मुफ्त की योजनाओं पर देश का खजाना लुटा रहे ये टॉप 10 राज्य, जानें किस राज्य पर है सबसे ज्यादा कर्ज

Freebies in India. भारत की राजनीति में ‘मुफ्त की योजनाएं’ (Freebies) अब चुनाव जीतने का सबसे बड़ा हथियार बन चुकी हैं। मुफ्त बिजली, महिलाओं को हर महीने नकद ट्रांसफर, मुफ्त बस यात्रा और कर्ज माफी जैसे वादों के कारण कई राज्यों का खजाना खाली हो रहा है और उन पर कर्ज का भारी बोझ बढ़ता जा रहा है।

मुफ्त की योजनाओं पर सबसे ज्यादा खर्च करने वाला राज्य

जीएसडीपी (GSDP – राज्य के सकल घरेलू उत्पाद) के अनुपात में कर्ज और फ्रीबीज के मामले में पंजाब देश में सबसे आगे है। पंजाब पर कर्ज का अनुपात उसके GSDP का 53% तक पहुंच चुका है। वहीं, अगर सिर्फ नकद ट्रांसफर (Cash Transfers) की बात करें तो हालिया आंकड़ों के अनुसार झारखंड ने अपने GSDP का सर्वाधिक 2.1% हिस्सा सीधे मुफ्त नकद योजनाओं में बांटा है। दूसरी ओर, कुल कर्ज और देनदारी के मामले में उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र देश में सबसे आगे हैं। महाराष्ट्र में महिलाओं के लिए शुरू की गई ‘लाडकी बहना योजना’ पर ही हर साल 46,000 करोड़ रुपये का भारी-भरकम खर्च आ रहा है।

फ्रीबीज के मामले में देश के टॉप 10 राज्य

वित्तीय घाटे, भारी कर्ज और लोकलुभावन योजनाओं पर अपनी क्षमता से अधिक खर्च करने वाले शीर्ष 10 राज्य इस प्रकार हैं:

  1. पंजाब: मुफ्त बिजली और कृषि सब्सिडी के कारण देश में सबसे ज्यादा कर्ज (GSDP के अनुपात में) वाला राज्य।

  2. हिमाचल प्रदेश: मुफ्त योजनाओं के कारण इस राज्य का सरकारी कर्ज इसकी जीडीपी के 40% को पार कर गया है।

  3. आंध्र प्रदेश: भारी मुफ्त नकद ट्रांसफर और कल्याणकारी योजनाओं के चलते खजाने पर बहुत अधिक वित्तीय दबाव है।

  4. पश्चिम बंगाल: महिलाओं को डायरेक्ट कैश ट्रांसफर (लक्ष्मी भंडार) और अन्य फ्रीबीज के कारण राज्य का राजकोषीय गणित बिगड़ा हुआ है।

  5. केरल: कल्याणकारी पेंशन और सब्सिडी के चलते यह राज्य भारी कर्ज के संकट से जूझ रहा है।

  6. राजस्थान: मुफ्त बिजली, पुरानी पेंशन और अन्य योजनाओं के चलते पंजाब के बाद GSDP के अनुपात में इसका कर्ज सबसे अधिक (39.5%) है।

  7. महाराष्ट्र: हाल ही में महिलाओं और किसानों के लिए शुरू की गई महंगी योजनाओं से खजाने और बजट पर भारी बोझ बढ़ा है।

  8. कर्नाटक: महिलाओं को मुफ्त बस सेवा और कैश ट्रांसफर योजनाओं के कारण राजकोषीय घाटा बढ़ा है।

  9. तमिलनाडु: यह राज्य दशकों से मुफ्त लैपटॉप, राशन और सब्सिडी बांटने वाली राजनीतिक संस्कृति का बड़ा केंद्र रहा है।

  10. दिल्ली / तेलंगाना: दिल्ली में मुफ्त बिजली और पानी का मॉडल लागू है। वहीं तेलंगाना ने भी चुनाव में कृषि और महिला केंद्रित नकद योजनाओं के बड़े वादे किए हैं।

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क्या कोई ऐसा राज्य है जहां जनता को मुफ्त में देने की कोई योजना नहीं है?

तथ्यात्मक रूप से, वर्तमान में भारत में ऐसा कोई भी राज्य नहीं है जहां सरकार जनता को मुफ्त में कोई योजना न दे रही हो। देश के हर राज्य में कोई न कोई सब्सिडी या नकद हस्तांतरण की योजना चल ही रही है। हालांकि, इस मामले में ओडिशा एक बेहद सकारात्मक उदाहरण है। ओडिशा भी मुफ्त की योजनाएं चलाता है, लेकिन वह इसके लिए बाजार से कर्ज नहीं लेता। राज्य अपना ‘राजस्व अधिशेष’ (Revenue Surplus) बनाए रखता है, यानी वह अपनी आमदनी की बचत से ही इन मुफ्त योजनाओं का खर्च उठा लेता है, जिससे वहां की अर्थव्यवस्था स्थिर बनी हुई है।

अत्यधिक मुफ्त की योजनाओं का सबसे बड़ा नुकसान यह है कि इससे राज्य के पास बुनियादी ढांचे (अस्पताल, स्कूल, सड़कें) के निर्माण यानी कैपिटल एक्सपेंडिचर के लिए पैसा कम पड़ जाता है, जिससे राज्य का विकास धीमा हो जाता है।

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मुफ्त योजनाओं के मामले में छत्तीसगढ़ की स्थिति

मुफ्त की योजनाओं (Freebies) की रेस में छत्तीसगढ़ भी बिल्कुल पीछे नहीं है। हालांकि यह राज्य पंजाब, राजस्थान या केरल की तरह कर्ज के ‘रेड जोन’ (अत्यधिक वित्तीय संकट वाले टॉप राज्यों) में नहीं आता है, लेकिन यहां भी लोकलुभावन वादों और योजनाओं के कारण सरकारी खजाने पर कर्ज का बोझ तेजी से बढ़ रहा है।

छत्तीसगढ़ में चल रही प्रमुख मुफ्त/सब्सिडी योजनाएं

  • महतारी वंदन योजना: इस योजना के तहत राज्य की लाखों महिलाओं को हर महीने 1,000 रुपये (सालाना 12,000 रुपये) की नकद आर्थिक सहायता (Cash Transfer) दी जा रही है। इसका राज्य के बजट पर सीधा और बड़ा असर है।

  • धान पर भारी सब्सिडी (कृषक उन्नति योजना): राज्य में किसानों से 3100 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से धान की बंपर खरीदी की जाती है, जो कि राष्ट्रीय एमएसपी (MSP) से काफी अधिक है। सरकार इस अतिरिक्त राशि का भुगतान अपने खजाने से बोनस के रूप में करती है।

  • बिजली बिल में छूट: आम उपभोक्ताओं के लिए ‘बिजली बिल हाफ’ योजना और किसानों के लिए मुफ्त बिजली जैसी योजनाएं भी खजाने पर भारी दबाव डाल रही हैं।

  • अन्य रियायतें: इसके अलावा 500 रुपये में रसोई गैस सिलेंडर और भूमिहीन मजदूरों को नकद सहायता जैसी योजनाएं भी संचालित हैं।

कर्ज और वित्तीय स्थिति (Financial Health): आरबीआई (RBI) और बजट दस्तावेजों के अनुसार, छत्तीसगढ़ का कर्ज-से-जीएसडीपी (Debt-to-GSDP) अनुपात वर्तमान में 25% से 28% के बीच है। राज्य पर कुल कर्ज का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। हालांकि, अच्छी बात यह है कि यह अनुपात पंजाब (53%) या हिमाचल प्रदेश (40%) जैसे राज्यों की तुलना में अभी भी काफी नियंत्रण में है।

क्या है सबसे बड़ी चुनौती?

छत्तीसगढ़ खनिज और प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर राज्य है, जिससे इसे अच्छी खासी रॉयल्टी और राजस्व (Revenue) मिलता है। यही कारण है कि यह राज्य अब तक इन मुफ्त योजनाओं का खर्च आसानी से उठा पा रहा है। लेकिन, अर्थशास्त्रियों की चेतावनी है कि राजस्व का एक बड़ा हिस्सा कैपिटल एक्सपेंडिचर (सड़क, उद्योग, स्कूल, अस्पताल के निर्माण) में लगने की बजाय सीधे नकद बांटने में खर्च हो रहा है। अगर मुफ्त योजनाओं का ग्राफ ऐसे ही बढ़ता रहा, तो भविष्य में राज्य के विकास की रफ्तार धीमी पड़ सकती है।

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