छत्तीसगढ़ विधानसभा विशेष सत्र: महिला आरक्षण पर गरमाया सदन, संकल्प पारित
Chhattisgarh Assembly Special Session | Raipur 30 April 2026 . छत्तीसगढ़ की षष्ठम विधानसभा का नौवां सत्र आज विशेष रूप से ऐतिहासिक और हंगामेदार रहा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सरकार ने महिलाओं के लिए विधायी निकायों में 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक विशेष सत्र आहूत किया। इस एक दिवसीय बैठक का मुख्य एजेंडा केंद्र के महिला आरक्षण कानून के समर्थन में शासकीय संकल्प पारित करना और इसके क्रियान्वयन में देरी या विरोध करने वाली ताकतों के खिलाफ एकजुटता दिखाना था।
आरक्षण और सशक्तिकरण पर चर्चा
सदन की कार्यवाही शुरू होते ही मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रस्ताव रखा कि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को तत्काल 33 प्रतिशत आरक्षण दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरगामी सोच का परिणाम है और छत्तीसगढ़ इसे पूरी मजबूती से लागू करने के पक्ष में है। सत्ता पक्ष ने दलील दी कि परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होते ही इसे धरातल पर उतारा जाएगा।
पक्ष-विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक
सत्र के दौरान विपक्ष ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने आरोप लगाया कि सरकार इस संवेदनशील मुद्दे का राजनीतिकरण कर रही है। कांग्रेस ने मांग की कि आरक्षण को बिना जनगणना या परिसीमन की प्रतीक्षा किए तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए। इस दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच करीब चार घंटे तक तीखी बहस हुई, जिसके चलते विधानसभा अध्यक्ष रमन सिंह को कई बार हस्तक्षेप करना पड़ा।
निंदा प्रस्ताव का मुद्दा
विशेष सत्र बुलाने का एक अन्य प्रमुख कारण उन राजनीतिक दलों के खिलाफ ‘निंदा प्रस्ताव’ लाना था, जिन्होंने संसद में महिला आरक्षण विधेयक का विरोध किया था या इसे बाधित करने का प्रयास किया था। मुख्यमंत्री ने इसे ‘नारी शक्ति’ का अपमान बताते हुए विपक्ष को कटघरे में खड़ा किया।
कुल मिलाकर, यह विशेष सत्र छत्तीसगढ़ की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी और सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा वैचारिक युद्ध का मैदान बना रहा।
