नासिक TCS केस : 40 दिन चला अंडरकवर ऑपरेशन, तब हुआ धर्मांतरण रैकेट का भंडाफोड़?
TCS Case Update | 16 अप्रैल, 2026. देश की प्रतिष्ठित आईटी कंपनी TCS (Tata Consultancy Services) के नासिक बीपीओ सेंटर में धर्मांतरण और गंभीर यौन शोषण का मामला सामने आया है। अब तक इस मामले में 9 एफआईआर (FIR) दर्ज की जा चुकी हैं और 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस की जांच में यह बात सामने आई है कि यह कोई छिटपुट घटना नहीं, बल्कि 2022 से चल रहा एक संगठित नेटवर्क था।
खुलासे की शुरुआत: एक ‘टिप’ और 40 दिनों का अंडरकवर ऑपरेशन
इस बड़े मामले की पोल तब खुली जब फरवरी 2026 में एक राजनीतिक कार्यकर्ता ने नासिक पुलिस को जानकारी दी कि कंपनी में काम करने वाली एक हिंदू महिला कर्मचारी अचानक रमजान के रोजे रख रही है। इस सूचना ने पुलिस को सतर्क कर दिया।
नासिक पुलिस ने इसे सामान्य मामला न मानते हुए एक सीक्रेट ऑपरेशन शुरू किया। पुलिसकर्मियों ने हाउसकीपिंग स्टाफ (सफाई कर्मचारी) बनकर करीब 40 दिनों तक कंपनी के भीतर रहकर सबूत जुटाए। इस दौरान उन्होंने देखा कि कुछ महिला कर्मचारी डरी-सहमी थीं और वरिष्ठ अधिकारी उन पर विशेष धार्मिक क्रियाकलापों के लिए दबाव बना रहे थे।
साजिश का पैटर्न: नौकरी, प्यार और दबाव
जांच में खुलासा हुआ कि यह रैकेट मुख्य रूप से 18 से 25 साल की कम उम्र की युवतियों को निशाना बनाता था। खुलासे के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
- धार्मिक दबाव: महिला कर्मचारियों पर नमाज पढ़ने, मांस (गोमांस सहित) खाने और हिंदू धर्म के अपमान के लिए दबाव बनाया गया।
- यौन उत्पीड़न: आरोपी तौसीफ अत्तर पर एक युवती को शादी का झांसा देकर रेप करने का आरोप है। अन्य आरोपियों पर मीटिंग के दौरान अश्लील टिप्पणियां करने और गलत तरीके से छूने के आरोप हैं।
- एचआर मैनेजर की भूमिका: कंपनी की एचआर मैनेजर निदा खान की भूमिका सबसे संदिग्ध पाई गई है। आरोप है कि वह पीड़ितों और आरोपियों के बीच एक कड़ी का काम करती थी और पीड़ितों को आरोपियों से दोस्ती करने के लिए प्रेरित करती थी।
SIT की जांच और कंपनी का रुख
मामले की गंभीरता को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने एसआईटी (SIT) का गठन किया है। पुलिस अब तक दानिश शेख, तौसीफ अत्तर, रजा मेमन, शाहरुख कुरैशी, आसिफ अंसारी, शफी शेख और अश्विन चैनानी को गिरफ्तार कर चुकी है।
टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने इस घटना पर कड़ा रुख अपनाते हुए ‘जीरो टॉलरेंस’ की बात कही है। कंपनी ने सभी आरोपी कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है और आंतरिक जांच भी शुरू कर दी है।
यह मामला कॉर्पोरेट सुरक्षा और POSH (Prevention of Sexual Harassment) कमिटी की विफलता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। पीड़ितों ने आरोप लगाया कि उन्होंने पहले कंपनी के एचआर विभाग में शिकायत की थी, लेकिन तब कोई कार्रवाई नहीं हुई।
