दिल्ली सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसा: 40 साल पुरानी इमारत गिरी, 7 मौत; जानिए कैसे हुआ हादसा और कौन जिम्मेदार

Satya Niketan Building Collapse. दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के पास स्थित सत्य निकेतन इलाके में 6 सितंबर 2026 को एक 40-50 साल पुरानी पांच मंजिला इमारत भरभराकर गिर गई। यह बिल्डिंग एक पेइंग गेस्ट (PG) के रूप में संचालित हो रही थी, जिसमें मुख्य रूप से छात्र रहते थे। इस दर्दनाक घटना ने दिल्ली में चल रहे अवैध निर्माण, लालच और पुरानी इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है।

कितने लोगों की जान गई?

इस हादसे में 7 लोगों की मौत हो गई है, और 5 लोग गंभीर रूप से घायल हैं जिनका अस्पताल में इलाज चल रहा है। एनडीआरएफ (NDRF), दमकल और दिल्ली पुलिस द्वारा चलाया गया रेस्क्यू ऑपरेशन 26 घंटे तक चला, जिसमें मलबे से कुल 12 लोगों को बाहर निकाला गया। मृतकों में जान गंवाने वाले 2 छात्रों के परिजनों ने मरणोपरांत कॉर्निया दान कर मानवता की मिसाल भी पेश की है।

हादसा कैसे हुआ?

प्रारंभिक जांच और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के बयान के अनुसार, इमारत ढहने के पीछे यह मुख्य कारण रहे:

  • बेसमेंट में पानी और अवैध निर्माण: बिल्डिंग के बेसमेंट में पानी भरने की पुरानी समस्या थी। लगातार बारिश से नींव कमजोर हो चुकी थी। इसके बावजूद, बिना पिलर वाली इस पुरानी बिल्डिंग के बेसमेंट में मरम्मत और निर्माण का काम चल रहा था, जिसके झटके और दबाव से पूरी इमारत बैठ गई।

  • जरूरत से ज्यादा ऊंचाई का भार: इमारत मूल रूप से दशकों पहले रिहायशी इस्तेमाल के लिए बनी थी, लेकिन ज्यादा किराये के लालच में इसमें अवैध रूप से मंजिलें बढ़ाई गईं।

इस पूरे प्रकरण का जिम्मेदार कौन?

हादसे के मुख्य जिम्मेदार बिल्डिंग मालिक और निगरानी में कोताही बरतने वाले प्रशासनिक अधिकारी हैं:

  • बिल्डिंग मालिक: दिल्ली पुलिस ने सख्त कार्रवाई करते हुए इमारत के 81 वर्षीय मालिक हरिराम गुप्ता, उनकी पत्नी उर्मिला गुप्ता और मैनेजमेंट संभालने वाले उनके बेटे महेश गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया है। इन पर गैर इरादतन हत्या और लापरवाही से जुड़ी धाराओं में एफआईआर (FIR) दर्ज की गई है।

  • MCD अधिकारी: प्रशासनिक स्तर पर लापरवाही बरतने के आरोप में दिल्ली नगर निगम (MCD) के 5 अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया गया है।

कानून क्या कहता है?

  • निर्माण के नियम: एमसीडी के नियमों के मुताबिक किसी भी रिहायशी इमारत की अधिकतम ऊंचाई 17.5 मीटर निर्धारित है, जबकि यह इमारत इस सीमा का उल्लंघन कर रही थी। बेसमेंट बनाने या किसी भी ढांचागत बदलाव के लिए अथॉरिटी से संशोधित बिल्डिंग प्लान (नक्शा) पास कराना कानूनी रूप से अनिवार्य है।

  • खतरनाक इमारतों पर कार्रवाई: दिल्ली नगर निगम अधिनियम के तहत, प्रशासन के पास यह अधिकार है कि वह किसी भी जर्जर और खतरनाक इमारत को तुरंत खाली कराकर उसे सील कर दे या गिरा दे।

  • भविष्य के लिए नई पॉलिसी: मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घोषणा की है कि सरकार जल्द ही एक नई पॉलिसी ला रही है, जिसके तहत पब्लिक इस्तेमाल वाली हर बिल्डिंग (जैसे- पीजी, स्कूल, नर्सिंग होम) का समय-समय पर स्ट्रक्चरल ऑडिट (Structural Audit) और सेफ्टी सर्टिफिकेशन अनिवार्य होगा।

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