प्लेट में मिट्टी की रोटी और पत्तों का सूप: दुनिया के 10 सबसे गरीब देशों की रूह कंपा देने वाली दास्तान

Extreme Poor Country. 21वीं सदी में जब दुनिया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, अंतरिक्ष पर्यटन और खरबों डॉलर की अर्थव्यवस्थाओं का जश्न मना रही है, ठीक उसी वक्त इसी धरती पर ऐसे मुल्क भी हैं जहां इंसान की पूरी जिंदगी सिर्फ एक निवाले की जद्दोजहद में बीत जाती है।

संयुक्त राष्ट्र (UN), विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के आंकड़ों के मुताबिक, दुनिया के सबसे गरीब देशों में भुखमरी और गरीबी ऐसी इंतिहां पर पहुंच चुकी है, जहां भूख मिटाने के लिए भोजन नहीं बल्कि वह सब कुछ निगलना पड़ता है जो पेट की आग को थोड़ी देर के लिए शांत कर सके।

पेट भरने के लिए क्या खा रहे हैं लोग?

इन मुल्कों में सामान्य दाल, चावल, दूध या फल विलासिता हैं। लोग जीवित रहने के लिए ऐसी चीजों पर निर्भर हैं जिनकी सामान्य दुनिया कल्पना भी नहीं कर सकती:

  • मिट्टी और नमक की रोटी (हैती): कैरेबियाई देश हैती की बस्तियों में लोग पीली मिट्टी (Mud Cakes), थोड़ा सा वनस्पति तेल और नमक मिलाकर धूप में सुखाकर रोटियां बनाते हैं, जिसे स्थानीय भाषा में ‘पिका’ या ‘क्ले कुकीज’ कहा जाता है। यह शरीर को कोई पोषण नहीं देता, केवल भूख से ऐंठते पेट को भारी रखने के लिए खाया जाता है।

  • पेड़ों की छाल, पत्तियां और घास का उबला सूप (दक्षिण सूडान और सोमालिया): युद्ध और सूखे के समय जब राशन खत्म हो जाता है, तो परिवार जंगलों से जंगली जहरीली घास, कड़वे पत्ते और पेड़ों की छाल उबालकर पीते हैं ताकि शरीर को कुछ घंटों की ऊर्जा मिल सके।

  • जहरीली जंगली जड़ें (मेडागास्कर): जलवायु परिवर्तन और लगातार सूखे की मार झेल रहे दक्षिणी मेडागास्कर में लोग जहरीले कैक्टस के फल, लाल इमली को कीचड़ में मिलाकर और कड़वी जंगली कंद-मूल (जड़ों) को घंटों उबालकर उसका जहर कम करने के बाद खाने को मजबूर हैं।

  • पशुओं का चारा और चोकर (यमन और सूडान): युद्धग्रस्त इलाकों में जब गेहूं का आटा नहीं मिलता, तो जानवर के लिए बचा सूखा चोकर और सड़ा हुआ अनाज पीसकर रोटियां पकाई जाती हैं।

  • कसावा का मांड और पानी (मध्य अफ्रीकी गणराज्य व कांगो): प्रोटीन या फैट के अभाव में केवल उबले हुए कसावा (कंद) की लुगदी पर पूरा परिवार महीनों गुजार देता है।

दुनिया के 10 सबसे गरीब देश

(स्रोत: IMF और विश्व बैंक के नवीनतम जीडीपी प्रति व्यक्ति क्रय शक्ति समता यानी GDP Per Capita PPP के आधार पर)

रैंक देश प्रति व्यक्ति आय (वार्षिक PPP) गरीबी और संकट का मुख्य कारण
1 दक्षिण सूडान (South Sudan) ~$450 – $500 गृहयुद्ध, जातीय हिंसा, तेल पर अति-निर्भरता और लगातार बाढ़
2 बुरुंडी (Burundi) ~$900 – $1,100 राजनीतिक अस्थिरता, भूमि की भारी कमी, खराब स्वास्थ्य तंत्र
3 मध्य अफ्रीकी गणराज्य (CAR) ~$1,100 – $1,300 खनिज संपन्न होने के बावजूद दशकों से जारी विद्रोही हिंसा और लूट
4 डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) ~$1,500 – $1,700 कोबाल्ट और तांबे का विपुल भंडार, पर विद्रोही गुटों का कब्जा और भ्रष्टाचार
5 मोजाम्बिक (Mozambique) ~$1,600 – $1,700 उत्तरी हिस्से में आतंकी हिंसा, चक्रवाती तूफान और बुनियादी ढांचे का अभाव
6 मलावी (Malawi) ~$1,700 – $1,850 कृषि का मानसूनी मौसम पर निर्भर होना, भयानक मुद्रास्फीति और कर्ज संकट
7 नाइजर (Niger) ~$1,700 – $1,900 सहारा रेगिस्तान का फैलाव, सूखा, राजनीतिक तख्तापलट और साक्षरता की कमी
8 लाइबेरिया (Liberia) ~$1,800 – $1,980 अतीत के 14 साल के खूनी गृहयुद्ध और इबोला महामारी के स्थायी जख्म
9 मेडागास्कर (Madagascar) ~$1,950 – $2,000 चक्रवात, दक्षिणी हिस्से में दशकों का सबसे भयानक सूखा, भौगोलिक अलगाव
10 यमन / सोमालिया ~$2,000 सालों से जारी विदेशी व आंतरिक युद्ध, ब्लॉकेड, भुखमरी और समुद्री डकैती

गरीबी की असल वजह क्या है? (Root Causes)

  1. अनंत युद्ध और राजनीतिक अस्थिरता: इन 10 में से कम से कम 7 देश पिछले कई दशकों से गृहयुद्ध, सैन्य तख्तापलट या आतंकी गुटों की हिंसा से जूझ रहे हैं। गोलियों के साये में न खेती हो सकती है, न उद्योग पनप सकते हैं।

  2. कुदरती संसाधनों की लूट और भ्रष्टाचार: कांगो और मध्य अफ्रीकी गणराज्य जैसे देश हीरों, सोने और इलेक्ट्रिक गाड़ियों की बैटरी में इस्तेमाल होने वाले कोबाल्ट के सबसे बड़े स्रोत हैं। फिर भी यह संपत्ति भ्रष्ट नेताओं, विदेशी खनन कंपनियों और हथियारबंद गिरोहों की जेब में जाती है, आम जनता खाली हाथ रहती है।

  3. जलवायु संकट (Climate Vulnerability): मेडागास्कर, मलावी और सोमालिया जैसे देशों ने दुनिया में सबसे कम प्रदूषण फैलाया है, लेकिन ग्लोबल वॉर्मिंग की सबसे पहली और सबसे भयानक मार (सूखा और चक्रवात) इन्हीं को झेलनी पड़ रही है।

  4. शिक्षा और स्वास्थ्य का पतन: इन देशों में 60% से 70% आबादी बुनियादी शिक्षा और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं से महरूम है, जिससे अगली पीढ़ी भी गरीबी के दुष्चक्र (Vicious Cycle of Poverty) से बाहर नहीं निकल पाती।

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लोगों के जीवन पर इसका क्या असर हो रहा है?

  • अकाल मृत्यु और स्टंटिंग: यूनिसेफ के अनुसार इन देशों में हर तीन में से एक बच्चा कुपोषण के चलते अपनी उम्र के अनुपात में शारीरिक और मानसिक रूप से विकसित (Stunted) नहीं हो पाता। 5 वर्ष की उम्र से पहले दम तोड़ने वाले बच्चों की दर यहां दुनिया में सबसे ज्यादा है।

  • गुलामी और बाल मजदूरी: कोबाल्ट और सोने की जहरीली खदानों में 7-8 साल के बच्चे नंगे पैर काम करने को मजबूर हैं ताकि शाम को परिवार के लिए एक वक्त का आटा खरीदा जा सके।

  • मानसिक आघात और असुरक्षा: भुखमरी के कारण समाज में अपराध, देह व्यापार और बच्चों को विद्रोही सेनाओं में झोंक दिए जाने का खौफ आम बात बन चुका है।

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