छत्तीसगढ़ में UCC की दस्तक : साय कैबिनेट का बड़ा फैसला, ड्राफ्ट तैयार करने के लिए कमेटी गठित
UCC in Chhattisgarh | 16 अप्रैल, 2026. छत्तीसगढ़ में अब ‘एक देश, एक विधान’ की दिशा में कदम बढ़ा दिए गए हैं। विष्णु देव साय सरकार ने राज्य में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code – UCC) लागू करने की प्रक्रिया को औपचारिक रूप से शुरू कर दिया है। कैबिनेट की हालिया बैठक में इस ऐतिहासिक प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी गई है, जिससे छत्तीसगढ़, उत्तराखंड और गुजरात के बाद इस दिशा में कदम उठाने वाला देश का तीसरा प्रमुख भाजपा शासित राज्य बन गया है।
कब से लागू होगा यूसीसी?
वर्तमान स्थिति के अनुसार, छत्तीसगढ़ सरकार ने अभी कोई निश्चित तारीख घोषित नहीं की है, लेकिन प्रक्रिया तेज कर दी गई है। कैबिनेट ने ड्राफ्ट तैयार करने के लिए रिटायर्ड जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति के गठन को मंजूरी दी है।
क्या करेगी यह समिति?
- विभिन्न समुदायों, कानूनी विशेषज्ञों और आम जनता से सुझाव लेगी।
- एक व्यापक मसौदा (Draft) तैयार करेगी जिसे राज्य विधानसभा में पेश किया जाएगा।
- माना जा रहा है कि आगामी 6 से 8 महीनों के भीतर ड्राफ्ट तैयार कर इसे कानून का रूप दिया जा सकता है।
क्या होगा इसका मुख्य असर?
UCC के लागू होने से राज्य में रहने वाले सभी नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, विरासत और गोद लेने जैसे व्यक्तिगत मामले एक समान कानून के दायरे में आ जाएंगे। इसके प्रमुख प्रभाव निम्नलिखित होंगे:
- लैंगिक समानता (Gender Equality): वर्तमान में अलग-अलग धर्मों के पर्सनल लॉ में महिलाओं के अधिकार अलग-अलग हैं। यूसीसी आने से पैतृक संपत्ति में बेटियों का समान अधिकार और तलाक के बाद गुजारा भत्ता जैसे नियमों में एकरूपता आएगी।
- विवाह और तलाक के नियम: बहुविवाह (Polygamy) जैसी प्रथाओं पर रोक लग सकती है और सभी धर्मों के लिए विवाह का पंजीकरण अनिवार्य हो जाएगा। तलाक की प्रक्रिया भी सभी के लिए एक समान और कानूनी रूप से सुव्यवस्थित होगी।
- कानूनी सरलीकरण: अभी अदालतों को अलग-अलग धर्मों के जटिल कानूनों के आधार पर फैसले लेने पड़ते हैं। एक कानून होने से न्यायिक प्रक्रिया तेज होगी और भ्रम की स्थिति खत्म होगी।
आदिवासी संस्कृति और चुनौतियां
छत्तीसगढ़ की लगभग 32% जनसंख्या आदिवासी है। यूसीसी को लेकर सबसे बड़ी चर्चा उनकी परंपराओं को लेकर है। आदिवासी समाज के कुछ नेताओं और विपक्षी दलों ने चिंता जताई है कि यूसीसी से आदिवासियों के पारंपरिक रीति-रिवाज, जैसे कि संपत्ति का हस्तांतरण और विवाह परंपराएं प्रभावित हो सकती हैं। हालांकि, सरकार का कहना है कि समिति आदिवासियों के हितों और उनकी विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान का पूरा ध्यान रखेगी और सभी हितधारकों से चर्चा के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने स्पष्ट किया है कि यूसीसी का उद्देश्य किसी की धार्मिक मान्यताओं में हस्तक्षेप करना नहीं, बल्कि नागरिक अधिकारों में समानता लाना है। राज्य सरकार इसे सामाजिक सुधार के एक बड़े कदम के रूप में देख रही है, जबकि राजनीतिक गलियारों में इसे आगामी चुनावों से पहले एक बड़ा मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है।
