इथेनॉल खा गया आपके घर की शक्कर, जानिए भारत में शक्कर के उछलते दाम और इथेनॉल कनेक्शन का पूरा सच

Ethanol and Suger Prise. देश के थोक और खुदरा बाजारों में चीनी की कीमतों में तेज उछाल देखा जा रहा है। त्योहारी सीजन से ठीक पहले थोक मंडियों में चीनी के दाम ₹5,400 से ₹5,800 प्रति क्विंटल के स्तर को छू रहे हैं, जबकि कई शहरों में खुदरा दाम ₹52 से ₹60 प्रति किलोग्राम तक पहुंच चुके हैं।

भारत में शक्कर महंगी होने के प्रमुख कारण

  • सीमित घरेलू इन्वेंट्री (Closing Stocks): पिछले पेराई सत्र के बाद चीनी का कैरी-फॉरवर्ड स्टॉक हाल के वर्षों के निचले स्तर पर आ गया है।
  • मौसम और फसल की रिकवरी: महाराष्ट्र और कर्नाटक के कुछ इलाकों में अनियमित वर्षा तथा उत्तर प्रदेश में लाल सड़न (Red Rot) बीमारी के चलते प्रति एकड़ गन्ने से चीनी की रिकवरी दर में गिरावट आई।
  • त्योहारी मांग: रक्षाबंधन से लेकर दीवाली तक मिठाई निर्माताओं और एफएमसीजी सेक्टर से भारी मांग निकलती है, जिससे कीमतों पर दबाव बनता है।

क्या इथेनॉल निर्माण के कारण बढ़ी शक्कर की कीमत?

हाँ, इथेनॉल उत्पादन चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी का एक प्रमुख संरचनात्मक कारण बनकर उभरा है:

  • गन्ने के रस का डायवर्जन: सरकार के ‘E20’ (पेट्रोल में 20% इथेनॉल मिश्रण) लक्ष्य को पूरा करने के लिए चीनी मिलों ने ताजे गन्ने के रस और बी-हैवी शीरे (B-heavy Molasses) का बड़ा हिस्सा चीनी बनाने के बजाय सीधे इथेनॉल डिस्टिलेशन में झोंका।
  • सप्लाई में कमी: औसतन हर साल 30 से 40 लाख टन संभावित चीनी का उपयोग सीधे जैव ईंधन (इथेनॉल) बनाने में डाइवर्ट हो रहा है, जिससे खुदरा बाजार में चीनी की कुल आपूर्ति सीमित हुई है।

इथेनॉल फैक्ट्रियों में क्या इस्तेमाल हो रहा है और इसकी खपत?

इथेनॉल निर्माण में दो मुख्य रूट इस्तेमाल किए जा रहे हैं:

श्रेणी कच्चा माल (Feedstock) खपत और स्थिति
शुगर-बेस्ड रूट गन्ने का शुद्ध रस (Sugarcane Juice), बी-हैवी शीरा, सी-हैवी शीरा मिलों द्वारा लगभग 25–30% इथेनॉल आपूर्ति इसी रूट से होती है।
ग्रेन-बेस्ड रूट मक्का (Maize), एफसीआई का चावल (Surplus Rice), टूटा/क्षतिग्रस्त अनाज इथेनॉल का सबसे बड़ा हिस्सा (~60-70%) अब मक्के और चावल से तैयार हो रहा है। अकेले मक्के की 130–150 लाख टन खपत डिस्टिलरी में हो रही है।

पिछले एक साल में इथेनॉल उत्पादन vs शक्कर के दाम

  • इथेनॉल उत्पादन में उछाल: देश की कुल डिस्टिलरी क्षमता बढ़कर 1,800+ करोड़ लीटर सालाना के स्तर को पार कर चुकी है। पेट्रोल में इथेनॉल ब्लेंडिंग का औसत पिछले एक वर्ष में 12% से बढ़कर 15-16% के पार जा पहुंचा है।
  • चीनी की कीमतों में अंतर: एक वर्ष पूर्व जो खुदरा चीनी ₹44–₹46 प्रति किलो बिक रही थी, वह अब बढ़कर ₹52–₹60 प्रति किलो पर पहुंच गई है (लगभग 15% से 25% की सीधी बढ़ोतरी)।

घरेलू कीमतों पर काबू पाने के लिए सरकार ने चीनी के निर्यात पर सख्ती रखी है और मिलों के स्टॉक होल्डिंग नियमों को कड़ा किया है ताकि आम उपभोक्ता पर महंगाई का अत्यधिक बोझ न पड़े।