Diwali Shopping Trends: दीपावली पर भारत में बिकती हैं ये टॉप 10 चीजें, सामान्य से कई गुना बिक्री; जानें पूरी रिपोर्ट
Top 10 Diwali Shopping Items. भारत में दीपावली केवल दीपों का पर्व नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा महाकुंभ है। इस दौरान बाजारों में जिस पैमाने पर धन की आवक होती है, वह दुनिया के कई देशों के कुल बजट से भी ज्यादा होता है। व्यापारियों के राष्ट्रीय संगठन (CAIT) और विभिन्न बाजार विश्लेषण रिपोर्टों के अनुसार, त्योहारी सीजन में भारत का कुल व्यापार 6 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर चुका है।
सवाल यह है कि इस रिकॉर्ड तोड़ खरीदारी में सबसे ज्यादा क्या बिकता है और सामान्य दिनों की तुलना में इनकी बिक्री में कितना उछाल आता है? आइए, आंकड़ों के आईने में देखते हैं दीपावली पर खरीदी जाने वाली टॉप 10 चीजें और उनकी बिक्री का पूरा लेखा-जोखा:
भारत में दीपावली पर बिकने वाली टॉप 10 चीजें
1. सोना और आभूषण (Gold & Jewellery)
-
हिस्सा: कुल त्योहारी कारोबार का लगभग 10%।
-
बिक्री की स्थिति: धनतेरस और दीपावली के पावन अवसर पर सोने-चांदी के सिक्के, आभूषण और हल्के डायमंड ज्वैलरी की मांग अपने चरम पर होती है।
-
तुलना: सामान्य दिनों की तुलना में इस अवधि के दौरान सोने-चांदी और आभूषणों की बिक्री में 300% से 400% (यानी 3 से 4 गुना) तक की भारी तेजी दर्ज की जाती है।
2. ग्रॉसरी, एफएमसीजी और रोजमर्रा का सामान (Grocery & FMCG)
-
हिस्सा: कुल कारोबार का 12%।
-
बिक्री की स्थिति: त्योहारों के मद्देनजर घरों की साफ-सफाई, मेहमानवाजी और विशेष पकवानों के लिए खाद्य सामग्री, तेल, मसाले और पैकबंद खाद्य पदार्थों की मांग सबसे अधिक होती है।
-
तुलना: सामान्य महीनों की तुलना में ग्रॉसरी और पैकेज्ड फूड्स की खपत में 40% से 50% की बढ़ोतरी होती है।
3. इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिकल उपकरण (Electronics & Electricals)
-
हिस्सा: कुल कारोबार का 8%।
-
बिक्री की स्थिति: स्मार्टफोन्स, स्मार्ट टीवी, लैपटॉप, होम थिएटर और आधुनिक गैजेट्स इस सूची में सबसे आगे हैं। लोग नए साल और शुभ अवसरों पर बड़े इलेक्ट्रॉनिक आइटम्स घर लाना पसंद करते हैं।
-
तुलना: सामान्य दिनों के मुकाबले इलेक्ट्रॉनिक्स की बिक्री में 2.5 से 3 गुना तक की जबरदस्त छलांग देखने को मिलती है।
4. कंज्यूमर ड्यूरेबल्स / घरेलू उपकरण (Consumer Durables)
-
हिस्सा: कुल कारोबार का 7%।
-
बिक्री की स्थिति: रेफ्रिजरेटर, वॉशिंग मशीन, माइक्रोवेव, एयर प्यूरीफायर और किचन अप्लायंसेज (जैसे एयर फ्रायर और मिक्सी) की जमकर खरीदारी होती है।
-
तुलना: सामान्य महीनों के औसत व्यापार की तुलना में इनकी बिक्री 200% तक बढ़ जाती है।
5. रेडिमेड कपड़े और एथनिक वेयर (Ready-made Garments)
-
हिस्सा: कुल कारोबार का 7%।
-
बिक्री की स्थिति: दीपावली पर नए कपड़े पहनने की प्राचीन परंपरा के चलते सिल्क की साड़ियां, डिजाइनर कुर्ते-पायजामा, लहंगे और बच्चों के परिधान सबसे ज्यादा बिकते हैं।
-
तुलना: सामान्य दिनों की तुलना में कपड़ों के बाजार में 350% से 500% (5 गुना तक) की वृद्धि दर्ज की जाती है। ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों ही माध्यमों पर यह सबसे तेजी से बिकने वाला सेगमेंट है।
6. गिफ्ट आइटम्स और कॉर्पोरेट हैंपर्स (Gift Items & Hampers)
-
हिस्सा: कुल कारोबार का 7%।
-
बिक्री की स्थिति: एक-दूसरे को शुभकामनाएं देने के लिए कॉर्पोरेट गिफ्ट बॉक्स, चॉकलेट पैक, कस्टमाइज्ड गिफ्ट्स और सुंदर सजावटी बक्से बड़े पैमाने पर खरीदे जाते हैं।
-
तुलना: सामान्य दिनों में यह सेक्टर सीमित रहता है, लेकिन अक्टूबर-नवंबर के त्योहारी महीनों में इसकी बिक्री सामान्य से 5 से 6 गुना अधिक हो जाती है।
7. घरेलू सजावट और लाइटें (Home Décor & Lighting)
-
हिस्सा: कुल कारोबार का 5%।
-
बिक्री की स्थिति: घरों को रोशन करने के लिए चाइनीज और भारतीय एलईडी लड़ियां, स्मार्ट लाइट्स, डिजाइनर दीये, कैंडल और वॉल-हैंडिंग्स की मांग आसमान छूती है।
-
तुलना: सामान्य महीनों की तुलना में सजावटी सामानों और लाइटों की बिक्री में 600% से 800% (6 से 8 गुना) तक का ऐतिहासिक उछाल आता है, क्योंकि सालभर में इनकी मुख्य मांग यहीं केंद्रित होती है।
8. फर्निशिंग और फर्नीचर (Furnishing & Furniture)
-
हिस्सा: कुल कारोबार का 5%।
-
बिक्री की स्थिति: दीपावली से पहले घरों के नवीनीकरण (Renovation) के तहत नई बेडशीट, परदे, सोफा कवर, कुशन और छोटे फर्नीचर खरीदे जाते हैं।
-
तुलना: सामान्य दिनों की तुलना में होम फर्निशिंग की बिक्री में 80% से 100% की वृद्धि होती है।
9. मिठाइयाँ, नमकीन और सूखे मेवे (Sweets, Namkeen & Dry Fruits)
-
हिस्सा: कुल कारोबार का 8% (मिठाई-नमकीन 5% और ड्राई फ्रूट्स 3%)।
-
बिक्री की स्थिति: पारंपरिक मिठाइयां, काजू, बादाम, किशमिश और अंजीर के पैकेटों का आदान-प्रदान इस त्योहार की पहचान है।
-
तुलना: सामान्य दिनों की तुलना में कन्फेक्शनरी और ड्राई फ्रूट्स का यह कारोबार 4 से 5 गुना बढ़ जाता है।
10. पूजा सामग्री और दीये (Pooja Articles & Earthen Diyas)
-
हिस्सा: कुल कारोबार का 3%।
-
बिक्री की स्थिति: मिट्टी के पारंपरिक दीये, धूपबत्ती, अगरबत्ती, पूजा की थालियां, और लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां हर घर की जरूरत होती हैं। इस सेगमेंट में ‘वोकल फॉर लोकल’ का सबसे ज्यादा असर दिखता है, जिससे कुम्हारों और स्थानीय कारीगरों को करोड़ों का कारोबार मिलता है।
-
तुलना: सालभर के अन्य महीनों की तुलना में इन पारंपरिक वस्तुओं की बिक्री में 10 गुना तक की भारी बढ़ोतरी दर्ज की जाती है।
दीयों की लौ के साथ जगमगा उठती है देश की तिजोरी: सोने से लेकर सोटे तक, जानिए कैसा होता है दीपावली का बाजार
ये आंकड़े तुक्का नहीं, हकीकत हैं
ये आंकड़े मुख्य रूप से व्यापारिक संगठनों के राष्ट्रीय सर्वेक्षण, खुदरा बाजार के रुझानों और त्योहारी सीजन के आर्थिक विश्लेषण पर आधारित होते हैं। इन्हें तैयार करने और आंकने के मुख्य आधार निम्नलिखित हैं:
-
CAIT (Confederation of All India Traders – क्रेड) के आंकड़े: भारत के व्यापारियों के सबसे बड़े संगठन ‘कैट’ (CAIT) द्वारा हर साल धनतेरस और दीपावली के दौरान पूरे देश में हुए थोक और खुदरा व्यापार का विस्तृत आकलन जारी किया जाता है। इसमें दिल्ली, मुंबई, नागपुर, कोलकाता, बेंगलुरु और रायपुर जैसे प्रमुख व्यावसायिक केंद्रों के व्यापारिक आंकड़े शामिल होते हैं।
-
FMCG और खुदरा संघों की बाजार रिपोर्ट्स (Retail Association Reports): फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (FICCI), एसोचैम (ASSOCHAM) और विभिन्न खुदरा संघों (Retail Associations) द्वारा त्योहारी सीजन (अक्टूबर-नवंबर) के दौरान उपभोक्ता खर्च (Consumer Spending) पर सर्वे किए जाते हैं।
-
ज्वेलरी और ऑटोमोबाइल एसोसिएशन के आंकड़े: सोने-चांदी की बिक्री के आंकड़े ‘ऑल इंडिया जेम एंड ज्वेलरी डोमेस्टिक काउंसिल’ (GJC) और सराफा एसोसिएशन के त्योहारी कारोबार के अनुमानों पर आधारित होते हैं।
-
डिजिटल पेमेंट और बैंकिंग ट्रांजैक्शन (UPI & Bank Data): दीपावली के समय हर साल UPI ट्रांजैक्शन, क्रेडिट/डेबिट कार्ड स्वाइप और बैंकों द्वारा जारी किए जाने वाले त्योहारी ऋण (Festive Loans) के आंकड़े अर्थव्यवस्था में नकदी के प्रवाह (Cash Flow) की गवाही देते हैं, जिन्हें आधार बनाया जाता है।
-
ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स के फेस्टिव सेल्स ट्रेंड्स: फ्लिपकार्ट, अमेज़न और अन्य ई-कॉमर्स कंपनियों की ‘दिवाली फेस्टिव सेल्स’ के पहले और दूसरे हफ्ते के ग्रॉस मर्चेंडाइज वैल्यू (GMV) के रुझान भी इन आंकड़ों को तय करने में बड़ी भूमिका निभाते हैं।
संक्षेप में कहें तो, ये आंकड़े किसी एक दिन की तुक्का आधारित गणना नहीं, बल्कि व्यापारिक संगठनों, बाजार विश्लेषकों और वित्तीय संस्थानों द्वारा हर साल त्योहारी सीजन के अंत में जारी किए जाने वाले आधिकारिक व्यापारिक अनुमानों (Trade Estimates) पर आधारित होते हैं।

