बिना दवा और सर्जरी के झड़ जाते हैं शरीर के सारे मस्से! भारत के इन दो अनोखे मंदिरों के आगे मेडिकल साइंस भी हैरान
Massa Thik Karne Wala Mandir. त्वचा पर होने वाले अनचाहे और जिद्दी मस्से (Warts) कई बार डॉक्टरों के चक्कर काटने और महंगी दवाओं के बाद भी ठीक नहीं होते। लेकिन भारत में दो ऐसे पवित्र धाम हैं, जहाँ किसी डॉक्टर की पर्ची की जरूरत नहीं पड़ती, बल्कि श्रद्धा और एक छोटी सी रस्म से ही शरीर के सारे मस्से खुद-ब-खुद साफ हो जाते हैं।
आइए जानते हैं देश के इन दो चमत्कारी मंदिरों, उनकी भौगोलिक स्थिति और उनके पीछे की पौराणिक मान्यताओं के बारे में:
1. मोके नड माता मंदिर, कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश)
हिमाचल प्रदेश के देवभूमि कांगड़ा जिले के रानीताल के पास स्थित है ‘मोके नड माता मंदिर’ (Moke Nad Mata Temple)। स्थानीय भाषा में मस्से को ‘मोका’ कहा जाता है, और इसी वजह से इस मंदिर का नाम भी मोके नड पड़ा है।
क्या है यहाँ की अनोखी मान्यता?
इस मंदिर के प्रांगण में एक विशेष पत्थर है, जिसे ‘मोके वाला पत्थर’ (Moke Stone) कहा जाता है। हैरान करने वाली बात यह है कि इस पत्थर की बनावट भी इंसानी शरीर पर निकलने वाले मस्सों जैसी ही खुरदरी है।
- नमक चढ़ाने की रस्म: मान्यता है कि यदि कोई व्यक्ति इस मंदिर में आकर उस पत्थर पर खड़ा नमक (साबुत नमक) चढ़ाता है, माता के सामने धूप-दीप जलाकर परिक्रमा करता है और अपने मस्से ठीक होने की मन्नत मांगता है, तो उसके शरीर के मस्से धीरे-धीरे सूखकर अपने आप गिर जाते हैं।
- मन्नत पूरी होने का नियम: भक्तों का विश्वास है कि जैसे-जैसे चढ़ाया हुआ नमक पानी या नमी से गलता है, वैसे-वैसे शरीर का मस्सा भी गलने लगता है। मन्नत पूरी होने के बाद श्रद्धालु दोबारा आकर माता को धन्यवाद स्वरूप भोग लगाते हैं।
2. कृष्ण कुब्जा मंदिर, मथुरा (उत्तर प्रदेश)
भगवान श्रीकृष्ण की नगरी मथुरा के परिक्रमा मार्ग पर स्थित ‘कृष्ण कुब्जा मंदिर’ (Krishna Kubja Temple) लगभग 500 साल पुराना है। यह पूरी दुनिया का इकलौता ऐसा मंदिर है, जहाँ भगवान श्रीकृष्ण के साथ देवी राधा की नहीं, बल्कि ‘कुब्जा’ की मूर्ति स्थापित है। यह मंदिर त्वचा संबंधी सभी रोगों और मस्सों को ठीक करने के लिए विख्यात है।
क्या है इसकी पौराणिक कथा?
भागवत पुराण के अनुसार, कुब्जा कंस की दासी थी, जो शारीरिक रूप से कुबड़ी थी और उसके शरीर पर त्वचा संबंधी विकार थे। वह कंस के लिए चंदन का लेप तैयार करती थी।
एक बार जब भगवान कृष्ण और बलराम मथुरा की गलियों से गुजर रहे थे, तो उनकी मुलाकात कुब्जा से हुई। कुब्जा ने श्रद्धापूर्वक वह सुगंधित चंदन कंस के बजाय श्रीकृष्ण को लगा दिया। कुब्जा के इस निश्छल प्रेम से प्रसन्न होकर श्रीकृष्ण ने उसके पैरों पर अपने पैर रखे और उसकी ठुड्डी को ऊपर की ओर उठाया। प्रभु के छूते ही कुब्जा का कुबड़ गायब हो गया और वह एक परम सुंदरी स्त्री में बदल गई।
यहाँ कैसे ठीक होते हैं त्वचा रोग?
माना जाता है कि यह मंदिर ठीक उसी स्थान पर बना है जहाँ यह लीला हुई थी। भक्तों की मान्यता है कि इस मंदिर में आकर भगवान कृष्ण और कुब्जा देवी के दर्शन करने और प्रार्थना करने से शरीर के मस्से, दाग-धब्बे और त्वचा से जुड़ी हर बीमारी दूर हो जाती है।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण और आस्था का मेल
चिकित्सा विज्ञान (Medical Science) के अनुसार, मस्से ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) के कारण होते हैं, जो कई बार शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) बढ़ने पर अपने आप भी ठीक हो जाते हैं। हालांकि, इन मंदिरों में आने वाले हजारों भक्तों का अटूट विश्वास और सदियों से चली आ रही परंपराएं विज्ञान के तर्कों से परे हैं। लोग दूर-दूर से यहाँ केवल इस उम्मीद और श्रद्धा के साथ आते हैं कि इन चौखटों पर पैर रखते ही उनकी काया निरोगी हो जाएगी।

