SCO क्या है? 10 देशों वाले संगठन का उद्देश्य, बिश्केक 2026 समिट में भारत की भूमिका और पहलगाम पर मिली जीत

SCO News. SCO यानी शंघाई सहयोग संगठन की स्थापना 15 जून 2001 को शंघाई में हुई थी, यह शंघाई फाइव (1996) का विस्तार है। इसका प्रकार म्यूचुअल सिक्योरिटी, पॉलिटिकल और इकोनॉमिक कोऑपरेशन है। मुख्यालय बीजिंग (सचिवालय) और ताशकंद (RATS) में है।

SCO का उद्देश्य

SCO का आधार “शंघाई भावना” — पारस्परिक विश्वास, पारस्परिक लाभ, समानता, परामर्श, सांस्कृतिक विविधता का सम्मान और साझा विकास है। चार्टर 2002 में सर्वसम्मति से निर्णय का सिद्धांत तय हुआ। मुख्य काम — तीन बुराइयों आतंकवाद, अलगाववाद, उग्रवाद से लड़ाई, क्षेत्रीय स्थिरता, व्यापार, ऊर्जा, परिवहन, शिक्षा, संस्कृति में सहयोग।

SCO में कितने देश हैं और उनकी स्थिति

वर्तमान में 10 पूर्ण सदस्य हैं — चीन, रूस, भारत, पाकिस्तान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान, ईरान (2023) और बेलारूस (2024)। इसके अलावा 2 पर्यवेक्षक देश अफगानिस्तान, मंगोलिया हैं। इनके अतिरिक्त 14-15 संवाद साझेदार के रूप में श्रीलंका, तुर्की, कंबोडिया, अजरबैजान, नेपाल, आर्मेनिया, मिस्र, कतर, सऊदी अरब, बहरीन, कुवैत, म्यांमार, मालदीव, UAE, लाओस शामिल हैं।

SCO 2026 में क्या हुआ

बिश्केक 2026 (26वां)  31 अगस्त – 1 सितंबर 2026 को बिश्केक, किर्गिस्तान में हुआ। इसके अध्यक्ष सदर जापारोव रहे। थीम “25 Years: Together for Sustainable Peace, Development and Prosperity”। बिश्केक में लाहौर को SCO पर्यटन-सांस्कृतिक राजधानी 2026-27 घोषित किया गया और अध्यक्षता पाकिस्तान को सौंपी गई।

SCO 2026 में भारत की स्थिति

पीएम मोदी ने समिट में भारत के 3 स्तंभ बताए — Security, Connectivity, Opportunity

  • सुरक्षा पर: “आतंकवाद के पूरे पारिस्थितिकी तंत्र — फाइनेंसिंग, भर्ती, कट्टरपंथ, सुरक्षित पनाहगाह — को ध्वस्त करना होगा” और “आतंकवाद कभी रणनीतिक संपत्ति नहीं हो सकता”।
  • पहलगाम हमला (22 अप्रैल 2025) पर: तियानजिन घोषणा में SCO ने हमले की कड़ी निंदा की और अपराधियों को न्याय के कटघरे में लाने की मांग की। इसे भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत माना जा रहा है। इससे पहले रक्षा मंत्रियों की बैठक में भारत ने पहलगाम का जिक्र न होने पर घोषणा पर हस्ताक्षर से इनकार कर दिया था।
  • कनेक्टिविटी: चाबहार पोर्ट और INSTC का समर्थन, लेकिन संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान के साथ यानी CPEC पर अप्रत्यक्ष आपत्ति।
  • द्विपक्षीय: शी जिनपिंग से मुलाकात में सीमा पर शांति को संबंधों की बीमा पॉलिसी बताया गया, ईरान के साथ चाबहार-जाहेदान रेलवे पर बातचीत।

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