भारत ही नहीं, दुनिया के इन देशों में भी जगमगाती है दीवाली! जानिए, समंदर पार कैसे मनाया जाता है यह उत्सव

Diwali Around World. जब भी दीपावली का नाम आता है, हमारे जेहन में दीयों की कतारें, आसमान में फूटते पटाखे, मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा और हवा में घुली मिठाइयों की मिठास तैर जाती है। भारत में तो यह पर्व हर घर का सबसे बड़ा उत्सव है ही, लेकिन क्या आप जानते हैं कि रोशनी का यह जादुई त्योहार सिर्फ भारत तक ही सीमित नहीं है? समंदर पार, सात समंदर पार भी कई ऐसे देश हैं जहां दीपावली या उसके जैसी ही सांस्कृतिक परंपराओं वाले भव्य पर्व मनाए जाते हैं।

आइए, आज आपको ले चलते हैं एक ऐसे सुहाने सफर पर, जहां हम जानेंगे कि भारत के अलावा किन देशों में यह पर्व मनाया जाता है और वहां ऐसा उत्सव मनाने की मुख्य वजहें क्या हैं।

1. नेपाल: जहाँ दीवाली को कहा जाता है ‘तिहार’ और होती है हर जीव की पूजा

भारत के ठीक पड़ोसी देश नेपाल में दीपावली को ‘तिहार’ (Tihar) या ‘यमपंचक’ के रूप में मनाया जाता है। नेपाल में यह त्योहार पांच दिनों तक चलता है, जो भारत की दीवाली से काफी मिलता-जुलता है।

  • मनाने की वजह: नेपाल में इस पांच दिवसीय उत्सव का धार्मिक महत्व बेहद अनोखा है। यहां पहले दिन कौओं की, दूसरे दिन कुत्तों की (जो यमराज के दूत माने जाते हैं), तीसरे दिन गाय की और चौथे दिन बैलों की पूजा की जाती है। पांचवें दिन ‘भाई टीका’ मनाया जाता है, जो भाई-बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक है। मान्यता है कि इस दिन यमराज अपनी बहन यमुना के घर गए थे, इसलिए बहनें अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर उनकी लंबी उम्र की कामना करती हैं। यहां घरों को फूलों और दीयों से सजाया जाता है।

2. इंडोनेशिया (बाली): ‘गेमपंगन’ और फसल उत्सव की खुशियां

इंडोनेशिया का खूबसूरत द्वीप बाली (Bali) अपनी गहरी हिंदू सांस्कृतिक जड़ों के लिए जाना जाता है। हालांकि इसे सीधे तौर पर ‘दीवाली’ नहीं कहा जाता, लेकिन यहां एक ऐसा ही भव्य प्रकाश और पर्व उत्सव मनाया जाता है जिसे ‘गेमपंगन’ (Galungan) या स्थानीय भाषा में दीपों से जुड़ा उत्सव माना जाता है।

  • मनाने की वजह: बाली के हिंदू धर्म के अनुसार, ‘गेमपंगन’ वह समय होता है जब देवी-देवता और पूर्वजों की आत्माएं धरती पर अपने परिवारों से मिलने आती हैं। इस दौरान पूरे द्वीप को खूबसूरत बांस के खंभों (Penjor) और दीयों से सजाया जाता है। प्रकाश और उल्लास का यह पर्व बुराई पर अच्छाई (धर्म की अधर्म पर जीत) की विजय का प्रतीक है, जो ठीक वैसी ही भावना को दर्शाता है जैसी भारत में दीवाली की होती है।

3. मॉरीशस: दीवाली का उत्साह भारत जैसा

हिंद महासागर में स्थित मॉरीशस (Mauritius) एक ऐसा देश है जहां भारतीय मूल के लोगों की आबादी एक बड़ा हिस्सा है। यहां दीपावली का त्योहार राष्ट्रीय स्तर पर बहुत धूमधाम से मनाया जाता है और इस दिन सार्वजनिक अवकाश (Public Holiday) रहता है।

  • मनाने की वजह: मॉरीशस में बसे भारतीय अपने साथ अपनी संस्कृति, संस्कारों और त्योहारों की थाती लेकर पहुंचे थे। यहां मान्यता है कि भगवान राम के अयोध्या लौटने और बुराई पर अच्छाई की विजय की याद में यह पर्व मनाया जाता है। मॉरीशस में इस दिन हर घर, सड़क और दुकान को रंग-बिरंगी लाइटों और दीयों से सजाया जाता है, और सभी धर्मों के लोग एक-दूसरे को मिठाइयां बांटकर इस रोशनी के पर्व का जश्न मनाते हैं।

4. त्रिनिडाड और टोबैगो, गयाना तथा सूरीनाम: कैरिबियन द्वीपों में गूंजती है दीवाली

दक्षिण अमेरिका और कैरिबियन सागर के पास स्थित देश जैसे त्रिनिडाड और टोबैगो, गयाना और सूरीनाम में दीवाली किसी महाउत्सव से कम नहीं होती। इन देशों में भारतीय प्रवासियों (जो गिरमिटिया मजदूर के रूप में वहां गए थे) ने अपनी संस्कृति को आज भी जीवंत रखा है।

  • मनाने की वजह: इन देशों में दीवाली मनाने के पीछे मुख्य वजह भगवान राम की 14 साल के वनवास के बाद अयोध्या वापसी की ऐतिहासिक कथा है। त्रिनिडाड में तो दीवाली को राष्ट्रीय सांस्कृतिक उत्सव का दर्जा प्राप्त है। यहां “दीवाली नगर” (Diwali Nagar) बसाया जाता है, जहां सांस्कृतिक कार्यक्रम, पारंपरिक संगीत, दीये जलाना और मां लक्ष्मी की आराधना मुख्य आकर्षण होते हैं। स्थानीय लोग दीयों से ‘ओम’ और ‘स्वास्तिक’ जैसे पवित्र चिह्न बनाते हैं।

छत्तीसगढ़ के युवाओं के लिए दिवाली से पहले बंपर तोहफा: विभिन्न विभागों में 1,703 पदों पर बंपर भर्ती, जानें पूरी डिटेल

क्यों मनाई जाती है ऐसी रोशनी की परंपराएं?

यदि गहराई से सोचें, तो दुनिया के इन तमाम देशों में इस तरह के प्रकाश पर्व मनाने के पीछे कुछ सार्वभौमिक (Universal) कारण छिपे हैं:

  1. अंधकार से प्रकाश की ओर यात्रा: मानव सभ्यता की शुरुआत से ही अंधेरा डर और अज्ञानता का प्रतीक रहा है, जबकि प्रकाश ज्ञान, उम्मीद और सकारात्मकता का।

  2. ऋतु परिवर्तन और फसल कटाई: कई देशों में यह समय नई फसल के आने और मौसम के बदलने का होता है, जिससे किसानों और आम जनजीवन में खुशी की लहर दौड़ जाती है।

  3. सांस्कृतिक जुड़ाव और पहचान: प्रवासियों के लिए अपने मूल देश की परंपराओं को सहेज कर रखना अपने इतिहास से जुड़े रहने का सबसे खूबसूरत जरिया है।

संक्षेप में कहें तो, चाहे नाम ‘दीवाली’ हो या ‘तिहार’ या फिर कोई अन्य प्रकाश उत्सव—इन सबका मकसद एक ही है: दिलों के अंधेरे को मिटाना, आपसी दूरियों को कम करना और मानवता के मार्ग को रोशन करना।

प्लेट में मिट्टी की रोटी और पत्तों का सूप: दुनिया के 10 सबसे गरीब देशों की रूह कंपा देने वाली दास्तान

इन्हें भी पढ़े