रोजगार के मोर्चे पर कौन सा राज्य आगे और कौन फिसड्डी? रिपोर्ट में सामने आई देश के राज्यों की असली तस्वीर
Top States For Employment. देश में रोजगार और आजीविका हमेशा से एक बड़ा और संवेदनशील मुद्दा रहा है। अक्सर यह सवाल उठता है कि काम मिलने और युवाओं को रोजगार मुहैया कराने के मामले में देश का कौन सा राज्य सबसे बेहतर स्थिति में है और किन राज्यों में रोजगार का संकट सबसे गहरा है।
केंद्र सरकार के आधिकारिक श्रम सर्वेक्षणों के अनुसार, रोजगार की स्थिति को बेरोजगारी दर (Unemployment Rate) के जरिए मापा जाता है। जिस राज्य में बेरोजगारी दर जितनी कम होती है, वहां रोजगार के अवसर उतने ही बेहतर माने जाते हैं।
रोजगार देने में सबसे आगे: देश के ‘टॉप 10’ राज्य और केंद्र शासित प्रदेश
कम बेरोजगारी दर के मामले में मध्य प्रदेश, गुजरात और झारखंड देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हैं। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सक्रियता, कृषि आधारित काम, एमएसएमई (MSME) सेक्टर और विनिर्माण (Manufacturing) इकाइयों के चलते इन राज्यों में कार्यबल की भागीदारी अधिक है।
| रैंक | राज्य / केंद्र शासित प्रदेश | युवा बेरोजगारी दर (15–29 वर्ष) | मुख्य कारण |
| 1 | मध्य प्रदेश | 2.6% | कृषि व संबंधित क्षेत्र, स्वरोजगार और स्थानीय कुटीर उद्योग |
| 2 | गुजरात | 3.1% | मजबूत औद्योगिक ढांचा, विनिर्माण इकाइयां और कारोबारी माहौल |
| 3 | झारखंड | 3.6% | खनन, प्राथमिक क्षेत्र और असंगठित निर्माण कार्य |
| 4 | दिल्ली | 4.6% | विशाल सेवा क्षेत्र (सर्विसेज), लॉजिस्टिक्स और ई-कॉमर्स जॉब्स |
| 5 | छत्तीसगढ़ | 6.3% | कृषि, वनोपज आधारित रोजगार और स्थानीय कार्यबल |
| 6 | दादरा एवं नगर हवेली | 6.6% | औद्योगिक क्लस्टर और विनिर्माण इकाइयां |
| 7 | त्रिपुरा | 6.8% | सेवा व कृषि क्षेत्र में सक्रिय भागीदारी |
| 8 | सिक्किम | 7.7% | पर्यटन, फार्मास्यूटिकल उद्योग और सेवा क्षेत्र |
| 9 | पश्चिम बंगाल | 9.0% | सूक्ष्म एवं लघु उद्योग, चमड़ा व कपड़ा उद्योग और स्वरोजगार |
| 10 | उत्तर प्रदेश | 9.8% | एमएसएमई, निर्माण क्षेत्र, बुनियादी ढांचा परियोजनाएं और कृषि |
(नोट: कुल आबादी यानी 15 वर्ष से अधिक के सामान्य कार्यबल में भी गुजरात (1.7%), मध्य प्रदेश (1.6%), झारखंड (1.7%) और असम (1.7%) की कुल बेरोजगारी दर राष्ट्रीय औसत 3.2% से काफी नीचे दर्ज की गई है।)
रोजगार के मोर्चे पर फिसड्डी: सबसे अधिक बेरोजगारी वाले ‘टॉप 10’ राज्य और UTs
उच्च साक्षरता वाले और कुछ पहाड़ी तथा द्वीप क्षेत्रों में बेरोजगारी दर देश के औसत से कई गुना अधिक है। इसका बड़ा कारण यह है कि यहां उच्च शिक्षित युवाओं की संख्या तो अधिक है, लेकिन उनकी योग्यता के अनुरूप पर्याप्त फॉर्मल (औपचारिक/व्हाइट कॉलर) नौकरियां और औद्योगिक इकाइयां उपलब्ध नहीं हैं।
| रैंक | राज्य / केंद्र शासित प्रदेश | युवा बेरोजगारी दर (15–29 वर्ष) | मुख्य कारण |
| 1 | लक्षद्वीप | 36.2% | सीमित भौगोलिक विस्तार, सीमित निजी उद्योग और सरकारी नौकरियों पर निर्भरता |
| 2 | अंडमान एवं निकोबार | 33.6% | मुख्य भूमि से दूरी, औद्योगिक विकास की कमी |
| 3 | केरल | 29.9% | उच्च शिक्षा स्तर, योग्यताओं के अनुकूल औपचारिक नौकरियों की भारी कमी |
| 4 | नागालैंड | 27.4% | औद्योगिक पिछड़ेपन और निजी क्षेत्र के सीमित अवसर |
| 5 | मणिपुर | 22.9% | स्थानीय अस्थिरता, कनेक्टिविटी चुनौतियां और उद्योगों की कमी |
| 6 | लद्दाख | 22.2% | मौसमी रोजगार (सर्दियों में काम बंद), पर्यटन पर अत्यधिक निर्भरता |
| 7 | अरुणाचल प्रदेश | 20.9% | अवसंरचना संबंधी चुनौतियां और सीमित निजी निवेश |
| 8 | गोवा | 19.1% | पर्यटन पर अति-निर्भरता और स्थानीय युवाओं में सरकारी/सैलरीड नौकरियों की चाह |
| 9 | पंजाब | 18.8% | कृषि से विमुखता, विनिर्माण का ठहराव और स्किल-मिसमैच |
| 10 | आंध्र प्रदेश | 17.5% | आईटी व सर्विसेज का सीमित शहरों तक केंद्रित होना, नए उद्योगों की जरूरत |
(बड़े राज्यों में कुल आबादी के पैमाने पर भी केरल, गोवा, पंजाब और हरियाणा में राष्ट्रीय औसत (3.2%) से अधिक बेरोजगारी दर्ज की गई है।)
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आंकड़ों का स्रोत
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प्राथमिक स्रोत: सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI), भारत सरकार के अंतर्गत राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा जारी आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (Periodic Labour Force Survey – PLFS) वार्षिक रिपोर्ट।
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संदर्भ अवधि: जुलाई 2023 से जून 2024 / 2024 वार्षिक रिपोर्टिंग चक्र (15-29 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं और 15 वर्ष व उससे अधिक के कार्यबल के सामान्य स्थिति ‘Usual Status’ संकेतक)।
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संसदीय संदर्भ: श्रम एवं रोजगार मंत्रालय द्वारा लोकसभा में प्रस्तुत लिखित उत्तर (PIB प्रविष्टि)।

