दुनिया के 10 सबसे अनपढ़ देश: जहां किताबें नहीं, संघर्ष है जिंदगी की सच्चाई…एक चौंकाने वाली रिपोर्ट
Most Illiterate Countries. आज जब दुनिया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अंतरिक्ष यात्राओं के दौर में है, तब भी पृथ्वी पर कई ऐसे देश हैं जहां आबादी का एक बड़ा हिस्सा अपना नाम तक लिखना नहीं जानता। यूनेस्को (UNESCO) और वर्ल्ड पापुलेशन रिव्यू के हालिया वैश्विक साक्षरता आंकड़ों के अनुसार, दुनिया में सबसे ज्यादा अशिक्षा अफ्रीका के उप-सहारा क्षेत्रों और युद्धग्रस्त देशों में फैली है। अत्यधिक गरीबी, गृहयुद्ध, अस्थिर सरकारें और बुनियादी ढांचे की कमी इन देशों में शिक्षा के सबसे बड़े दुश्मन हैं।
यहाँ उन शीर्ष 10 देशों की सूची है जहां साक्षरता दर सबसे कम और अनपढ़ लोगों की संख्या सबसे अधिक है:
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चाड (Chad): इस अफ्रीकी देश की हालत सबसे खराब है। यहां की साक्षरता दर मात्र 27.28% है, जिसका अर्थ है कि लगभग 73% आबादी पूरी तरह से अनपढ़ है।
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नाइजर (Niger): विभिन्न वैश्विक रिपोर्टों के अनुसार नाइजर की साक्षरता दर 19% से 38% के बीच है। गरीबी और स्कूलों की भारी कमी इसके मुख्य कारण हैं।
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माली (Mali): साक्षरता दर करीब 31% है। यहां शिक्षा का स्तर विशेषकर ग्रामीण इलाकों में बेहद दयनीय है।
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दक्षिण सूडान (South Sudan): लंबे समय तक चले गृहयुद्ध के कारण यहां साक्षरता दर सिर्फ 32% के आसपास है।
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बुर्किना फासो (Burkina Faso): शिक्षा प्रणाली में सुधार की कोशिशों के बावजूद, यहां साक्षरता दर लगभग 34.49% ही है।
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मध्य अफ़्रीकी गणराज्य (Central African Republic): राजनीतिक अस्थिरता और हिंसा के कारण यहां केवल 37% लोग ही साक्षर हैं।
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अफ़ग़ानिस्तान (Afghanistan): दशकों के युद्ध और विशेषकर महिलाओं की शिक्षा पर लगे प्रतिबंधों के कारण, यहां की साक्षरता दर मात्र 37.27% रह गई है।
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सोमालिया (Somalia): अस्थिरता और आतंकवाद से जूझ रहे इस देश में 41.02% लोग ही पढ़ना-लिखना जानते हैं।
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गिनी (Guinea): यहां साक्षरता दर लगभग 45% है, जिसमें पुरुषों और महिलाओं के बीच शिक्षा का भारी अंतर (जेंडर गैप) एक बड़ी समस्या है।
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बेनिन (Benin): साक्षरता दर 47.10% है। हालांकि यहां शिक्षा मुफ्त है, लेकिन बाल श्रम और गरीबी के कारण बच्चे स्कूल छोड़ देते हैं।
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क्यों पिछड़े हैं ये देश?
इन देशों में अशिक्षा के पीछे सबसे बड़े कारण बजट का अभाव, योग्य शिक्षकों की कमी, बाल विवाह और निरंतर चल रहे सैन्य संघर्ष हैं। जब तक बुनियादी शांति और वित्तीय स्थिरता स्थापित नहीं होती, इन देशों में शिक्षा का प्रकाश पहुंचना एक बड़ी चुनौती बना रहेगा।

