भारतीय राजनीति के ‘महारथी’: सबसे लंबे और सबसे कम समय तक सांसद-विधायक रहने वाले नेताओं का रिकॉर्ड
Longest Serving MP and MLA. भारतीय लोकतंत्र का चुनावी इतिहास कई रोचक और ऐतिहासिक रिकॉर्ड्स से भरा पड़ा है। कुछ नेताओं ने जनता के दिलों पर दशकों तक राज किया और सदन में अपनी स्थायी जगह बनाई, तो कुछ का कार्यकाल इतना छोटा रहा कि वह एक तकनीकी रिकॉर्ड बन गया। देश में सबसे लंबे समय तक सांसद और विधायक रहने का गौरव कुछ चुनिंदा नेताओं को ही प्राप्त है।
भारत में सबसे लंबे समय तक सांसद रहने वाले नेता
कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (CPI) के दिग्गज नेता इंद्रजीत गुप्ता के नाम भारत में सबसे लंबे समय तक सांसद (लोकसभा सदस्य) रहने का रिकॉर्ड दर्ज है। वे 1960 से 2001 तक (1977-1980 की एक छोटी अवधि को छोड़कर) लगातार 11 बार लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंचे थे। उन्होंने लोकसभा में लगभग 36 साल तक अपनी सेवाएं दीं।
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संसदीय क्षेत्र: उन्होंने पश्चिम बंगाल की अलग-अलग सीटों से चुनाव लड़ा, जिनमें कलकत्ता साउथ वेस्ट (अब समाप्त), अलीपुर, बशीरहाट और मिदनापुर शामिल हैं। मिदनापुर लोकसभा सीट से वे सबसे ज्यादा समय तक सांसद रहे।
भारत में सबसे लंबे समय तक विधायक रहने वाले नेता
महाराष्ट्र की राजनीति के कद्दावर नेता गणपतराव देशमुख (शेतकरी कामगार पक्ष – PWP) के नाम देश में सबसे लंबे समय तक विधायक रहने का ऐतिहासिक रिकॉर्ड है। उन्होंने रिकॉर्ड 11 बार विधानसभा चुनाव जीता और महाराष्ट्र विधानसभा में 54 वर्षों तक अपने क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। साल 2019 में उम्र के चलते उन्होंने चुनाव न लड़ने का फैसला किया था।
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विधानसभा क्षेत्र: गणपतराव देशमुख ने महाराष्ट्र के सोलापुर जिले की सांगोला (Sangola) विधानसभा सीट से यह रिकॉर्ड बनाया। 1962 में पहली बार जीतने के बाद, 1972 और 1995 को छोड़कर वे हर चुनाव जीते।
इनके अलावा, गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री प्रतापसिंह राणे का नाम भी सबसे लंबे समय तक विधायक रहने वाले नेताओं में शुमार है, जिन्होंने अपनी पोरियम (Poriem) विधानसभा सीट से लगातार 50 साल (1972 से 2022) तक जीत दर्ज की।
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सबसे कम समय तक सांसद और विधायक रहने का तकनीकी रिकॉर्ड
अगर सबसे कम समय तक विधायक या सांसद रहने की बात की जाए, तो इसका कोई एक स्थायी नाम नहीं है क्योंकि यह एक संवैधानिक तकनीकी नियम से जुड़ा है। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के अनुसार, जब कोई नेता एक साथ दो सीटों (चाहे दो लोकसभा सीट हों या एक लोकसभा और एक विधानसभा सीट) से चुनाव जीतता है, तो उसे 14 दिनों के भीतर किसी एक सीट से इस्तीफा देना पड़ता है।
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कुछ दिनों के सांसद/विधायक: कई बड़े नेता (जैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 में वडोदरा सीट से, या राहुल गांधी ने 2024 में वायनाड सीट से) दो सीटों से जीतने के बाद चंद दिनों (10 से 14 दिन) में ही अपनी एक सीट छोड़ देते हैं। ऐसे मामलों में उस विशेष सीट के लिए उनका कार्यकाल मात्र कुछ दिनों का माना जाता है। इसी तरह जब कोई सांसद राज्य का मुख्यमंत्री बनता है (जैसे उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ या हरियाणा में नायब सिंह सैनी), तो वे शपथ ग्रहण के तुरंत बाद अपनी पुरानी सदस्यता से चंद दिनों में इस्तीफा दे देते हैं।
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सबसे छोटी लोकसभा: पूर्ण सदनों के कार्यकाल के लिहाज से देखें तो, 1998 में गठित 12वीं लोकसभा देश के इतिहास की सबसे छोटी लोकसभा थी। यह मात्र 13 महीने चली थी। ऐसे में उस दौरान पहली बार जीतकर आए और दोबारा कभी नहीं जीतने वाले नेताओं का सांसद के तौर पर पूर्ण कार्यकाल सिर्फ 13 महीने का ही रहा था।

