शांति वार्ता से पहले ईरान ने रखी नई शर्तें, पाकिस्तान में आज तय है शांति वार्ता

IRAN-ISRAEL-US WAR . ईरान और अमेरिका के बीच शनिवार (11 अप्रैल 2026) से इस्लामाबाद में शुरू होने वाली शांति वार्ता से पहले तेहरान ने कड़ा रुख अपनाया है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि बातचीत की मेज पर बैठने से पहले उसकी कुछ ‘पूर्व शर्तें’ (Preconditions) पूरी होनी चाहिए।

ईरान की नई और प्रमुख शर्तें:

ईरान ने अपने ’10-सूत्रीय शांति प्रस्ताव’ के साथ कुछ तात्कालिक मांगें रखी हैं:

  • लेबनान में युद्धविराम: ईरान की सबसे बड़ी शर्त है कि इजरायल लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ जारी हमलों को तुरंत रोके। ईरान का कहना है कि लेबनान में शांति के बिना क्षेत्रीय वार्ता संभव नहीं है।

  • फ्रीज की गई संपत्ति की रिहाई: तेहरान ने मांग की है कि अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय बैंकों में फंसी उसकी अरबों डॉलर की संपत्ति को बिना किसी देरी के जारी किया जाए।

  • हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर संप्रभुता: ईरान ने अंतरराष्ट्रीय मान्यता मांगी है कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर उसका पूर्ण अधिकार है। वह वहां से गुजरने वाले जहाजों के लिए ‘विनियमित मार्ग’ और सुरक्षा प्रोटोकॉल चाहता है।

  • प्रतिबंधों को पूरी तरह हटाना: ईरान चाहता है कि बातचीत के साथ ही उस पर लगे सभी प्राथमिक और माध्यमिक आर्थिक प्रतिबंध हटा लिए जाएं।

  • यूरेनियम संवर्धन का अधिकार: ईरान के परमाणु प्रमुख ने स्पष्ट किया है कि बातचीत के लिए परमाणु कार्यक्रम को रोकने के बजाय ‘यूरिनयम संवर्धन के अधिकार’ को स्वीकार करना आवश्यक है।

अमेरिका और पाकिस्तान की भूमिका

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दो सप्ताह के युद्धविराम पर सहमति जताई है, लेकिन अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि वह ईरान के परमाणु हथियारों के प्रसार को बर्दाश्त नहीं करेगा। पाकिस्तान इस पूरी प्रक्रिया में मुख्य मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। शुक्रवार को ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर कलीबाफ के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद पहुंचा है।

अगर अमेरिका इन शर्तों को स्वीकार करता है, तभी औपचारिक शांति वार्ता आगे बढ़ेगी। वर्तमान में यह वार्ता एक नाजुक मोड़ पर है, क्योंकि लेबनान में जारी संघर्ष इस पूरी शांति प्रक्रिया को पटरी से उतार सकता है।