क्या PM मोदी ने इंस्टाग्राम को बंद करने का फैसला किया है? वायरल दावे का सच और फर्जी खबर पर सजा के प्रावधान

Instagram Ban Fact Check. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर आए दिन कई तरह की भ्रामक जानकारियां वायरल होती रहती हैं। हाल ही में ‘SN Bihar Dastak’ नामक एक इंस्टाग्राम अकाउंट से एक रील तेजी से शेयर की जा रही है। इस वीडियो में यह दावा किया गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत में लोकप्रिय सोशल मीडिया ऐप ‘इंस्टाग्राम’ (Instagram) को बंद करने का निर्णय लिया है। इस खबर के सामने आते ही इंस्टाग्राम यूजर्स के बीच चिंता और भ्रम की स्थिति पैदा हो गई।

क्या है वायरल दावे का सच?

इस वायरल खबर की पड़ताल करने पर यह साफ हो गया है कि इंस्टाग्राम के बैन होने का दावा पूरी तरह से निराधार और फर्जी है। केंद्र सरकार या सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की तरफ से देश में इंस्टाग्राम पर प्रतिबंध लगाने का कोई भी आदेश या प्रस्ताव जारी नहीं किया गया है। यह केवल एक अफवाह है जिसे सोशल मीडिया पर व्यूज बटोरने और लोगों में दहशत फैलाने के मकसद से फैलाया जा रहा है।

पीआईबी (PIB) फैक्ट चेक ने क्या कहा?

भारत सरकार की आधिकारिक फैक्ट-चेकिंग एजेंसी, प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (PIB Fact Check) ने इस मामले का संज्ञान लेते हुए वायरल दावे का पूरी तरह से खंडन किया है। पीआईबी ने स्पष्ट किया है कि, “यह दावा फर्जी है। भारत सरकार द्वारा ऐसी कोई घोषणा नहीं की गई है।” एजेंसी ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे ऐसे असत्यापित और भ्रामक दावों पर बिल्कुल भी विश्वास न करें और किसी भी सरकारी नीति या फैसले की जानकारी के लिए केवल आधिकारिक सरकारी स्रोतों पर ही भरोसा करें।

फर्जी खबर (Fake News) फैलाने पर सजा का प्रावधान

भारत में इंटरनेट या सोशल मीडिया के माध्यम से फर्जी खबरें फैलाकर लोगों में दहशत या भ्रम पैदा करना एक दंडनीय अपराध है। इसके लिए भारतीय कानूनों में सख्त सजा के प्रावधान किए गए हैं:

  • भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 353: यह धारा सार्वजनिक उपद्रव (Public Mischief) या दहशत फैलाने वाले झूठे बयान और भ्रामक अफवाहें प्रकाशित या प्रसारित करने से संबंधित है। इसके तहत दोषी पाए जाने पर व्यक्ति को 3 साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है।

  • सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act): आईटी एक्ट की धारा 66D के तहत कंप्यूटर संसाधन या संचार उपकरण का उपयोग करके भ्रामक जानकारी फैलाने या धोखाधड़ी करने पर 3 साल तक की कैद और 1 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।

  • यदि किसी फर्जी खबर के कारण समाज में कानून-व्यवस्था बिगड़ती है या दंगे की स्थिति उत्पन्न होती है, तो पुलिस प्रशासन आरोपी के अकाउंट को ब्लॉक करने के साथ-साथ गंभीर धाराओं में एफआईआर (FIR) दर्ज कर सकता है।

सरकार और साइबर एक्सपर्ट्स लगातार इंटरनेट यूजर्स को यह सलाह देते हैं कि किसी भी सनसनीखेज खबर को बिना उसकी प्रामाणिकता जांचे (Fact-Check) शेयर न करें। आधिकारिक जानकारी के लिए हमेशा विश्वसनीय समाचार माध्यमों या सरकार के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल्स का ही उपयोग करें।

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