इनसाइड स्टोरी : सोशल मीडिया से जंतर मंतर तक कैसे पहुंचा ‘आरक्षण हटाओ’ आंदोलन, हिरासत और सियासत

Reservation Hatao Andolan. राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली का जंतर-मंतर एक बार फिर बड़े विरोध प्रदर्शन का गवाह बना, जहां ‘रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन’ (RHA) के आह्वान पर देश के विभिन्न राज्यों (उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, हरियाणा आदि) से सैकड़ों युवा जमा हुए। जातिगत आरक्षण की मौजूदा व्यवस्था में आमूलचूल बदलाव और आर्थिक आधार पर सहायता की मांग को लेकर हुए इस प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी नोकझोंक हुई।

आंदोलन की शुरुआत और सोशल मीडिया से जुड़ाव

यह पूरा आंदोलन डिजिटल प्लेटफॉर्म, विशेषकर इंस्टाग्राम पेज ‘Reservation Hatao Andolan’ के जरिए संगठित हुआ। लाखों फॉलोअर्स वाले इस पेज ने पिछले कुछ महीनों से यूजीसी रोस्टर सिस्टम, एससी/एसटी एक्ट और जाति आधारित आरक्षण नीतियों की समीक्षा को लेकर डिजिटल अभियान चलाया था। इसके बाद 21 अगस्त को दिल्ली के जंतर-मंतर पर ‘भौतिक प्रदर्शन’ (Physical Protest) का आह्वान किया गया। इसके बाद 21 अगस्त की सुबह से ही वहां बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जुटना शुरू हुए थे।

  • इंस्टाग्राम पेज से शुरुआत: इस मूवमेंट का मुख्य केंद्र इंस्टाग्राम पर बना ‘Reservation Hatao Andolan’ (RHA) पेज था, जिसके 50 लाख से अधिक फॉलोअर्स जुड़ गए। इस पेज ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे सामान्य वर्ग के छात्रों और युवाओं के मुद्दों को उठाना शुरू किया।

  • ट्रेंडिंग मीम्स और रील्स रणनीति: इस पेज ने युवाओं को जोड़ने के लिए पूर्व में चर्चित रहे ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) अभियान की तर्ज पर डिजिटल लामबंदी (Crowd-pulling tactics) के तरीके अपनाए। इसके तहत रील्स, मीम्स, कट-ऑफ लिस्ट की तुलना और इन्फोग्राफिक्स के जरिए ‘मेरिट’ बनाम ‘जातिगत आरक्षण’ का नैरेटिव सेट किया गया।

  • UGC ड्राफ्ट और रोस्टर का विरोध: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के समानता संबंधी नए दिशानिर्देशों, रोस्टर प्रणाली और प्रतियोगी परीक्षाओं के कट-ऑफ अंतर पर वीडियो बनाकर युवाओं के बीच व्यापक असंतोष पैदा किया गया।

  • व्हाट्सएप और टेलीग्राम कम्युनिटीज: इंस्टाग्राम से ट्रैफिक को टेलीग्राम और व्हाट्सएप ग्रुप्स में डायवर्ट किया गया, जहां राज्यवार (UP, बिहार, राजस्थान, MP, हरियाणा) टीमें बनाई गईं।

  • ’21 अगस्त दिल्ली चलो’ का आह्वान: सोशल मीडिया पर लगातार कैंपेन चलाकर 21 अगस्त की तारीख तय की गई और फॉलोअर्स से जंतर-मंतर पर जुटने की अपील की गई। इसके लिए कई छोटे-बड़े यूट्यूबर्स और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स ने भी समर्थन वाले वीडियो पोस्ट किए, जिससे यह डिजिटल अपील सीधे जमीनी विरोध में बदल गई।

अब तक क्या-क्या हुआ?

  • अनुमति को लेकर टकराव: दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के मद्देनजर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। हालांकि, मध्य जिला पुलिस प्रशासन ने रामलीला मैदान में अधिकतम 500 लोगों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) जारी किया था।

  • जंतर-मंतर पर जुटी भीड़: पुलिस के निर्देश और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 (पूर्व में धारा 144) लागू होने के बावजूद प्रदर्शनकारी सुबह से ही जंतर-मंतर पर जुटने लगे।

  • पुलिस एक्शन व हिरासत: दोपहर होते-होते जब भीड़ ने वहां से हटने से इनकार कर दिया, तो दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों (RAF) ने मोर्चा संभाला और 50 से अधिक प्रमुख आंदोलनकारियों व प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर बसों में बैठाकर मौके से हटाया।

  • इंटरनेट जैमिंग का आरोप: कुछ प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि भीड़ को लाइव स्ट्रीमिंग और सोशल मीडिया अपडेट से रोकने के लिए इलाके में इंटरनेट जैमर्स का इस्तेमाल किया गया, हालांकि पुलिस ने इसे सुरक्षा प्रोटोकॉल का हिस्सा बताया।

प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें

  • आर्थिक आधार पर सहायता: जाति के बजाय आर्थिक स्थिति, दिव्यांगता या पारिवारिक पृष्ठभूमि को सरकारी योजनाओं और शिक्षा का आधार बनाया जाए।

  • क्रीमी लेयर का दायरा: आरक्षित वर्गों में क्रीमी लेयर के प्रावधानों को सख्ती से लागू किया जाए ताकि लाभ अंतिम पंक्ति के जरूरतमंद तक पहुंचे।

  • ‘एक परिवार, एक बार आरक्षण’: सरकारी सेवाओं में एक परिवार को केवल एक बार आरक्षण का लाभ देने का नियम बने।

  • यूजीसी रोस्टर व एक्ट की समीक्षा: उच्च शिक्षण संस्थानों में यूजीसी रोस्टर प्रणाली और एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम के दुरुपयोग को रोकने के लिए समीक्षा की मांग।

कौन आगे रहा और किसका क्या रुख रहा?

  • डटे हुए संगठन व चेहरे: अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के प्रतिनिधि, सामान्य वर्ग के छात्र संगठन और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स व एक्टिविस्ट्स (जैसे अजीत भारती आदि) इस आंदोलन की मांगों के समर्थन में आगे रहे।

  • रणनीतिक बदलाव: पुलिस कार्रवाई और हिरासत के बाद आयोजकों ने सीधे टकराव से बचते हुए अपने आंदोलन को फिलहाल डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और कानूनी ज्ञापनों के जरिए आगे बढ़ाने की बात कही है।

पुलिस और प्रशासन का रुख

दिल्ली पुलिस के अनुसार, नई दिल्ली का इलाका अति-सुरक्षित क्षेत्र (High-Security Zone) है, जहां बिना पूर्व अनुमति किसी भी धरने या मार्च की इजाजत नहीं दी जा सकती। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए रामलीला मैदान का विकल्प दिया गया था। नियम तोड़ने और निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।