अंतरिक्ष का ‘ट्रैफिक जाम’: आसमान में चक्कर लगा रहे 19,000 से ज्यादा सैटेलाइट, जानिए इस रेस में कहां है भारत?

Satellites in Space. रात के समय आसमान में चमकते हुए जो बिंदु आप देखते हैं, वे केवल तारे नहीं हैं। पृथ्वी के ठीक ऊपर अंतरिक्ष में इंसानों द्वारा भेजे गए सैटेलाइट्स (उपग्रहों) का एक विशाल जाल बिछा हुआ है। वर्तमान में स्पेस में सैटेलाइट्स की संख्या इतनी तेजी से बढ़ रही है कि अब वहां बाकायदा ‘ट्रैफिक जाम’ जैसी स्थिति पैदा होने लगी है। इंटरनेट कनेक्टिविटी से लेकर मौसम की सटीक जानकारी तक, हमारी रोजमर्रा की जिंदगी इन उपग्रहों पर निर्भर है।

अंतरिक्ष में कुल कितने सैटेलाइट मौजूद हैं?

यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) और अन्य वैश्विक स्पेस ट्रैकर्स के अक्टूबर 2026 के नवीनतम डेटा के अनुसार, पृथ्वी की कक्षा में इस समय लगभग 19,440 कृत्रिम उपग्रह मौजूद हैं। हालांकि, ये सभी काम नहीं कर रहे हैं। इनमें से करीब 15,800 से 17,400 सैटेलाइट ही एक्टिव (सक्रिय) हैं, जो अपना काम कर रहे हैं। बाकी बचे हुए उपग्रह या तो रिटायर हो चुके हैं या फिर अंतरिक्ष के मलबे (Space Debris) का हिस्सा बन चुके हैं।

किस देश के पास हैं सबसे ज्यादा और सबसे कम सैटेलाइट?

सैटेलाइट्स की इस वैश्विक रेस में अमेरिका (USA) एकतरफा राज कर रहा है। अंतरिक्ष में मौजूद कुल सक्रिय सैटेलाइट्स में से लगभग 70 से 75 प्रतिशत अकेले अमेरिका के हैं, जिनकी संख्या 13,000 से भी अधिक है। इसके बाद दूसरे नंबर पर रूस (लगभग 1,558 सैटेलाइट) और तीसरे नंबर पर चीन (लगभग 1,310 सैटेलाइट) आते हैं। ब्रिटेन (यूके) के पास भी 700 से ज्यादा सैटेलाइट्स हैं। अगर सबसे कम की बात करें, तो दुनिया में दर्जनों ऐसे छोटे या विकासशील देश हैं जिनके नाम पर अंतरिक्ष में केवल 1 ही सैटेलाइट दर्ज है और कुछ देशों का तो अब तक स्पेस में खाता भी नहीं खुला है।

अंतरिक्ष में सबसे ज्यादा किस तरह के सैटेलाइट हैं और वे क्या करते हैं?

अंतरिक्ष में सबसे ज्यादा संचार उपग्रह (Communication Satellites) हैं। कुल सक्रिय सैटेलाइट्स का एक बहुत बड़ा हिस्सा इसी कैटेगरी में आता है, जिसका मुख्य कारण एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स का ‘स्टारलिंक’ (Starlink) प्रोजेक्ट है, जिसके अकेले 11,000 से ज्यादा सैटेलाइट स्पेस में मौजूद हैं। ये सैटेलाइट दुनिया भर में हाई-स्पीड सैटेलाइट इंटरनेट, टीवी प्रसारण और टेलीफोन सिग्नल भेजने का काम करते हैं।

संचार के बाद सबसे ज्यादा संख्या अर्थ ऑब्जर्वेशन (पृथ्वी अवलोकन) सैटेलाइट्स की है। ये मौसम की भविष्यवाणी, जंगलों की आग पर नजर रखने, कृषि भूमि का आकलन करने और जासूसी व सैन्य निगरानी के काम आते हैं। इसके अलावा नेविगेशन सैटेलाइट्स (जो आपके फोन का GPS चलाते हैं) और खगोलीय रिसर्च करने वाले सैटेलाइट्स भी अंतरिक्ष में मौजूद हैं। आज के समय में लगभग 90% उपग्रह पृथ्वी की निचली कक्षा (Low Earth Orbit – LEO) में स्थापित किए जा रहे हैं।

भारत की स्थिति क्या है?

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के नेतृत्व में भारत स्पेस सेक्टर का एक मजबूत और विश्वसनीय खिलाड़ी है। अक्टूबर 2026 के आंकड़ों के मुताबिक, अंतरिक्ष में भारत के लगभग 130 सक्रिय सैटेलाइट मौजूद हैं। इनमें संचार के लिए INSAT और GSAT सीरीज, नेविगेशन के लिए स्वदेशी सिस्टम NavIC (IRNSS) और मौसम व मैपिंग के लिए कई अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट शामिल हैं।

भले ही भारत अपने सैटेलाइट्स की कुल संख्या के मामले में अमेरिका या चीन से पीछे हो, लेकिन भारत की असली ताकत उसकी ‘लॉन्चिंग क्षमता’ है। अपने शक्तिशाली PSLV रॉकेट की मदद से भारत ने साल 2025 तक लगभग 398 विदेशी सैटेलाइट्स को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में पहुंचाया है। सस्ते, सुरक्षित और सटीक सैटेलाइट लॉन्च के मामले में दुनिया भर की अंतरिक्ष एजेंसियां आज भी भारत पर भरोसा करती हैं।

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