छत्तीसगढ़ में शोर-शराबे पर लगेगी लगाम! नए ‘कोलाहल नियंत्रण बिल 2026’ पर सरकार ने जनता से मांगे सुझाव

Kolahal Niyantran Vidheyak 2026. अगर आप भी शहर या मोहल्ले में होने वाले बेतहाशा शोर-शराबे और ध्वनि प्रदूषण से परेशान हैं, तो आपके लिए एक जरूरी खबर है। छत्तीसगढ़ में शोर को नियंत्रित करने के लिए जल्द ही एक नया और सख्त कानून लागू होने जा रहा है। छत्तीसगढ़ शासन के गृह विभाग की ड्राफ्ट कमेटी ने ‘छत्तीसगढ़ कोलाहल नियंत्रण विधेयक, 2026’ का प्रारंभिक ड्राफ्ट (प्रारूप) तैयार कर लिया है।

पारदर्शिता और जनभागीदारी सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार ने इस नए कानून को लागू करने से पहले आम जनता, विषय विशेषज्ञों और संबंधित संस्थाओं से सीधे सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं।

क्या है यह नया विधेयक?

वर्तमान में प्रदेश में ‘कोलाहल नियंत्रण अधिनियम, 1985’ लागू है। बदलते समय और बढ़ते ध्वनि प्रदूषण को देखते हुए गृह विभाग ने इस पुराने कानून में आवश्यक संशोधन करते हुए 2026 के लिए यह नया और अपडेटेड प्रारूप तैयार किया है। इसका उद्देश्य रिहायशी और सार्वजनिक इलाकों में ध्वनि प्रदूषण को अधिक प्रभावी ढंग से रोकना है।

आप कैसे पढ़ सकते हैं ड्राफ्ट?

राज्य का कोई भी नागरिक प्रस्तावित प्रावधानों का आसानी से अध्ययन कर सके, इसके लिए ड्राफ्ट को हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में उपलब्ध कराया गया है।

  • आप इसे छत्तीसगढ़ पुलिस विभाग की आधिकारिक वेबसाइट [cgpolice.gov.in] पर जाकर ‘नोटिस/प्रेस रिलीज’ सेक्शन से डाउनलोड कर सकते हैं।

सुझाव और आपत्तियां कैसे भेजें?

अगर आपको इस प्रस्तावित विधेयक के किसी नियम या प्रावधान पर आपत्ति है या आप इसे और बेहतर बनाने के लिए कोई सुझाव देना चाहते हैं, तो सरकार ने इसके लिए 30 दिनों की समय-सीमा तय की है।

नागरिक और संस्थाएं अपनी राय इस पते पर लिखित रूप में भेज सकते हैं:

प्रमुख सचिव, छत्तीसगढ़ शासन, गृह एवं जेल विभाग, मंत्रालय, महानदी भवन, नवा रायपुर, अटल नगर

क्यों जरूरी है जनता की भागीदारी?

अक्सर कानून बनने के बाद कई नियमों पर विवाद होता है या आम लोगों को व्यावहारिक दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। सरकार की यह पहल आम जनता को सीधे नीति-निर्माण से जोड़ने का एक शानदार अवसर है। 30 दिन के भीतर प्राप्त सभी सुझावों और आपत्तियों की समीक्षा के बाद ही इस विधेयक को अंतिम रूप देकर विधानसभा में पेश किया जाएगा।

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