नेपाल-तिब्बत सीमा बाढ़ त्रासदी: ईशा फाउंडेशन के 80 श्रद्धालु लापता, सद्गुरु की कैलाश यात्रा और पैकेज पर सवाल

Nepal Tragedy and Sadhguru. नेपाल और तिब्बत सीमा पर रसुवा जिले के ग्यिरोंग (केरुंग) क्षेत्र में भोटे कोशी और त्रिशूली नदी में आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन के कारण भारी तबाही मची है। इस आपदा में ईशा योग फाउंडेशन के 80 सदस्य (77 तीर्थयात्री और 3 स्वयंसेवक) लापता हो गए हैं।

विवाद और चर्चा के मुख्य बिंदु

  • इमिग्रेशन केंद्र का बहना: ईशा फाउंडेशन का यह समूह कैलाश मानसरोवर यात्रा पूरी कर लौट रहा था। सुबह 9:05 बजे समूह के समन्वयक ने इमिग्रेशन पहुंचने की सूचना दी, जिसके लगभग 9 मिनट बाद अचानक जलप्रलय में पूरा इमिग्रेशन कार्यालय बह गया।

  • सुरक्षा प्रोटोकॉल व मौसम अलर्ट पर सवाल: सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर यह बहस छिड़ी है कि भारी मानसूनी चेतावनी और संवेदनशील भूभाग के बावजूद इस मार्ग पर आवाजाही के दौरान सुरक्षा संबंधी क्या सावधानियां बरती गई थीं।

  • सद्गुरु का बयान: सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने भावुक होकर स्थिति स्पष्ट की कि यह एक अप्रत्याशित प्राकृतिक आपदा (ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट/हिमस्खलन) थी। उन्होंने बताया कि 21 समूहों के 495 लोग सुरक्षित लौट चुके थे। उन्होंने प्रभावित क्षेत्र में पहुंचकर राहत व खोज अभियान में मदद के लिए भारत, चीन और अमेरिकी दूतावासों से विशेष अनुमति मांगी है।

ईशा फाउंडेशन का कैलाश मानसरोवर यात्रा पैकेज

ईशा फाउंडेशन अपनी विंग ‘ईशा सेक्रेड वॉक्स’ (Isha Sacred Walks) के माध्यम से हर साल कैलाश मानसरोवर यात्रा का संचालन करता है:

  • यात्रा मार्ग: मुख्य रूप से काठमांडू से रसुवागढ़ी/ग्यिरोंग (सड़क मार्ग) और सिमिकोट-हिल्सा (हेलीकॉप्टर/फ्लाइट मार्ग) के विकल्प दिए जाते हैं।

  • पैकेज में शामिल सुविधाएं: तिब्बत ट्रैवल परमिट, ग्रुप वीजा, काठमांडू व तिब्बत में आवास/भोजन, मेडिकल बैकअप (ऑक्सीजन सिलेंडर व डॉक्टर), गाइड, विशेष साधना सत्र और सद्गुरु के साथ विशेष ध्यान प्रक्रियाएं।

  • लागत: मार्ग और श्रेणी (हेलीकॉप्टर या ओवरलैंड) के आधार पर प्रति व्यक्ति शुल्क लगभग ₹2.5 लाख से ₹4.5 लाख (और विदेशी नागरिकों के लिए 4,000–5,000 डॉलर तक) होता है।

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