हिस्सा बन चुके हैं। लेकिन, क्या आपने कभी सोचा है कि जब हम रामायण, महाभारत या अठारह पुराणों की कथाएं सुनते हैं, तो देवी-देवताओं या ऋषि-मुनियों के भोजन में इन फलों का जिक्र क्यों नहीं मिलता? आखिर प्राचीन काल में भारत में कौन से फल खाए जाते थे और पुराणों के अनुसार सबसे उत्तम फल कौन सा है? आइए इस रहस्य से पर्दा उठाते हैं।
पुराणों में किन-किन फलों का है जिक्र?
अगर हम शिव पुराण, विष्णु पुराण, भागवत और स्कंद पुराण जैसे प्राचीन ग्रंथों और आयुर्वेद (चरक संहिता, सुश्रुत संहिता) का अध्ययन करें, तो हमें मुख्य रूप से उन फलों का उल्लेख मिलता है, जो भारतीय उपमहाद्वीप के मूल निवासी (Native) हैं। पुराणों में मुख्य रूप से इन फलों का जिक्र है:
- आम (आम्र): इसे फलों का राजा और देवताओं का प्रिय माना गया है।
- नारियल (नारिकेल): इसे ‘श्रीफल’ कहा जाता है, यानी देवी लक्ष्मी का फल।
- केला (कदली): कदली वन का जिक्र कई पुराणों में है (जैसे हनुमान जी का निवास)।
- बेल (बिल्व): भगवान शिव को अत्यंत प्रिय।
- आंवला (आमलकी): भगवान विष्णु का प्रिय फल।
- जामुन (जम्बू): इसी फल के नाम पर भारतवर्ष का प्राचीन नाम ‘जम्बूद्वीप’ पड़ा था।
- कटहल (पनस): इसका जिक्र भी प्राचीन ग्रंथों में बहुतायत से मिलता है।
- अनार (दाड़िम) और अंगूर (द्राक्षा): इनका आयुर्वेद और धार्मिक कथाओं में विशेष उल्लेख है।
मौजूदा फल (पपीता, अमरूद, सेब) पुराणों में क्यों नहीं हैं?
यह एक बहुत ही रोचक ऐतिहासिक तथ्य है। आज हम जिन फलों को बहुत चाव से खाते हैं— जैसे पपीता, अमरूद, अनानास (पाइनएप्पल), सीताफल, टमाटर, और काजू— ये वास्तव में भारत के मूल फल नहीं हैं।
ये फल 15वीं और 16वीं शताब्दी में पुर्तगालियों, डच और ब्रिटिश व्यापारियों द्वारा दक्षिण अमेरिका (मुख्य रूप से ब्राजील और मेक्सिको) से भारत लाए गए थे। आधुनिक सेब (Apple) की जो मीठी किस्में आज हम खाते हैं, वे भी बहुत बाद में मध्य एशिया से आईं। क्योंकि ये विदेशी फल हजारों साल पहले भारत में उगते ही नहीं थे, इसलिए महर्षि व्यास या वाल्मीकि जी द्वारा रचित पुराणों और महाकाव्यों में इनका कोई जिक्र नहीं मिलता।
पुराणों के अनुसार सबसे उत्तम फल कौन सा है और क्यों?
पुराणों और शास्त्रों के अनुसार, अगर किसी एक फल को सबसे उत्तम, पवित्र और चमत्कारी माना गया है, तो वह है आंवला (Amalaki) और अनुष्ठानों की दृष्टि से नारियल (श्रीफल)।
1. आंवला (सर्वश्रेष्ठ स्वास्थ्य और आध्यात्मिक फल): पद्म पुराण और स्कंद पुराण में आंवले को ‘अमृत फल’ और ‘धात्री फल’ (माता के समान पोषण देने वाला) कहा गया है।
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क्यों है उत्तम? कथाओं के अनुसार, जब ब्रह्मा जी भगवान विष्णु की तपस्या कर रहे थे, तब उनके आंसुओं से आंवले के पेड़ की उत्पत्ति हुई थी। माना जाता है कि आंवले के पेड़ में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का वास होता है। स्वास्थ्य की दृष्टि से भी आयुर्वेद में इसे त्रिदोष (वात, पित्त, कफ) नाशक और आयु बढ़ाने वाला (रसायन) बताया गया है। इसी कारण ‘आमलकी एकादशी’ का व्रत भी रखा जाता है।
2. नारियल / श्रीफल (सर्वश्रेष्ठ धार्मिक फल): नारियल को संस्कृत में ‘श्रीफल’ (धन और समृद्धि का फल) कहा जाता है।
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क्यों है उत्तम? कोई भी वैदिक पूजा, हवन या संकल्प बिना श्रीफल के पूरा नहीं होता। माना जाता है कि जब भगवान विष्णु ने पृथ्वी पर अवतार लिया, तो वे अपने साथ तीन चीजें लाए थे— माता लक्ष्मी, कामधेनु गाय और नारियल का वृक्ष। नारियल के तीन नेत्रों को भगवान शिव का त्रिनेत्र भी माना जाता है। यह एकमात्र ऐसा फल है जिसका बाहरी आवरण कठोर (अहंकार का प्रतीक) और अंदर का हिस्सा निर्मल और मीठा (शुद्ध आत्मा का प्रतीक) होता है।
हमारे पुराण केवल धर्म की ही नहीं, बल्कि उस समय के भूगोल और कृषि की भी सटीक जानकारी देते हैं। अगली बार जब आप जामुन, आंवला या आम खाएं, तो याद रखें कि आप उन फलों का स्वाद ले रहे हैं, जिन्हें सदियों पहले हमारे देवी-देवताओं और ऋषि-मुनियों ने भी अपने प्रसाद रूप में ग्रहण किया था!

