शहरों में हर बारिश क्यों भरता है पानी? अब स्थायी समाधान की तैयारी, जानें क्या है प्लान
CHHATTISGARH URBAN FUND। बारिश में सड़कों पर जलभराव, पेयजल की समस्या, खराब सड़कें और जगह-जगह लटकते बिजली के तार। छत्तीसगढ़ के शहरों में रहने वाले लोगों के लिए ये परेशानियां नई नहीं हैं। अब इन समस्याओं के स्थायी समाधान और शहरों को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विकसित करने के लिए अर्बन चैलेंज फंड के जरिए नई संभावनाएं तलाशने की तैयारी है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने नगरीय निकायों से ऐसी विकास परियोजनाएं तैयार करने को कहा है, जो लोगों की रोजमर्रा की समस्याओं को दूर करने के साथ आने वाले दशकों की जरूरतों को भी पूरा कर सकें।
बुधवार, 21 अक्टूबर को नवा रायपुर स्थित मेफेयर लेक रिजॉर्ट में अर्बन चैलेंज फंड और अर्बन इन्वेस्ट विंडो पर आयोजित प्रथम क्षेत्रीय कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि शहरों का विकास केवल मौजूदा समस्याओं के समाधान तक सीमित नहीं रहना चाहिए। पेयजल, जल निकासी, सड़क, बिजली, परिवहन और स्वच्छता जैसी सुविधाओं के लिए दीर्घकालिक योजना बनाना जरूरी है।
जलभराव और बिजली के तारों जैसी समस्याओं पर जोर
मुख्यमंत्री ने शहरों में बारिश के दौरान होने वाले जलभराव का उल्लेख करते हुए कहा कि नागरिकों को हर साल होने वाली परेशानी का स्थायी समाधान तलाशना होगा। इसके लिए ऐसी जल निकासी व्यवस्था विकसित करने की जरूरत है, जो भविष्य में बढ़ती आबादी और शहरी विस्तार का दबाव भी झेल सके।
शहरों में अव्यवस्थित बिजली और अन्य सेवाओं के तार भी चिंता का विषय हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि जुलूस या बड़े वाहनों के गुजरने के दौरान तारों को ऊपर उठाने जैसी स्थिति आधुनिक शहरी व्यवस्था के अनुरूप नहीं है। जहां संभव हो, वहां बिजली और अन्य सेवाओं के तार भूमिगत करने की योजनाएं तैयार की जानी चाहिए।
इसका मतलब है कि आने वाले समय में नगरीय निकायों को ऐसी परियोजनाओं पर ध्यान देना होगा, जिनसे केवल निर्माण कार्य न हो, बल्कि नागरिकों को वास्तविक राहत भी मिले। हालांकि, इन समस्याओं के समाधान के लिए किन शहरों में कौन-सी परियोजना कब शुरू होगी, इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
एक लाख करोड़ रुपये के फंड से शहरों को क्या फायदा हो सकता है?
उप मुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव ने बताया कि केंद्र सरकार ने अर्बन चैलेंज फंड के लिए एक लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। उन्होंने इसे छत्तीसगढ़ के शहरों के विकास के लिए बड़ा अवसर बताया। अब नगरीय निकायों के सामने चुनौती ऐसी गुणवत्तापूर्ण और आर्थिक रूप से व्यवहार्य परियोजनाएं तैयार करने की है, जिनके जरिए इस फंड से अधिकतम संसाधन प्राप्त किए जा सकें।
इस पहल के जरिए शहरों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार, आधुनिक शहरी नियोजन और विकास परियोजनाओं के लिए वित्तीय संसाधन जुटाने की संभावनाएं बन सकती हैं। लेकिन इसका वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि नगरीय निकाय कितनी प्रभावी परियोजनाएं तैयार करते हैं और उन्हें जमीन पर किस तरह लागू किया जाता है।
दो समझौतों से निकायों को मिलेगी तकनीकी मदद
कार्यशाला के दौरान नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने आवास एवं शहरी विकास निगम (हुडको) और सेप्ट विश्वविद्यालय के साथ दो अलग-अलग समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए। इनका उद्देश्य नगरीय निकायों को परियोजनाओं की योजना बनाने, वित्तीय संसाधन जुटाने, तकनीकी विशेषज्ञता हासिल करने और अधिकारियों की क्षमता बढ़ाने में सहयोग देना है।
इससे नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों को बेहतर परियोजना तैयार करने में मदद मिल सकती है। किसी भी परियोजना की सफलता केवल उसके निर्माण पर निर्भर नहीं करती, बल्कि उसके रखरखाव, संचालन और लंबे समय तक उपयोगी बने रहने की योजना भी जरूरी होती है।
शहरों के विकास में जनप्रतिनिधियों की बड़ी जिम्मेदारी
मुख्यमंत्री ने महापौरों, नगर पालिका और नगर पंचायत अध्यक्षों से अपने शहरों की वास्तविक जरूरतों को समझकर विकास योजनाएं बनाने की अपील की। वहीं, उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि परियोजनाओं की उपयोगिता, संचालन, रखरखाव और वित्तीय व्यवहार्यता पर शुरुआत से ध्यान देना जरूरी है, ताकि जनता के पैसे का सही उपयोग सुनिश्चित हो सके।
अब सबसे अहम सवाल यह है कि अर्बन चैलेंज फंड के अवसर का लाभ उठाकर छत्तीसगढ़ के नगरीय निकाय अपने शहरों की पुरानी समस्याओं के समाधान के लिए कितनी ठोस योजनाएं तैयार करते हैं। शहरों में रहने वाले लोगों के लिए इस पहल की असली सफलता तभी होगी, जब योजनाएं कागजों से निकलकर जमीन पर उतरें और जलभराव, पेयजल, सड़क तथा दूसरी बुनियादी सुविधाओं में वास्तविक सुधार दिखाई दे।

