ढाका में रवींद्रनाथ टैगोर की पेंटिंग पर कालिख पोती, 4 गिरफ्तार; जानें बांग्लादेश के लिए क्यों इतने खास हैं ‘गुरुदेव’

Dhaka Rabindranath Tagore Vivad. बांग्लादेश की राजधानी ढाका में एक बार फिर नोबेल पुरस्कार विजेता और महान साहित्यकार रवींद्रनाथ टैगोर के अपमान का मामला सामने आया है। ढाका के सेगुनबागीचा इलाके में स्थित ‘बांग्लादेश शिल्पकला अकादमी’ के बाहर बनी रवींद्रनाथ टैगोर की एक नई पेंटिंग (ग्रैफिटी) पर कुछ लोगों ने काली स्याही पोतने की कोशिश की। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए एक महिला समेत 4 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है।

घटना कब और कहाँ की है?

यह घटना 10-11 अक्टूबर 2026 के बीच ढाका के ‘बांग्लादेश शिल्पकला अकादमी’ के बाहर घटी। हाल ही में इस इलाके में सौंदर्यीकरण का काम किया गया था और महज 5 दिन पहले ही दीवार पर रवींद्रनाथ टैगोर की यह खूबसूरत ग्रैफिटी (भित्तिचित्र) उकेरी गई थी।

किसने और क्यों की यह हरकत?

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में देखा जा सकता है कि एक महिला हाथ में ब्रश लिए टैगोर की तस्वीर पर काली स्याही पोतने का प्रयास कर रही है। मौके पर मौजूद शाहबाग पुलिस ने उसे रोका और उसके तीन अन्य साथियों को भी हिरासत में ले लिया।

शुरुआती पूछताछ में महिला ने इसे “भारतीय आक्रामकता” (Indian aggression) के खिलाफ एक विरोध प्रदर्शन बताया। हालांकि, बाद में उसने अपने बयान बदलते हुए कहा कि वह वहां चल रहे एक अन्य नियमित प्रदर्शन में हिस्सा लेने आई थी। पुलिस की डिटेक्टिव ब्रांच (DB) इस मामले की गहन जांच कर रही है कि क्या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश या सामाजिक अशांति फैलाने का मकसद था।

इसके बाद क्या हुआ?

पुलिस ने इस कृत्य को गंभीरता से लिया है। गिरफ्तार किए गए चारों आरोपियों के खिलाफ आपराधिक साजिश, धार्मिक भावनाओं को आहत करने, विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने और देशद्रोह (Sedition) से जुड़ी धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। कोर्ट ने आरोपियों को रिमांड पर भेज दिया है।

बांग्लादेश के लिए रवींद्रनाथ टैगोर सम्माननीय क्यों हैं?

रवींद्रनाथ टैगोर केवल भारत के नहीं, बल्कि पूरे बंगाली समाज और बांग्लादेश की सांस्कृतिक पहचान का अहम हिस्सा हैं।

  1. राष्ट्रगान के रचयिता: बांग्लादेश का राष्ट्रगान ‘आमार सोनार बांग्ला’ रवींद्रनाथ टैगोर ने ही लिखा है। वह दुनिया के एकमात्र ऐसे कवि हैं जिनकी रचनाएं दो देशों (भारत और बांग्लादेश) का राष्ट्रगान बनीं।

  2. भाषाई और सांस्कृतिक जुड़ाव: बंगाली साहित्य, संगीत (रवींद्र संगीत) और दर्शन में उनके योगदान के बिना बांग्लादेश की संस्कृति अधूरी है। 1913 में साहित्य का नोबेल पुरस्कार जीतने वाले वह पहले एशियाई थे।

  3. एकता का प्रतीक: बांग्लादेश निर्माण के समय से ही टैगोर की कविताएं वहां के लोगों के लिए प्रेरणा और बंगाली राष्ट्रवाद का स्रोत रही हैं।

सांस्कृतिक प्रतीकों पर लगातार हमले

यह पहली बार नहीं है जब बांग्लादेश में टैगोर की विरासत को निशाना बनाया गया है। हाल ही के समय में कट्टरपंथी तत्वों द्वारा वहां मौजूद सांस्कृतिक और ऐतिहासिक प्रतीकों को लगातार नुकसान पहुंचाया जा रहा है। पिछले कुछ समय पहले सिराजगंज स्थित रवींद्रनाथ टैगोर के पैतृक आवास ‘रवींद्र कच्छरीबाड़ी’ (Rabindra Kacharibari) में भी भीड़ द्वारा तोड़फोड़ की घटना सामने आई थी, जिसने भारत और बांग्लादेश के बुद्धिजीवियों को गहरी चिंता में डाल दिया था।