EPF नियम में सबसे बड़ा बदलाव: 15 हजार से बढ़कर 25,000 हुई सैलरी लिमिट, जानिए आप पर क्या होगा असर
EPFO New Rules 2026. नौकरीपेशा लोगों के लिए केंद्र सरकार ने एक बहुत बड़ी खुशखबरी दी है। लंबे समय से चल रही मांग को पूरा करते हुए केंद्रीय कैबिनेट ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के तहत अनिवार्य कवरेज के लिए वेतन सीमा (Wage Ceiling) को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रति माह कर दिया है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार (16 सितंबर 2026) को इस ऐतिहासिक फैसले का ऐलान किया, जो 17 सितंबर 2026 से लागू हो जाएगा।
आपको बता दें कि ईपीएफ की वेतन सीमा में पूरे 12 साल बाद बदलाव किया गया है। इससे पहले 1 सितंबर 2014 को इसे 6,500 रुपये से बढ़ाकर 15,000 रुपये किया गया था।
इस अहम फैसले से करीब 51 लाख नए कर्मचारी ईपीएफओ के दायरे में आ जाएंगे। आइए विस्तार से समझते हैं कि इस फैसले का कर्मचारियों और कंपनियों (नियोक्ताओं) पर क्या असर होगा।
कर्मचारियों को होने वाले 4 बड़े लाभ
1. ईपीएस पेंशन (EPS Pension) में 67% तक का भारी उछाल:
सबसे बड़ा फायदा कर्मचारियों की पेंशन में होगा। अब तक ईपीएस (EPS) के तहत पेंशन की गणना अधिकतम 15,000 रुपये की सैलरी पर होती थी। अब यह बेस बढ़कर 25,000 रुपये हो गया है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, नई लिमिट के तहत 5 साल या उससे अधिक समय तक काम करने वाले कर्मचारियों की मासिक पेंशन में 67% तक की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
2. रिटायरमेंट फंड (Corpus) में बड़ी बढ़ोतरी:
पीएफ खाते में कर्मचारी और कंपनी दोनों बेसिक सैलरी का 12-12 प्रतिशत हिस्सा जमा करते हैं। लिमिट बढ़ने से 25,000 रुपये तक की बेसिक सैलरी वालों के पीएफ खाते में अब ज्यादा पैसा कटेगा और जमा होगा। इससे कम्पाउंडिंग (चक्रवृद्धि ब्याज) का फायदा मिलेगा और रिटायरमेंट के वक्त एक बहुत बड़ा फंड तैयार होगा।
3. 51 लाख नए कर्मचारियों को मिलेगी सोशल सिक्योरिटी:
जो कर्मचारी 2014 के बाद नौकरी में आए थे और जिनकी बेसिक सैलरी 15,000 रुपये से ज्यादा थी, वे अनिवार्य पीएफ और पेंशन (EPS) के दायरे से बाहर थे। अब 15,000 से 25,000 रुपये तक कमाने वाले सभी कर्मचारी अनिवार्य रूप से EPF, EPS (पेंशन) और EDLI (जीवन बीमा) योजना से जुड़ जाएंगे।
4. मुफ्त जीवन बीमा (EDLI) का कवर बढ़ा:
ईपीएफओ सदस्य को EDLI स्कीम के तहत मुफ्त जीवन बीमा मिलता है। लिमिट बढ़ने से अब ज्यादा कर्मचारियों को इस बीमा कवर का लाभ मिलेगा, जिससे अनहोनी की स्थिति में परिवार को आर्थिक सुरक्षा मिलेगी।
इन-हैंड सैलरी पर असर : लिमिट बढ़ने से 15,000 से 25,000 के बीच कमाने वाले कर्मचारियों के पीएफ में अब ज्यादा पैसा (लगभग 1,200 रुपये/माह तक अतिरिक्त) कटेगा। इससे आपकी ‘टेक-होम’ (इन-हैंड) सैलरी थोड़ी कम हो सकती है, लेकिन यह पैसा आपके ही भविष्य के लिए एक सुरक्षित निवेश है।
नियोक्ताओं पर क्या होगा असर?
कंपनियों पर इस फैसले का सीधा वित्तीय प्रभाव पड़ेगा:
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खर्च में वृद्धि: नियम के मुताबिक, कर्मचारी के पीएफ में कंपनी को भी बराबर (12%) का योगदान देना होता है। लिमिट 25,000 होने से कंपनियों को प्रति कर्मचारी हर महीने लगभग 1,200 रुपये अतिरिक्त जमा करने होंगे।
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सैलरी स्ट्रक्चर (CTC) में बदलाव: जिन कंपनियों में पीएफ कर्मचारी के सीटीसी (CTC) का हिस्सा होता है, उन्हें अब कर्मचारियों के सैलरी स्ट्रक्चर और अलाउंस को री-स्ट्रक्चर (Rejig) करना पड़ेगा।
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बीमा प्रीमियम: EDLI के तहत कंपनी द्वारा दिए जाने वाले 0.5% योगदान का बोझ भी लिमिट बढ़ने के कारण बढ़ेगा।
सरकार के खजाने पर कितना भार?
सरकार को भी ईपीएस (पेंशन फंड) में अपनी तरफ से 1.16% का योगदान देना होता है। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि इस नई व्यवस्था से सरकार के खजाने पर हर साल लगभग 11,339 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
सरकार का यह कदम ‘सोशल सिक्योरिटी’ के दायरे को व्यापक बनाने की दिशा में एक मास्टरस्ट्रोक है। भले ही तात्कालिक रूप से कर्मचारियों के हाथ में आने वाली सैलरी थोड़ी कम हो जाए, लेकिन बुढ़ापे की लाठी (पेंशन) और रिटायरमेंट फंड के लिहाज से यह एक बेहद लाभकारी और सुरक्षित कदम है।

