बिना चुनाव वाले देशों का सच: जहां आज भी राजशाही और तानाशाही का है बोलबाला
Countries without elections. दुनिया भर में जहां लोकतंत्र को सबसे बेहतर शासन प्रणाली माना जाता है, वहीं आज भी कई देश ऐसे हैं जहां आम जनता को वोट देने या अपनी सरकार चुनने का अधिकार नहीं है। इन देशों में या तो पूर्ण राजशाही (Absolute Monarchy) लागू है या फिर तानाशाही (Dictatorship) का शासन है। आइए एक नजर डालते हैं उन देशों पर जहां चुनाव नहीं होते, राष्ट्राध्यक्ष कैसे चुने जाते हैं, और वहां के हालात लोकतांत्रिक देशों से कैसे अलग हैं।
बिना चुनाव वाले प्रमुख देश और वहां राष्ट्राध्यक्षों का चयन
1. पूर्ण राजशाही वाले देश (Absolute Monarchies) इन देशों में शासक (राजा या सुल्तान) के पास असीमित अधिकार होते हैं और पद वंशानुगत (Hereditary) होता है। यहां चुनाव या राजनीतिक दलों की अनुमति नहीं होती।
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सऊदी अरब (Saudi Arabia): यहां सत्ता पूरी तरह से हाउस ऑफ सऊद (House of Saud) के हाथों में है। राष्ट्राध्यक्ष (राजा) का पद शाही परिवार के भीतर से वंशानुगत रूप से तय होता है। वर्तमान में किंग सलमान बिन अब्दुलअजीज राष्ट्राध्यक्ष हैं। यहां कोई औपचारिक लिखित संविधान या चुनी हुई संसद नहीं है।
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ब्रुनेई (Brunei): दक्षिण पूर्व एशिया के इस धनी देश में सुल्तान हसनल बोल्किया का पूर्ण नियंत्रण है। सुल्तान ही राज्य के प्रमुख और सरकार के प्रमुख होते हैं, और यहां राजनीतिक दल या चुनाव नहीं होते हैं।
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ओमान (Oman): ओमान में सुल्तान ही राज्य और सरकार दोनों के प्रमुख होते हैं। सुल्तान का पद वंशानुगत होता है।
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ईस्वातिनी (Eswatini): इसे पहले स्वाज़ीलैंड कहा जाता था और यह अफ्रीका की आखिरी पूर्ण राजशाही है। राजा मस्वाती III का देश की सरकार, न्याय व्यवस्था और सेना पर लगभग पूर्ण अधिकार है। यहां राजनीतिक दलों पर प्रतिबंध है।
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वेटिकन सिटी (Vatican City): यह एक अनोखी राजशाही है, जहां राष्ट्राध्यक्ष पोप होते हैं। पोप को कार्डिनल्स (कैथोलिक चर्च के वरिष्ठ पादरी) के एक विशेष समूह द्वारा चुना जाता है, न कि आम जनता द्वारा। एक बार चुने जाने के बाद, पोप के पास सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकार होते हैं।
2. तानाशाही और बंद राजनीतिक व्यवस्था वाले देश कुछ देशों में नाम मात्र के चुनाव हो सकते हैं, लेकिन वहां लोकतांत्रिक प्रक्रिया (choice) पूरी तरह से अनुपस्थित होती है या फिर दशकों से चुनाव हुए ही नहीं हैं।
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इरिट्रिया (Eritrea): 1993 में इथियोपिया से स्वतंत्रता प्राप्त करने के बाद से इस देश ने कोई राष्ट्रीय चुनाव नहीं कराया है।
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उत्तर कोरिया (North Korea): यहां चुनाव होते हैं, लेकिन राजनीतिक सत्ता के लिए कोई प्रतिस्पर्धी चुनाव नहीं होता। सत्ता एक ही पार्टी और एक ही परिवार के हाथों में केंद्रित है।
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म्यांमार और अफगानिस्तान: इन देशों में भी राजनीतिक व्यवस्था बेहद बंद है और लोकतांत्रिक चुनावों के माध्यम से नेतृत्व नहीं चुना जाता है।
लोकतांत्रिक देशों के साथ तुलनात्मक अध्ययन
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राजनीतिक स्वतंत्रता और विकल्प: लोकतांत्रिक देशों में जनता के पास विभिन्न राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों में से चुनने का विकल्प होता है। इसके विपरीत, ब्रुनेई, सऊदी अरब और इरिट्रिया जैसे देशों में जनता के पास ऐसा कोई विकल्प नहीं होता।
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जवाबदेही (Accountability): लोकतंत्र में सरकार जनता के प्रति जवाबदेह होती है और हर कुछ वर्षों में चुनावों के माध्यम से अपने काम का हिसाब देती है। पूर्ण राजशाही वाले देशों में शासक की सत्ता को चुनौती देने वाला कोई संविधान या निर्वाचित संसद नहीं होती।
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मानवाधिकार और नागरिक स्वतंत्रता: कई पूर्ण राजशाही और तानाशाही वाले देशों को मानवाधिकारों के हनन और नागरिक स्वतंत्रताओं को दबाने के लिए अंतरराष्ट्रीय आलोचना का सामना करना पड़ता है। उदाहरण के लिए, सऊदी अरब को दुनिया के सबसे सत्तावादी शासनों में से एक माना जाता है।
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आर्थिक स्थिति: कुछ राजशाही वाले देश (जैसे ब्रुनेई और सऊदी अरब) तेल और गैस के विशाल भंडार के कारण बेहद धनी हैं, और वे अपने नागरिकों को मुफ्त शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा जैसी सुविधाएं देते हैं। वहीं, इरिट्रिया या उत्तर कोरिया जैसे देशों की आर्थिक स्थिति काफी खराब है। लोकतांत्रिक देशों में आर्थिक स्थिति अलग-अलग होती है, लेकिन नीतियां आमतौर पर जनहित के आधार पर बनती हैं।
चुनावों और राजनीतिक विकल्पों की कमी किसी भी देश के नागरिकों को सत्ता में भागीदार बनने से रोकती है। हालांकि ब्रुनेई जैसे कुछ देशों में नागरिकों को आर्थिक सुरक्षा मिलती है, लेकिन पूर्ण राजनीतिक स्वतंत्रता और नागरिक अधिकार केवल एक मजबूत लोकतांत्रिक व्यवस्था में ही संभव हैं।

