ईरान-इजराइल युद्ध की मार: बेगुनाह देशों पर टूटा आर्थिक संकट, भारत-चीन समेत दुनिया पर क्या हो रहा असर

Impact of US Iran War | 16 अप्रैल, 2026. ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच चल रहे भीषण संघर्ष ने वैश्विक बाजार को हिलाकर रख दिया है। स्ट्रेस ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) की नाकेबंदी और ऊर्जा ठिकानों पर हमलों ने दुनिया के सामने अब तक का सबसे बड़ा ‘एनर्जी संकट’ खड़ा कर दिया है। युद्ध के मैदान से दूर बैठे देश अब इसकी भारी कीमत चुका रहे हैं।

सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले देश

युद्ध में शामिल न होकर भी जो देश सबसे ज्यादा नुकसान झेल रहे हैं, उनमें चीन, भारत, जापान और दक्षिण कोरिया शीर्ष पर हैं।

  1. एशियाई दिग्गज (चीन और भारत): मध्य पूर्व से होने वाले तेल और एलएनजी (LNG) निर्यात का 75% हिस्सा एशियाई देशों को जाता है। होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से भारत और चीन जैसे देशों में कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित हुई है, जिससे इन देशों में महंगाई चरम पर है।
  2. खाड़ी के पड़ोसी देश (GCC): सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कतर और कुवैत जैसे देश तटस्थ रहने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन उनके बुनियादी ढांचे (हवाई अड्डे और डीसैलिनेशन प्लांट) ईरानी मिसाइलों की चपेट में आ रहे हैं। कतर की गैस उत्पादन क्षमता में 17% की गिरावट आई है।
  3. यूरोपीय संघ (EU): पहले से ही ऊर्जा संकट झेल रहे यूरोप के लिए इस युद्ध ने प्राकृतिक गैस की कीमतों को आसमान पर पहुंचा दिया है, जिससे वहां मंदी (Recession) का खतरा गहरा गया है।

क्या-क्या हो रहा है नुकसान?

  • तेल और गैस की कीमतों में आग: मार्च 2026 की शुरुआत में कच्चा तेल $80 के आसपास था, जो अब $120 प्रति बैरल को पार कर चुका है। इससे दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर हैं।
  • सप्लाई चेन और व्यापार: दुनिया का 20% तेल इसी क्षेत्र से गुजरता है। जहाजों के मार्ग बदलने और बीमा प्रीमियम (Maritime Insurance) बढ़ने से माल ढुलाई की लागत 200% तक बढ़ गई है, जिससे हर छोटी-बड़ी चीज महंगी हो गई है।
  • खाद्य असुरक्षा: मध्य पूर्व से होने वाले उर्वरक (Fertilizer) निर्यात में भारी गिरावट आई है। इसका सीधा असर कृषि प्रधान देशों पर पड़ रहा है, जिससे वैश्विक स्तर पर खाद्य संकट पैदा होने का डर है।
  • विमानन क्षेत्र: हवाई मार्ग बंद होने या खतरनाक होने के कारण एयरलाइंस को लंबे रास्तों का उपयोग करना पड़ रहा है, जिससे हवाई टिकटों के दाम दोगुने हो गए हैं।

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने इसे इतिहास का सबसे बड़ा ‘सप्लाई व्यवधान’ बताया है। अगर यह युद्ध जल्द नहीं थमा, तो दुनिया ‘स्टैगफ्लेशन’ (Stagflation) यानी उच्च महंगाई और शून्य विकास दर की स्थिति में फंस सकती है।