बार-बार टिकट कटाने का झंझट खत्म! रेलवे के ‘सर्कुलर जर्नी टिकट’ से एक साथ घूमें 8 शहर, जानें बुकिंग का पूरा नियम

Circular Journey Ticket. त्योहारी सीजन या छुट्टियों में अगर आप परिवार के साथ कई शहरों की यात्रा या तीर्थाटन का प्लान बना रहे हैं, तो हर स्टेशन से नई ट्रेन का टिकट बुक करना किसी सिरदर्द से कम नहीं होता। यात्रियों की इसी परेशानी को दूर करने और सफर को सस्ता बनाने के लिए भारतीय रेलवे ‘सर्कुलर जर्नी टिकट’ (Circular Journey Ticket) की सुविधा देता है। यह एक ऐसा मास्टर टिकट है जो आपको एक ही टिकट पर पूरे देश के अलग-अलग शहरों में घूमने की आज़ादी देता है। आइए विस्तार से समझते हैं कि यह टिकट क्या है और आप इसका लाभ कैसे उठा सकते हैं।

सर्कुलर जर्नी टिकट क्या है?

सर्कुलर जर्नी टिकट रेलवे का एक विशेष ट्रैवल पास है, जो उन यात्रियों के लिए डिजाइन किया गया है जिन्हें एक ही ट्रिप में कई शहरों की यात्रा करनी होती है। इसकी सबसे बड़ी शर्त यह है कि आपकी यात्रा जिस स्टेशन से शुरू होगी, आखिर में घूम-फिरकर उसी स्टेशन पर खत्म होनी चाहिए। यानी आपका पूरा रूट एक ‘सर्कल’ (गोलाकार) बनाना चाहिए। यह सुविधा स्लीपर से लेकर एसी (3AC, 2AC, 1AC) तक सभी श्रेणियों में उपलब्ध है।

कहां-कहां और कितनी बार कर सकते हैं यात्रा?

इस टिकट की सबसे बड़ी खासियत इसका ‘ब्रेक जर्नी’ नियम है। आप अपनी पूरी यात्रा के दौरान अधिकतम 8 अलग-अलग स्टेशनों (शहरों) पर रुक (स्टॉपओवर) सकते हैं। आप या तो रेलवे द्वारा पहले से तय किए गए लोकप्रिय पर्यटन/तीर्थाटन वाले ‘स्टैंडर्ड रूट’ का चुनाव कर सकते हैं, या फिर अपनी पसंद के शहरों को जोड़कर अपना खुद का ‘कस्टम रूट’ बना सकते हैं। इस टिकट की वैधता आपकी यात्रा की कुल दूरी के आधार पर तय होती है, जिसमें 56 दिनों तक की लंबी यात्रा भी शामिल हो सकती है। नियम के अनुसार 400 किलोमीटर की दूरी को 1 यात्रा दिवस और हर ब्रेक जर्नी के लिए 2 अतिरिक्त दिन जोड़े जाते हैं।

कितने की आती है यह टिकट और कैसे होती है बचत?

सर्कुलर जर्नी टिकट की कोई एक निश्चित कीमत नहीं होती; इसका किराया आपके द्वारा तय की गई कुल दूरी और चुनी गई क्लास (स्लीपर/एसी) पर निर्भर करता है। हालांकि, यह सामान्य टिकटों के मुकाबले काफी सस्ता पड़ता है क्योंकि रेलवे इसमें ‘टेलीस्कोपिक फेयर’ (Telescopic Fare) का नियम लगाता है। इसका मतलब है कि दूरी जितनी ज्यादा होगी, प्रति किलोमीटर बेस किराया उतना ही कम होता जाएगा। अलग-अलग पॉइंट-टू-पॉइंट टिकट लेने पर आपको हर बार नया बेस फेयर देना पड़ता है, जबकि इसमें दो सिंगल जर्नी (कुल दूरी का आधा-आधा) मानकर किराया निकाला जाता है, जिससे किराए में भारी बचत होती है। सीनियर सिटीजंस को 1000 किलोमीटर से ज्यादा की यात्रा पर अलग से छूट का प्रावधान भी मिलता है।

यह टिकट कैसे काम करती है और बुकिंग का तरीका क्या है?

यह टिकट सीधे आईआरसीटीसी (IRCTC) ऐप या वेबसाइट से ऑनलाइन बुक नहीं होती है। इसे बुक करने के लिए आपको यह प्रक्रिया अपनानी होगी:

  1. रूट प्लान बनाएं: सबसे पहले अपनी यात्रा का रूट एक कागज पर तैयार करें कि कहां से शुरू करेंगे, किन 8 स्टेशनों पर रुकेंगे और कब लौटेंगे।

  2. अप्रूवल लें: इस प्लान को अपने नजदीकी बड़े स्टेशन के स्टेशन मैनेजर या डिविजनल कमर्शियल मैनेजर (DCM) को दिखाएं। वे दूरी के हिसाब से आपका कुल किराया तय करेंगे और एक अप्रूवल फॉर्म देंगे।

  3. टिकट खरीदें: अप्रूव्ड फॉर्म को रिजर्वेशन काउंटर पर देकर आप अपना ‘सर्कुलर जर्नी टिकट’ खरीद लें।

  4. सीट रिजर्वेशन: ध्यान रखें, सर्कुलर टिकट सिर्फ यात्रा का पास है। कन्फर्म सीट के लिए आपको इस पास के आधार पर यात्रा के अलग-अलग चरणों के लिए रिजर्वेशन काउंटर से केवल रिजर्वेशन फीस देकर सीट/बर्थ बुक करानी होगी।

इस योजना का उपयोग करके आप न सिर्फ बार-बार टिकट बुक करने के मानसिक तनाव से बच सकते हैं, बल्कि यात्रा बजट में भी शानदार कटौती कर सकते हैं।

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