रेलवे और सेना के बाद सबसे बड़ा जमींदार कैसे बना वक्फ बोर्ड? 2014 से पहले और बाद के चौंकाने वाले आंकड़े
Waqf Board Property in India. ‘वक्फ’ (Waqf) एक अरबी शब्द है, जिसका अर्थ है ‘अल्लाह के नाम पर समर्पित’। इस्लामिक कानून के अनुसार, जब कोई व्यक्ति अपनी चल या अचल संपत्ति को धार्मिक, शैक्षिक या कल्याणकारी कार्यों के लिए दान कर देता है, तो उसे ‘वक्फ’ संपत्ति कहा जाता है। एक बार कोई संपत्ति वक्फ हो जाने के बाद, उसे खरीदा या बेचा नहीं जा सकता। भारत में इन संपत्तियों का प्रबंधन और देखरेख करने के लिए ‘वक्फ बोर्ड’ (Waqf Board) का गठन किया गया है। भारत में सेंट्रल वक्फ काउंसिल के अंतर्गत राज्यवार सुन्नी और शिया वक्फ बोर्ड काम करते हैं।
वक्फ के पास इतनी जमीन कहां से आई?
वक्फ संपत्तियों का इतिहास सैकड़ों साल पुराना है। भारत में मुस्लिम शासकों (सुल्तानों, नवाबों और मुगलों) के दौर में बड़ी मात्रा में मस्जिदें, मदरसे, दरगाहें और कब्रिस्तानों के लिए जमीनें दान की गईं। इसके अलावा, आम संपन्न मुसलमानों ने भी समय-समय पर अपनी निजी संपत्तियां अल्लाह के नाम पर वक्फ कर दीं। आजादी के बाद, 1954 में वक्फ अधिनियम पारित किया गया, जिसे बाद में 1995 में नया रूप दिया गया।
इन संपत्तियों में न केवल धार्मिक स्थल शामिल हैं, बल्कि बड़े पैमाने पर वाणिज्यिक और आवासीय संपत्तियां भी हैं। वक्फ एक्ट 1995 की धारा 40 के तहत वक्फ बोर्ड को यह अधिकार मिला कि यदि उसे लगता है कि कोई संपत्ति वक्फ की है, तो वह उसे अपनी संपत्ति घोषित कर सकता है, जिससे इनकी संपत्तियों में अप्रत्याशित वृद्धि हुई।
2014 से पहले वक्फ के पास कितनी संपत्ति थी?
2014 से ठीक पहले वक्फ संपत्तियों के आंकड़े और अधिकार काफी सीमित थे, लेकिन 2013 में यूपीए (मनमोहन सिंह) सरकार द्वारा वक्फ एक्ट 1995 में किए गए संशोधन ने पूरी तस्वीर बदल दी।
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सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, 2013 में संशोधन से पहले देश भर में कुल वक्फ संपत्तियों की संख्या लगभग 2,07,394 थी।
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2014 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले (5 मार्च 2014 को), तत्कालीन यूपीए सरकार ने दिल्ली की 123 प्राइम संपत्तियों (Prime Properties) को भी दिल्ली वक्फ बोर्ड को सौंप दिया था। यह संपत्तियां ब्रिटिश शासनकाल से सरकार के पास थीं।
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दिल्ली वक्फ बोर्ड के पास 2013 में केवल 9 संपत्तियां (0.03 एकड़) थीं।
2014 के बाद (वर्तमान में) वक्फ की संपत्ति का दायरा
2013 के संशोधन ने वक्फ बोर्डों को असीमित शक्तियां दे दीं, जिसके परिणामस्वरूप 2014 के बाद इनकी संपत्तियों में बेतहाशा वृद्धि दर्ज की गई।
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वक्फ मैनेजमेंट सिस्टम ऑफ इंडिया (WAMSI) के पोर्टल और केंद्र सरकार के हालिया आंकड़ों के अनुसार, देश भर में वक्फ संपत्तियों की संख्या बढ़कर 8,72,870 से अधिक हो गई है।
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दिल्ली वक्फ बोर्ड, जिसके पास 2013 में सिर्फ 9 संपत्तियां थीं, उसकी संपत्तियां बढ़कर 1,047 हो गईं, जिनका कुल क्षेत्रफल लगभग 28 एकड़ हो गया।
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आज भारतीय रेलवे और रक्षा मंत्रालय के बाद वक्फ बोर्ड भारत में तीसरा सबसे बड़ा जमींदार बन चुका है। इसके नियंत्रण में वर्तमान में लाखों एकड़ जमीन है, जिसमें कई सरकारी स्कूल, पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा संरक्षित ऐतिहासिक स्मारक और यहां तक कि कलेक्टर कार्यालय तक वक्फ संपत्तियों के रूप में दावा किए गए हैं।
क्या कर रही है वर्तमान सरकार?
2014 में मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद, 2014 से पहले वक्फ को दी गई संपत्तियों की जांच शुरू हुई। सरकार ने दो सदस्यीय समिति की रिपोर्ट के आधार पर दिल्ली की उन 123 संपत्तियों को वापस लेने का नोटिस जारी किया है जो 2014 चुनाव से ठीक पहले वक्फ को दी गई थीं। इसके अतिरिक्त, केंद्र सरकार ने हाल ही में वक्फ संपत्तियों के दावों को पारदर्शी बनाने और असीमित शक्तियों (धारा 40) पर अंकुश लगाने के लिए वक्फ (संशोधन) विधेयक भी प्रस्तावित किया है, ताकि मनमाने ढंग से किसी भी जमीन को वक्फ घोषित करने की प्रथा पर रोक लगाई जा सके।

